कचड़े से कारोबार: इन दोस्तों ने शुरू किया अनोखा स्टार्टअप, कचड़े से करते हैं लाखों की कमाई

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हमारे देश में बढ़ती जनसंख्या और उसकी आपूर्ति के वजह से कचरा और प्रदूषण में बहुत बढ़ोतरी हुई है। आज हमारे देश में लाखो टन कूडा हर रोज निकलता हैं। दिन-प्रतिदिन बढ़ते इस कचरे से हमारा पर्यावरण अधिक प्रदूषित हो रहा हैं। देश में उत्पन्न होने वाला अधिकतर कूड़ा कार्बनिक प्रोडक्ट्स, गन्दगी और धूल से बना होता है। इसलिये यह हमारे पर्यावरण को तेज रफ्तार से दूषित करता हैं। वातावरण को स्वच्छ रखना हम इन्सानो का कार्य है। हमें अपने वातावरण को प्रदूषित होने से रोकना चाहिए।

कुछ लोग पर्यावरण को बचाने के प्रयास में जुट गयें है। कचरे को रिसाइकिल कर पुनः उपयोग में लाया जा सकता है। इससे हम एक स्वच्छ वातावरण में रह सकेंगे। वातावरण स्वच्छ होने से हम भी स्वस्थ्य रहेंगें। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिये “रिकोर्ट” नामक कम्पनी ने कूड़े-कचरे को रीसाइक्लिंग करने की एक शानदार कोशिश की है।

आइए जानतें हैं, इस बेहतरीन प्रयास के बारें में

“रिकोट” नाम की कम्पनी का श्रेय अनुराग तिवारी (Anurag Tiwari) को जाता है। अनुराग तिवारी हरियाणा (Hariyana) के कुरुक्षेत्र के रहने वाले हैं। अनुराग ने फाइनेंस से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की हैं। पोस्ट ग्रेजुएट की उपाधि पाने के बाद उन्होंने 2 वर्ष तक भारती एयरटेल कम्पनी में काम किया। लेकिन कभी-कभी इन्सान को जो मिलता है वह उससे कुछ अलग करना चाहता हैं। अनुराग तिवारी भी कम्पनी में काम करने के अलावा कुछ अलग और अपना करना चाहते थे। अपनी इस चाहत को पूरा करने के लिये अनुराग ने एक मित्र के साथ मिलकर एक एडवरटाइजिंग (Advertising) कंपनी खोली। इस कंपनी को सलाना 5 से 10 करोड़ का टर्नओवर हो रहा था। अनुराग ने अपने जिस दोस्त के साथ मिलकर काम किया उस दोस्त का नाम ऋषभ भाटिया (Rishabh Bhatiya) हैं। ऋषभ भाटिया फरीदाबाद (Faridabaad) के निवासी हैं। वे कंपनी के सलाना 5 से 10 करोड़ के टर्नओवर से संतुष्ट नहीं थे। अनुराग कुछ ऐसा करना चाहते थे जिससे उनका सलाना 100 करोड़ का टर्नओवर हो सकें।

इंसान यदि सच्ची लगन से कुछ करना चाहे तो रास्ते अपने आप ही खुल जातें हैं। फिर वह अपने कार्य को करने में जुट जाता है। अनुराग को भी रास्ता मिल गया। अनुराग जब फरीदाबाद-गुडगाँव से सफर कर रहे थे तो रास्ते में उन्होनें कचरे का एक बहुत ढ़ेर देखा। उन्होंने देखा कि उस कचरे में बहुत सारे सामान ऐसे थे जिन्हें रिसाइकिल कर दुबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है। और लोग उसे बेकार समझ फेंक देते हैं। उस कुड़े के ढ़ेर को देखकर अनुराग के मन में एक विचार आया। अनुराग ने पर्यावरण को स्वच्छ और कचरे को रिसाइकिल करने का सोचा। ऐसा करने से शहर से कुड़े का ढ़ेर भी हट जायेगा और वह ख़ूबसूरत भी दिखेगा।

