Tuesday, September 28, 2021

आस्था और भक्ति का महासंगम है देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम ! पढ़िए पूरी कहानी !

भगवान शिव की महिमा अपरंपार है ! इनके 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है झारखण्ड में देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ मंदिर ! लोग इसे बैद्यनाथ धाम भी कहते हैं ! भोलेनाथ का मंदिर अवस्थित होने के कारण हीं इस जगह का नाम देवघर पड़ा है !

बाबा भोलेनाथ के इस मंदिर की स्थापना के बारे में शास्त्र में एक कथा दर्ज है जिसमें उद्धृत है कि महाबलि रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था ! उसे शिव जी अराधना के लिए अपने देश लंका से कैलाश आना पड़ता था ! उसके मन में विचार आया कि क्यूँ ना शिव जी को लंका हीं लेकर चला जाए ! इसलिए उसने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए अपना शीश शिवलिंग पर चढाना शुरू कर दिया ! दशानन ने अपने नौ सिर चढा दिए और जैसे हीं दसवां शीश काटने हीं वाला हीं था कि भगवान शंकर प्रकट हो गए और वरदान माँगने को कहा ! रावण ने उस लिंग को लंका ले जाने का वरदान माँगा ! शिव जी ने सशर्त अनुमति दे दी ! शर्त यह था कि अगर रास्ते में जहाँ कहीं भी इसे पृथ्वी पर रख दिया जाएगा यह वहीं रह जाएगा ! रावण ने यह बात स्वीकार कर ली ! वह शिवलिंग को लेकर लंका के लिए चल पड़ा ! रास्ते में रावण को लघुशंका की अनुभूति हुई ! पास में हीं एक अहीर को आता देख रावण लिंग को कुछ देर के लिए पकड़ने को दिया ! रावण को लघुशंका करते हुए काफी देर हुई और इधर अहीर को शिवलिंग भारी लग रहा था इसलिए उसने शिवलिंग को भूमि पर रख दिया ! लघुशंका के पश्चात लौटने पर रावण यह देख भौचंका रह गया ! वह शिवलिंग को वहाँ से उखाड़ने का खूब प्रयास किया ! लेकिन वह कुछ नहीं नहीं कर पाया ! और लिंग पर अपना अँगूठा लगाकर वापस लंका चला गया ! इसके बाद भगवान विष्णु , ब्रह्मा आदि देवताओं ने वहाँ आकर शिवलिंग की पूजा कर उनकी प्रतिस्थापना की ! भगवान विश्वकर्मा ने वहाँ भव्य मंदिर का निर्माण कर दिया !

यह मंदिर पूरे वर्ष श्रद्धालुओं से भरा रहता है ! वहाँ जाकर उनकी महिमा को देखा जा सकता है ! मंदिर से कुछ दूरी पर शिवगंग नाम का एक तालाब है जिसमें स्नाना कर भक्त शिव जी पर जलार्पण करते हैं ! सावन मास भगवान शिव के लिए खास माना जाता है ! इस मास में लोग बिहार के सुल्तानगंज स्थित गंगा नदी से जल भरकर काँवर के सहारे बोल-बम के उद्घोष के साथ 105 किलोमीटर पैदल यात्रा तय कर देवघर स्थित शिवलिंग पर जल चढाते हैं ! भगवान शिव के मंदिर के सामने माँ पार्वती का भी मंदिर है ! दोनों मंदिर हमेशा लाल रंग के धागे से एक दूसरे से जुड़ा है ! लोग इसे गेठी जोड़ा हुआ कहते हैं ! उस मंदिर प्रांगण में गणेश , कार्तिकेय , हनुमान , माँ काली आदि के भी मंदिर स्थित हैं !

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देवघर प्रवेश करते हीं आस्था के भरपूर संचार की अनुभूति होने लगती है ! यह भगवान शिव के प्रमुख मंदिरों में से एक है ! ऐसे मान्यता है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने से सारे पाप धुल जाते हैं और लोगों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं !