Tuesday, May 24, 2022

बिहार: हेडमास्टर ने अपने पैसे से स्कूल में बनवाए जहाज, बच्चों को पढ़ाने का नायाब तरीका अपनाया

आज के दौर में पढ़ाई एक पेशा बनते जा रहा है, कुछ शिक्षक केवल इसलिए स्कूल आते हैं ताकि सरकार से मोटी रकम ले सके तो वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो आज भी गुरु की परंपरा और मर्यादा को बचाए हुए हैं। आज हम बात करेंगे एक ऐसे शिक्षक की, जिन्होंने अपने स्कूल में अपने निजी कोष से छात्रों के लिए हवाई जहाजनुमा पुस्तकालय का निर्माण कराया है, जिसमें 25 छात्र एक साथ बैठक कर पढ़ाई कर सकते हैं।

भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी बड़ा दर्जा है, और इस रूप के मर्यादा को संवारा है बिहार (Bihar) के समस्तीपुर जिला के मोहिउद्दीननगर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सिवैसिंहपुर के प्रधानाध्यापक मेधन सहनी (Medhan Sahni) ने, इन्होंने अपने विद्यालय में अपने निजी कोष से छात्रों के लिए शिक्षा उड़ान नाम से लाइब्रेरी तैयार किया गया है, जिसे पूरी तरह से हवाई जहाज का रूप दिया गया है। —Bihar’s school headmaster made a library like an airplane.

एरोप्लेन लाइब्रेरी में पढ़ते बच्चे

लाइब्रेरी को दिया गया पूरी तरह से हवाई जहाज का रूप

विद्यालय परिसर में बने इस लाइब्रेरी की बाहरी और भीतरी स्वरूप भी हवाई जहाज की तरह ही बनाया गया है। इस लाइब्रेरी के अंदर की सीटें भी हवाई जहाज की तरह ही बनाई गई है।

समस्तीपुर के स्कूल में बना एरोप्लेन

प्रत्येक कक्षा के छात्र बारी-बारी से आयेंगे पढ़ने

इस लाइब्रेरी को पूरी तरीके से हवाई जहाज का रूप दिया गया है, जिसमे बैठकर हवाई जहाज में बैठने जैसा महसूस किया जा सकता है। प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों को बारी-बारी से इसमें आकर पुस्तक का अध्ययन करने का मौका दिया जाएगा।

बता दें कि, हवाई जहाज के तरह दिखने वाला इस लाइब्रेरी में हवाई जहाज के पहिए दिखाए गए हैं। साथ हीं इसमें चढ़ने के लिए खूबसूरत सीढ़ियां बनाई गई है और दरवाजे भी लगाए गए हैं। इस विमान को अत्याधुनिक लाइटिंग से सुसज्जित किया गया है। —Bihar’s school headmaster made a library like an airplane.

इस विमान को पूरी तरह से हवाई जहाज की तरह कलर व डिजाइन किया गया है और उस पर ‘शिक्षा उड़ान’ लिखा गया है।

कैसे आया ऐसा पुस्तकालय बनाने का ख्याल?

विद्यालय के प्रधानाध्यापक मेधन सहनी (Medhan Sahni) ने बताया कि, मुझे ऐसी प्रेरणा कुछ स्कूलों के आर्किटेक्ट को देखकर मिली थी लेकिन सरकारी तौर पर कोष की व्यवस्था नहीं थी। फिर मैने फैसला किया कि अपने निजी कोष से हम इसे पूरा करेंगे और आज हमारी कोशिशों के बदौलत यह बनकर तैयार है, तो मुझे काफी खुशी हो रही है।

उन्होने (Medhan Sahni) आगे बताया कि, इस विमान को बनाने में 2 लाख से अधिक रुपए लग गए हैं तथा अभी कुछ काम और भी बाकी है। इस कदम को मैने छात्रों को स्कूल की ओर आकर्षित करने के लिए उठाया था। अब इसको देखकर बच्चे काफी खुश हैं और स्कूल भी भारी मात्रा में आ रहे हैं। —Bihar’s school headmaster made a library like an airplane.

बीते सोमवार को स्थानीय विधायक राजेश कुमार सिंह के द्वारा इस हवाई जहाजनुमा बने शिक्षा उड़ान पुस्तकालय का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि, अन्य सरकारी विद्यालयों को भी इस विद्यालय से कुछ सीख लेने की जरूरत है।