बिना मिट्टी का इस्तेमाल किये नई पद्धति से उगा रहे हैं सैकड़ो प्रकार की सब्जियां, खड़ी कर दिए खुद की कम्पनी

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हम इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। यहां के वासी विभिन्न तरह से खेती करते हैं। कुछ किसान जैविक खेती करते हैं, तो कुछ परंपरागत खेती। वहीं कुछ केमिकल युक्त खेती भी करते हैं। इस तरह वह अपने खेतों में कई प्रकार की फसल उपजाकर बाजारों में बेंचते है और अपना जीवन-यापन करते हैं। आज की यह कहानी थोड़ी अलग है। इस कहानी में बिना मिट्टी युक्त खेती किया जा रहा है। इस खेती को “हाइड्रोपोनिक्स” खेती कहते हैं। इसे एक युवा कर रहा है जो अपनी कंपनी को बेच मिट्टी रहित खेती में कई प्रकार की सब्जियां और फल उगा रहा है।आइए पढ़ते हैं, उस युवा और इस कृषि के बारे में….

किसानों के लिए अति आवश्यक है कि वह किस खेती में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं, वही खेती करें। कम मुनाफे के कारण किसानों का मनोबल टूट जाता है। फिर वह इससे मुंह मोड़ लेते हैं लेकिन कुछ किसान इस मुसीबत का सामना कर अपने कार्य मे लगे रहते हैं। पहले हमारे किसान सिर्फ परम्परागत खेती कर हमारे देश की फसल उगाया करते थे। लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं हैं। कुछ किसान विदेशों की सब्जियां भी हमारे देश मे उगा रहें हैं और इसकी ज्यादा बिक्री से काफी मुनाफा भी कमा रहें हैं।

अजय नाइक

अजय नाइक का मुलप्रान्त कर्नाटक (Karnataka) है। हालांकि यह गोवा (Goa) में लम्बे अरसे तक रह चुके है और वर्तमान में बेंगलुरु (Bengluru) में हैं। अजय सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। पढ़ाई खत्म कर गोवा में अजय सॉफ्टवेयर कम्पनी में कार्य करने लगे। वर्ष 2011 में अजय ने इस नौकरी को अलविदा कह स्वयं की मोबाइल एप्लिकेशन वाली कंपनी खोली। उनका यह काम सफल हुआ और लाखो की कमाई हुई। लेकिन वह इस कार्य से संतुष्ट नहीं थे। इन्हें कुछ अलग ही करना था। अजय को “हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली” से खेती करने के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे करने के बारे में सोंचा।

हाइड्रोपोनिक्स या जलकृषि क्या है ?

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हाइड्रोपोनिक्स को ही जल कृषि कहा जाता है। इस खेती के लिए मिट्टी का प्रयोग नहीं किया जाता है। बालू, मिट्टी के बुरादे, लकड़ी के टुकड़े को पानी में मिलाया जाता है, खेती करने युक्त बनाने के लिए। अगर हम मिट्टी में खेती करते हैं तो हमारे फसल मिट्टी से ही अपना भोजन प्राप्त कर आगे बढ़ते हैं। लेकिन अगर हाइड्रोपोनिक विधि से खेती की जा रही है तो इसके लिए एक विशेष प्रकार का घोल बनाया जाता है और उसका पौधों पर छिड़काव किया जाता है तब पौधे की बढ़ोतरी होती है। इसे बनाने के लिए मैग्नीशियम,फास्फोरस, पोटैशियम, नाइट्रोजन, आयरन, जिंक, सल्फर और कैल्शियम आदि को मिलाकर तैयार किया जाता है। जल कृषि के लिए मात्र दो बार ही इस घोल को पौधों के विकास के लिए उपयोग किया जाता ।

अजय ने बेची अपनी कम्पनी

अजय ने जब ये बात जानी कि जलकृषि प्रणाली द्वारा वदेशी सब्जियों और फलों को उगा सकते हैं, साथ ही उचित मूल्य पर ग्राहकों को बेच भी सकते हैं। तब उन्होंने इस खेती को करने के बारे में निश्चय कर लिया। उन्होंने अपनी मोबाइल एप्लीकेशन वाली कंपनी जर्मनी को बेच दी। फिर उन पैसों के द्वारा उन्होंने स्वयं का हाइड्रोपोनिक फार्म ओपन करने का विचार किया। उन्होंने यह भी सोचा कि अगर मैं विदेशी सब्जियों को यहां उगाऊंगा तो इन्हें विदेशों से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

वर्ष 2016 में की खेती की शुरुआत

अजय ने हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली को अपनाकर खेती करने का निश्चय किया। वर्ष 2016 में अपने 6 मित्रों के साथ इस खेती की शुरुआत की। इस खेती की शुरुआत उन्होंने गोवा के एक स्थान करासवाडा में किया। इन्होंने जल कृषि विधि से फल और सब्जियां उगाई और उनके बारे में बहुत सारी जानकारियां भी इकट्ठे करें। विशेष रुप से अजय ने  खेती में विदेशी सलाद के तौर पर उपयोग किए जाने वाले सेलरी और लेट्स आदि उगाए। इस खेती से अजय को ज्यादा मुनाफा हुआ। अपनी इस बड़ी सफलता से वह बेहद खुश भी हुए। सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने इस खेती को अपनाकर विदेशो की फलों और सब्जियों को अधिक मात्रा में उगाने के बारे में सोचा। इसके लिए अजय ने  बेंगलुरु में एक फार्म की स्थापना की जिसका नाम “लेटसेट्र” रखा।
 
अजय इस फॉर्म में विदेशी सब्जियों और फलों के साथ  शिमला मिर्च और लीची भी उगा रहें हैं। इनके फलों और सब्जियों की क्वालिटी अच्छी होने के कारण बाजार में इसके बहुत से ग्राहक हैं। अधिक ग्राहक होने के कारण इन्हें अधिक मात्रा में लाभ भी हो रहा है। The Logically, Ajay को नमन करता है।