Sunday, October 24, 2021

एयरपोर्ट पर सफाई करने से लेकर अखबार बेचने वाले 31 वर्षीय युवक ने खड़ा किया 10 करोड़ की कम्पनी

परिश्रम का फल मीठा होता है” यह पहले हम कहानियों में पढ़ते थे तो लगता था कि कोई स्वादिष्ट मिठाई होता होगा। लेकिन जब इसे समझा तो पाया कि मीठा का मतलब आपका “सफल” होना। आज की यह कहानी एक ऐसे शख्स की है जो कभी सफाई का काम और अखबार बेचने का काम करतें थे लेकिन आज वह करोड़पति है।

आमिर कुतुब (Aamir Qutub) की उम्र तकरीबन 31 साल है और वे एक कंपनी “ऑस्ट्रेलिया बेस्ड एक मल्टीनेशनल डिजिटल फर्म” के मालिक हैं जिसका टर्नओवर लगभग 10 करोड़ है। आमिर कभी एयरपोर्ट पर सफाई करते थे और घर-घर जाकर अखबार बेचते थे। लेकिन अपनी मेहनत और मोटिवेशन के बल पर वे एक कम्पनी का मालिक बन गए जो अभी चार देशो में मौजूद है। आइए जानते हैं उनकी सफलता कहानी को…

business man Amir qutub

मिडिल क्लास में जन्मे आमिर क़ुतुब

आमिर कुतुब (Aamir Qutub) अलीगढ़ (Aligadh) के एक सामान्य वर्ग परिवार से है उनके पिताजी सरकारी नौकरी करते थे और माँ गृहणी । जब आमिर 12वीं पास किए तो एडमिशन बीटेक में करवाया गया क्यूंकी उनके पिताजी चाहते थे कि वे डॉक्टर या इंजीनियर बने। उनके दोस्त मैकेनिकल ब्रांच ले रहे थे तो उन्होंने भी वही ब्रांच ले लिया। लेकिन उनको पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लग रहा था वे सोंच रहे थे कि जो वे पढ़ रहे हैं उनका उनकी जिंदगी में क्या योगदान है किस काम का है। जाहिर सी बात है अगर पढ़ाई में मन नही लगेगा तो परीक्षा का परिणाम अच्छा नहीं होगा और हुआ भी वही, एग्जाम में अच्छे अंक नहीं मिल पाए। जिससे उनके टीचर ने उनको बोल दिया कि जिंदगी में कुछ नही कर पाओगे क्योंकि तुम्हारी रुचि पढ़ाई में नहीं है।

सोशल नेटवर्किंग एप्प बनाया

उनसे पढ़ाई के अलावा जो हो पाता उन्होंने वह किया। जब ये 2nd ईयर में आए तो उन्होंने “एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज” में पार्टिसिपेट किया और उनको अवार्ड भी मिला। वे अपनी मेहनत से आगे बढ़ते गए और उन्होंने एक सोशल ऐप के बारे में सोंचा लेकिन उनके दोस्त उनका मजाक उड़ाने लगे और बोले कि तुझे कोडिंग आती नही, ना ही उस एरिया से हो, कैसे बनाओगे ऐप??? तब उन्होंने जितनी जरुरत पड़ी गूगल से कोडिंग सीखी। ये उस समय की बात है जब फेसबुक भी मार्केट में नया ही लांच हुआ था। फिर उन्होंने ने जो कोडिंग सीखा था उससे अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक सोशल ऐप बनाया। जिसको बनाते हीं बहुत सारे स्टूडेंट्स ने उसको इंस्टॉल किया। उस एप्प की खासियत यह थी कि उसमें आप बात कर सकते थे और फोटो भी शेयर कर सकते थे।

