Ankita kumawat starts dairy farm

हमारी यहां ऐसी मानसिकता बनी हुई है कि कम पढ़े लिखे लोग खेती तथा डेयरी फार्मिंग करते है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही है। आज के समय मे कुछ ऐसे भी उदाहरण देखने को मिल रहे है कि ऊंच क्वालिफाइड लोग भी एक से एक अच्छी नौकरियां छोड़ कर आधुनिक खेती तथा डेयरी फार्मिंग के तरफ अपना रुख कर रहे है और अपने मेहनत के बदौलत यह साबित कर दे रहे है कि सही दिशा में अगर किसी भी क्षेत्र में ध्यान दिया जाए तथा आधुनिक खेती तथा डेयरी फार्मिंग का सहारा लिया जाए तो इस के क्षेत्र में भी नौकरी के बजाय अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। आज हम बात करेंगे, राजस्थान की एक युवती अंकिता कुमावत (Ankita Kumawat) के बारे में, जिन्होंने IIM करके डेयरी फार्मिंग के क्षेत्र में काम किया और यह साबित कर दिया की इस क्षेत्र में कोई भी लगन से मेहनत करें तो नौकरी के बजाय इसमें भी सही मुकाम हासिल कर सकते है।

पिछले डेढ़ साल से कर रही ‘मातृत्व डेयरी’  नाम से डेयरी फार्मिंग  से जुड़ा कारोबार 

राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर की रहने वाली 24 वर्षीय अंकिता कुमावत (Ankita Kumawat) ने 2009 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कलकत्ता से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने 2014 तक कंपनियों में काम किया।शुरूआत में कंपनियों में मन मुताबिक तनख्वाह और अच्छी सुविधाएं मिलने पर उनको बहुत अच्छा लगता था इसलिए वो अपने काम पर अच्छे से फोकस करने लगी। तभी अचानक उनके पिता का स्वास्थ्य खराब रहने लगा। इसलिए उनको अपने पैतृक गांव आना पड़ा। उनके माता-पिता सरकारी कर्मचारी थे लेकिन उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद डेयरी व्यवसाय शुरू किया था। जब वह अजमेर में अपने पैतृक गांव वापस आ गईं तब उन्होंने महसूस किया कि बड़ी बेटी के रूप में यह उसका कर्तव्य और नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने पिता के साथ रहे और उसके द्वारा शुरू किए गए पारिवारिक व्यवसाय में शामिल हो। उसके बाद वह अपने पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ गई।

Ankita kumawat starts dairy farm

शुरुआत में आई अड़चने

शुरुआत में अंकिता को कई महीनों तक कम राजस्व होने के कारण अपनी जेब से पैसे निकालने पड़ते थे लेकिन उन्होंने कभी विश्वास नहीं खोया। उनका मानना ​​था कि एक सफल व्यवसायी बनने के लिए कम से कम 1,000 दिनों की मेहनत करनी पड़ती है। उन कठिन दिनों के दौरान उनकी दृढ़ता ने सबसे अच्छा काम किया।

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फिर तोड़ना पड़ा पारंपरिक पैटर्न

अंकिता को बाद में पारंपरिक पैटर्न को तोड़ना पड़ा और उन्होंने जैविक डेयरी और डेयरी उत्पादों की होम डिलीवरी की अवधारणा पेश की। उसने जैविक सब्जियां, अनाज, आटा, शहद, मसाले आदि बेचना शुरू किया। सभी उत्पादों की होम डिलीवरी हुई और उसका व्यवसाय फैलने लगा। वह बताती है कि, उनकी सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ग्राहकों को यह समझाना कि उनके उत्पाद दूसरों से कैसे अलग हैं। क्योंकि उनके पास आने वाले ग्रामीण इलाकों के ग्राहक दूध के स्वाद या गाय की स्वच्छता को न तो समझते थे और न ही कोई महत्व देते थे। इसलिए उनको समझना बहुत मुश्किल था।

Ankita kumawat starts dairy farm

‘मातृत्व डेयरी’ नामक डेयरी फार्म की कुछ विशेषताएँ

अजमेर में ‘मातृत्व डेयरी’ नाम की ये डेयरी दो बीघा जमीन पर स्थित है। इस फार्म में कई प्रकार प्रजाति की गाय और भैंस हैं। जिसमें देसी, हालिस्टन, जर्सी, मुर्रा, पाइवाल जैसी गाय के अलावा प्रकार की भैंसे शामिल हैं। यहां पर लगभग 100 गायें और कई भैंसे हैं। जिनसे रोजाना 150 लीटर से 180 लीटर तक दूध निकाला जाता है और ये रिटेल और होलसेल दोनों तरीके से बेचा जात है। डेयरी के आसपास की रेजिडेंट सोसायटी में रहने वाले लोग खुद यहां आकर दूध ले जाते हैं, और दूध की सप्लाई लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में डेयरी से जुड़े कुछ लोग करते हैं। दूध के अलावा यहां पर पनीर, मावा, मक्खन और दूसरे उत्पाद भी बेचे जाते हैं, लेकिन पनीर और मावा यहां पर केवल आर्डर पर ही तैयार किया जाता है।

भारत मे कृषि को दिया बढ़ावा

कृषि के क्षेत्र में भी अब लगातार भारतीय गांवों में बदलाव देखने को मिल रहा है। धीरे-धीरे कृषि क्षेत्र अपनी महिमा खो रहा है। लेकिन अंकिता ने व्यवसाय को संचालित करने और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अपने मूल स्थान पर व्यवस्थित तरीके से खेती की आधुनिक तकनीकों के उपयोग किया। भारत में खेती को बढ़ावा दिया। उन्होंने जैविक डेयरी फार्मिंग के एक प्रयास “मातृत्व डेयरी और जैविक खाद्य” की स्थापना की।

लोगों को दिया रोजगार

अंकिता का कहना है कि, वह बिजनेस वुमन होने पर गर्व महसूस करती हैं। पहले वह दूसरों के यहां काम किया करती थी लेकिन अब उन्हें बहुत खुशी होती है कि वों दूसरों को रोजगार देने का अवसर प्रदान कर रही है।

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लोगों को सही कीमत पर शुद्ध और केमिकल मुक्त दूध उपलब्ध कराना है, अंकिता और उनकी टीम का लक्ष्य

अंकिता के मुताबिक, जैविक खेती और डेयरी उद्योग में अपार संभावनाएं हैं। जैसे-जैसे मजबूत ब्रांड खुद को कृषि और सौर ऊर्जा व्यवसायों से जोड़ना शुरू करते हैं, उनका कहना है कि इस पेशे में आने वाले युवाओं के लिए भविष्य उज्ज्वल दिखता है।

अजमेर के अलावा आसपास के दूसरे शहरों में भी दूध का करना चाहती है सप्लाई

अंकिता आगे अपना डेयरी का और विस्तार करना चाहती हैं। वो अजमेर के अलावा आसपास के दूसरे शहरों में भी दूध की सप्लाई करना चाहती है। इस काम के लिए उनकी योजना प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की है, ताकि दूर दराज के इलाकों तक कच्चे दूध को सप्लाई की जा सके।

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