Saturday, July 31, 2021

रालेगण सिद्धि से निकलकर देश के सबसे बड़े जन लोकपाल आंदोलन का नेतृत्व किये :अन्ना हज़ारे

अन्ना हजारे…यह नाम आते हीं जेहन में एक बेहद सौम्य , जुझारू , सत्यवादी व अहिंसावादी और परोपकारी व्यक्तित्व की तस्वीर उभर आती है ! उनका असली नाम किसन बाबूराव हजारे है ! इनका जीवन प्रेरणा का भंडार है ! अन्ना जी के स्वभाव , सोंच और विचार को देखकर लोगों को उनमें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की छवि नजर आती है ! लोगों को जागरूक कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करके सरकार की जड़ तक हिला देने वाले अन्ना हजारे युवाओं में भी बेहद प्रासंगिक हैं !

प्रारंभिक जीवन

अन्ना हजारे का जन्म 15 जून 1937 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के रालेगण सिद्धि गांव में हुआ था ! आर्थिक रूप से बेहद गरीब परिवार में जन्म लेने से उन्हें बचपन से हीं आर्थिक संघर्ष करना पड़ा ! यह देखकर उनकी बुआ उन्हें मुंबई लेकर चली गईं जहाँ उन्होंने सातवीं तक की पढाई की ! आर्थिक चुनौतियों के मिलते चोट के कारण वे दादर स्टेशन के बाहर एक फूल के दुकान में 40 रूपये के वेतन पर काम करने लगे ! उसके बाद उन्होंने अपनी फूल की दुकान खोल ली और अपने दो और भाईयों को भी रालेगण से बुला लिया ! गरीबी को बेहद करीब से देखने वाले व उसे जीने वाले अन्ना हजारे ने कभी हार नहीं मानी और अपनी सूझ-बूझ से जीवन पथ पर चलते रहे ! 1962 में चीन युद्ध के बाद जब सरकार ने युवाओं से सेना में भर्ती की अपील की तो 1963 में वे मराठा रेजीमेंट में ड्राइवर के रूप में भर्ती हो गए ! उनकी नियुक्ति पंजाब में हुई ! 1965 में पाकिस्तान से युद्ध के समय वे खेमकरण सीमा पर तैनात थे ! उस युद्ध में वहाँ तैनात सभी सैनिक मारे गए ! अपने वीर जवानों की शहादत ने अन्ना हजारे को बेहद दुखित कर डाला ! 15 वर्षों तक सेना में अपनी सेवा देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली ! इसके बाद अन्ना हजारे अपने गाँव आ गए तथा अपने सामाजिक कार्यों की शुरूआत की !

समाजसेवा को समर्पित जीवन

अन्ना हजारे जी के गांव में बिजली और पानी की गंभीर समस्या थी ! उन्होंने लोगों को नहर बनाने और गड्ढे खोदकर पानी इकट्ठे करने के लिए प्रेरित किया ! उन्होंने लोगों को वृक्षारोपण हेतु भी जागरूक किया जिसके कारण लोगों ने कई पेड़ लगाए ! उन्होंने अपनी जमीन बच्चों के हॉस्टल के लिए दान कर दी ! पेंशन के रूप में आने वाली सारी धनराशि उन्होंने गाँव के विकास के लिए दान कर दिया ! वे गाँव के एक मन्दिर में रहते हैं और उनका खाना बच्चों के हॉस्टल में हीं बनता है ! अन्ना हजारे के प्रयास के कारण उनका गांव आज प्रेम , स्नेह , भाईचारे की पराकाष्ठा पेश कर रहा है !

भ्रष्टाचार और सूचना अधिकार हेतु आन्दोलन

अन्ना हजारे ने समाज को दीमक की तरह खा रहे भ्रष्टाचार सरीेखी बीमारी को खत्म करने की ठानी और सर्वप्रथम 1991 में महाराष्ट्र सरकार के कुछ मंत्रियों को हटाए जाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए ! सरकार ने उन्हें मनाने की पुरजोर कोशिश की पर अन्ना हजारे किसी की ना सुनते हुए अपना अनशन जारी रखा , अंतत: सरकार को झुकना पड़ा और उसे दो मंत्रियों को हटाना पड़ा ! इसके बाद 2003 में उन्होंने सूचना के अधिकार के लिए आमरण अनशन किया ! इस आन्दोलन को पूरे देश से समर्थन मिला ! 12 दिनों तक चलने वाले इस अनशन के बाद सरकार को एक बार फिर झुकना पड़ा और इस अधिनियम के तहत कड़े विधेयक को पारित किया ! अन्ना हजारे का यह आन्दोलन इतना प्रभावकारी हुआ कि तत्कालीन केन्द्र सरकार ने भी 12 अक्टूबर 2005 को सूचना का अधिकार अधिनियम पारित किया ! सरकार इस अधिनियम में कुछ संशोधन करना चाहती थी लेकिन अन्ना हजारे ने इसका विरोध करते हुए पुन: अनशन कर दिया तत्पश्चात सरकार को अपना कदम पीछे खींचना पड़ा !

लोकपाल विधेयक आन्दोलन

5 अप्रैल 2011 को जन लोकपाल विधेयक को पारित करने के लिए अन्ना हजारे और उनके साथियों ने जंतर-मंतर पर अनशन शुरू कर दिया ! इन्होंने भारत सरकार से भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक बनाने की मांग की जिसके लिए इनलोगों ने सरकार को एक मसौदा भी तैयार कर सौंपा था ! यह आन्दोलन पूरे भारतवर्ष में फैल गया ! लोग सड़क पर उतरने लगे ! इस आन्दोलन का प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस आन्दोलन में समाज के हर ओहदे से ताल्लुक रखने वाले लोगों ने बढ-चढ कर हिस्सा लिया ! अन्ना हजारे ने इस आन्दोलन को जनान्दोलन बना दिया ! देशव्यापी तेज होती इस आवाज के कारण सरकार ने उनकी मांग स्वीकार ली और 16 अगस्त तक इसे पारित करने की बात कही ! सरकार ने अगस्त में जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया वह अन्ना हजारे और उनके साथियों द्वारा तैयार किए गए मसौदे से बिल्कुल विपरीत था ! 16 अगस्त से अन्ना हजारे पुन: अनशन पर जाने को तैयार हो रहे थे तभी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और तिहाड़ जेल भेज दिया ! इस खबर ने लोगों के आन्दोलन को और हवा दे दी ! सरकार ने अन्ना हजारे को सशर्त रिहा करने का आदेश दिया पर अन्ना हजारे अपने अनशन की बात पर अडिग थे ! हजारों लोग तिहाड़ जेल के सामने प्रदर्शन करने लगे ! लोगों के जबरदस्त समर्थन और प्रदर्शन के कारण दिल्ली पुलिस को रामलीला मैदान में 7 दिनों के अनशन करने की अनुमति देनी पड़ी ! पर अन्ना हजारे 30 दिन का अनशन चाहते थे अंतत: किसी तरह 15 दिनों के अनशन की अनुमति उन्हें मिल गई ! अनशन और अन्दोलन शुरू हुआ ! देश के युवाओं ने इस आन्दोलन को और सशक्त कर दिया ! सरकार अन्ना हजारे के अनशन को खत्म नहीं कर पाई और अन्ना हजारे ने लोकपाल के अंदर 3 बातों का प्रावधान रखने के शर्त के साथ अपने अनशन को समाप्त करने की घोषणा की !

पुरस्कार एवं सम्मान

समाजसेवा को अपने जीवन को उद्देश्य बनाकर लोगों की भलाई करने वाले और बेहद प्रभावकारी आन्दोलन करने वाले अन्ना हजारे को कई पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैं ! अन्ना हजारे को तत्कालीन भारत सरकार ने 1990 में पद्मश्री सम्मान और 1992 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया ! उन्हें इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार , कृषि भूषण पुरस्कार , यंग इंडिया पुरस्कार , शिरोमणि अवार्ड व जन सेवा अवार्ड आदि कई पुरस्कार मिल चुके हैं !

अन्ना हजारे जी ने समाजसेवा को जिस तरह तन-मन-धन और समर्पण से सींचा है और समाज के उत्थान हेतु कई त्याग किए हैं वह सदियों तक लोगों के लिए पथप्रदर्शक रहेगा ! Logically महान व्यक्तित्व के धनी अन्ना हजारे जी को नमन करता है !