अपने इस विचार को हकिकत में बदलने के लिये अनुराग ने अपनी एडवरटाइजिंग कंपनी को बंद करने का फैसला किया। कंपनी को बंद करने के बाद अनुराग अपने मित्रों ऋषभ (Rishabh) और वेंकटेश (Wenkatesh) के साथ मिलकर स्टार्टअप खोला। उन्होनें स्टार्टअप का नाम “रिकोर्ट” रखा। स्टार्टअप खोलने के बाद इन्होंने दिल्ली (Delhi) और गुडगाँव (Gurgaon) के घरों से कचरा उठवाने का कार्य आरंभ कर दिया। लोगों को सिर्फ कॉल कर के कचरे के बारें में बता देना होता है। उसके बाद “रिकोर्ट” कंपनी अपना आदमी भेज कर कुड़ा उठवाने का काम करती है। वर्तमान में यह कंपनी गुडगाँव के 50 अपार्टमेंट से कूडा उठा रही हैं। इसके साथ ही यह कंपनी दिल्ली के भी 25 लाख लोगों के घर से कचरा उठाने का काम कर रही है। रिकोर्ट कंपनी में वर्तमान में 11 से अधिक कर्मचारी पेरोल पर कार्यरत हैं। इस कंपनी की वार्षिक टर्नओवर 15 करोड़ रुपये से अधिक हो रही है।

अनुराग तिवारी (Anuraag Tiwari) ने कचरा उठाने वाले और कबाड़ी वालों के आर्थिक जीवन में भी सुधार किया हैं। कुड़ा उठाने वाले गरीब मजदूरों को पहले 100 से 200 रुपये दिया जाता था, वहीं अब कुड़ा उठाने वाले मजदूरों को 500 से 700 रुपये दिया जाता है। ऐसा करने से गरीब मजदूरों की कुछ मदद भी हो जाती है।

कुड़े दो तरह के होते हैं- पहला सुखा कुड़ा और दुसरा गीला कुड़ा। सूखे कुड़े को इस कंपनी के द्वारा रीसाइक्लिंग के लिये भेज दिया जाता हैं। गीले कुड़े को उर्जा उत्पादन में भेजा जाता हैं जिससे खाद और बिजली का निर्माण होता है। अनुराग सूखे कचरे जैसे- प्लास्टिक, गत्ता, रद्दी, धातु और बायोमेट्रिक कचरे को अलग कर के भिन्न-भिन्न रीसाइक्लिंग प्लांट को बेच देते हैं।

अनुराग ने बताया कि हमारे देश में कोई भी ऐसी बड़ी कंपनी नहीं है जो कचरा प्रबंधन का काम करती है। भारत में भी कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में कम्पनी होनी चाहिए। इसके लिये अनुराग आने वाले कुछ सालों में इंटरनेशनल मैनेजमेंट एंड रीसाइक्लिंग कंपनीज के साथ जॉइंट वेन्चर के लिये तैयारियाँ कर रहें हैं।

भारत सरकार (Indian Government) अनुराग के नेक कर्यो की सराहना करतें हुए वह अनुराग को 1 माह के लिये इंडो जर्मन ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिये बिजिनेस विजीट के लिये जर्मनी (Germany) भेजी थी। भारत सरकार द्वारा किये गये इस कार्य को अनुराग अपनी एक बहुत बड़ी सफलता मानते हैं। अनुराग का सपना है कि हमारा देश स्वच्छ बनें। अपने इस सपने को साकार करने के लिए वह हमेशा प्रयासरत हैं। Anuraag Tiwari की कम्पनी दिल्ली म्युनिसिपल कारपोरेशन के साथ मिलकर 25 लाख घरों के कचरे को इकट्ठा कर उसे रीसाइक्लिंग करने का काम कर रही है।

अनुराग तिवारी (Anurag Tiwari) द्वारा चलाए गये अभियान के लिये The Logically अनुराग तिवारी को शत-शत नमन करता है और उनके द्वारा किये गये कार्यों की सराहना करता हैं।

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