Sunday, December 5, 2021

पथरीली जमीन पर सोना, बेहद कम पानी में अनोखे तरीके से उगा रहे हैं 15 तरीकों के जैविक फसल

कृषि के लिए प्राय: कहा जाता है कि खेत अच्छा होना चाहिए , मिट्टी उपजाऊ होनी चाहिए लेकिन यदि काबिलियत हो तो पत्थर में भी सोना उगाया जा सकता है। यह महज एक लोकोक्ति हीं नहीं है बल्कि यह सच है और इसे सच कर दिखाने वाले का नाम है अर्जुन पाटीदार। इन्होंने पथरीली जमीन पर अपनी अथक मेहनत से जैविक खेती द्वारा 15 तरह के फसल उत्पादन का कारनामा कर दिखाया है। आईए जानते हैं उनके द्वारा किए जा रहे इस पूरे कार्य के बारे में…

जहाँ पर और जैसी जमीन पर अर्जुन पाटीदार आज बेहतरीन खेती कर रहे हैं वहाँ पर अन्य किसान निश्चित हीं हार स्वीकार कर लौट आएँगे। अर्जुन पाटीदार मंदसौर जिले के सुवासरा के रहने वाले हैं। वहाँ की जमीन पथरीली है, पथरीली होने के कारण वहाँ पानी की भी बहुत बड़ी समस्या है। पथरीली जमीन और पानी की समस्या के कारण वहाँ खेती करना बहुत हीं मुश्किल कार्य है।

पथरीली जमीन को ऐसे बनाया खेती लायक

चूकि वहाँ की जमीन पथरीली थी तो उसमें कोई भी उपज करना संभव नहीं था। जमीन को सबसे पहले खेती लायक बनाना था जिसके लिए वहाँ मिट्टी की आवश्यकता थी। अर्जुन पाटीदार ने दूसरे जगहों से मिट्टी लाकर उन पथरीली जमीनों पर बिछा दी और खेती करने लायक जमीन तैयार किया। इसके बाद उन्होंने उस जमीन पर खेती करना शुरू कर दिया।

बारिश के पानी से करते हैं सिंचाई

अर्जुन पाटीदार जहाँ पर खेती कर रहे हैं वहाँ पानी की भी बहुत समस्या है। जलस्तर बहुत हीं नीचा है। अब खेती के लिए किसी ना किसी तरह तो पानी का इंतजाम करना हीं था इसलिए अर्जुन ने अपने खेत में हीं कुएँ खोद रखे हैं जिसमें वे बारिश का पानी इकट्ठा करते हैं और जब जहाँ जैसी सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है उसका उपयोग करते हैं। वे अपने खेतों में सिंचाई करने के लिए ड्रिप विधि का भी सहारा लेते हैं दरअसल इस विधि से सिंचाई करने से कम पानी में अधिक सिंचाई हो जाती है। इसमें पानी का बर्बादी बहुत कम होता है।

पूरी तरह करते हैं जैविक खेती

अर्जुन उन पथरीली जमीनों पर जैविक विधि से खेती करते हैं। उनका कहना है कि “मैं पूरी तरह से जैविक खेती करता हूँ जिससे लागत बहुत कम आता है। मिट्टी की उर्वराशक्ति बढाने के लिए वे गाय के गोबर से खाद बनाकर उसका इस्तेमाल करते हैं। जब फसलों में कीड़े आदि लगने लगते हैं तो गाय के मूत्र से कीटनाशक तैयार कर फसलों पर छिड़काव करते हैं। खुद के द्वारा जैविक खाद और कीटनाशक तैयार कर लेने से उन्हें बाजार से नहीं खरीदना पड़ता है और बाजार मूल्य से कम लागत में वह तैयार हो जाता है।

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कई फसलों की कर रहे हैं खेती

अर्जुन पाटीदार पथरीली भूमि होने के बावजूद अपनी सूझबूझ से उस पर करीब 15 प्रकार के फसल उगा रहे हैं। वे 20 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं जिस पर वे संतरा, टमाटर, पपीता, सौंफ, बेर, प्याज, लहसुन, गेहूं, उड़द, गेंदा और कई तरह की फसलें उगाते हैं। वे एक साथ कई फसलों की खेती करते हैं। वे खेतों में मुख्य फसल के साथ-साथ खेत के किनारे और मेड़ों पर दूसरी फसलों की बुवाई कर देते हैं। इसके पीछे का वे तर्क देते हैं कि अगर खेत में लगे फसल का किसी कारणवश नुकसान हो जाता है तो खेत किनारे पर लगाया गया फसल से उस नुकसान की क्षतिपूर्ति हो जाती है। टमाटर लगे खेतों के किनारे पर वे गेंदा, अरहर, सौंफ और आम लगा देते हैं। कई फसलों को लगाने से आमदनी सालों भर होती रहती है।

अर्जुन पाटीदार ने जिस तरह पथरीली भूमि पर करीब 15 फसलों की खेती कर अपने हुनर का परिचय दिया वह अन्य लोगों के लिए बृहद प्रेरणा है। The Logically अर्जुन पाटीदार जी के प्रयासों की खूब सराहना करता है।