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नौकरी को छोड़ा

उन्होंने गूगल पर ही प्रपोजल बनाना सीखा क्योंकि उनको एक मैगजीन के लिए स्पॉन्सरशिप चाहिए था। अंततः मैगजीन के लिए एक स्पॉन्सर मिल गया उन्होंने लीडरशिप स्किल सीखी क्योंकि वह कॉलेज के इलेक्शन में सेक्रेटरी के पद पर खड़े हुए थे और जीत भी गए। फिर उन्होंने मैगजीन के बहाने मार्केट के बारे में जाना। उनका ट्रांसफर टीसीएस के प्लेसमेंट में हो गया। लेकिन वह कोई भी नौकरी नहीं करना चाहते थे। बाद में वह दिल्ली होंडा में सिलेक्शन हुआ तो घरवाले खुश हुए। उन्होंने सारे काम को ऑनलाइन शिफ्ट कर दिया जिससे जीएम खुश हुए और होंडा ने उनके सिस्टम को कई जगह लागू किया। फिर उन्होंने इस कंपनी को रिजाइन कर दिया क्योंकि उन्हें यह काम नहीं करना था। वे खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते थे।

शुरू करना चाहते थे खुद का कार्य

वह अपना व्यपार शुरू करना चाहते थे लेकिन उन्हें बिजनेस की उतनी समझ नहीं थी। विदेश जाने के लिए भी वीजा चाहिए था। फिर उन्होंने एमबीए कॉलेज में दाखिला लिया। फर्स्ट सेमेस्टर के लिए कुछ स्कॉलरशिप मिल गई और कुछ पैसा घर से मिला। वे ऑस्ट्रेलिया गए। जब उनकी नौकरी छोड़ने की बात घर वालों को पता चली तो वह बहुत गुस्सा हुए। घर वाले बोले कि पढ़-लिखकर यही काम करेगा। वे आमिर को भारत आने की जिद करने लगे लेकिन उनको तो अपना खुद का काम करना था। उन्होंने अपना एक छोटा सा गिराज खोला और उसके लिए काम करने लगे फिर एक कठिनाई यह थी कि कंपनी तो बन गई लेकिन उसके लिए क्लाइंट नहीं मिल रहे थे।

1 दिन बस में एक बंदा मिला। उसकी भी छोटी सी कंपनी थी उसने उसके बारे में बताया और बोला कि मेरे लिए काम करो। लेकिन मैं पैसे नहीं दूंगा फिर उन्होंने उसके लिए काम किया और 1 महीने में उन्होंने ऐसा काम किया कि उसकी कंपनी को 5000 डॉलर प्रति महीने की बचत होने लगी।

 Amir qutub

बैंक से लिए लोन

कुछ वक्त बाद उन्होंने बैंक से 50 लाख लोन लिया। क्योंकि उनको अपना काम शुरू करना था लोन इतना बड़ा था कि उनके ऊपर अधिक कर्ज हो गया। फिर उन्होंने अपने क्लाइंट से बात की और बोला कि पैसे आ रहे हैं लेकिन बचत नहीं हो रहा। इसका कारण जानने के लिए उन्होंने अपनी कंपनी के क्लाइंट से बात की और पता चला कि लोगों से चार्ज कम लिया जा रहा है और उनके क्लाइंट में भी दोष है। फिर उन्होंने अपने क्लाइंट को चेंज किया और चार्ज बढ़ाया।

तब उन्होंने 20 परसेन्ट क्लाइंट के साथ काम किया और उनकी कंपनी ने बहुत ज्यादा तरक्की किया। तब उनकी कंपनी ने डेढ़ साल में लोन चूका दिया। अब उनका बिजनेस चार देशों में फैला है और उनके पास 100 स्थायी एम्प्लाइज है और करीब 300 कॉन्ट्रैक्ट्स हैं।

आमिर कुतुब के ने जिस तरह सफल बिजनेस से खुद को बेहतर स्थिति में पहुंचाया है वह अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। The Logically आमिर जी को बहुत-बहुत बधाईयां देता है तथा उनके प्रयासों की खूब सराहना करता है।