Saturday, July 31, 2021

कराटे में जीत चुकी हैं कई मेडल, फिर भी घर चलाने के लिए नही थे पैसे: झारखंड सरकार ने नौकरी देने का वादा किया

जब हमारे देश में कोई योद्धा या खिलाड़ी देश के लिए जीत हासिल करता है तो बहुत खुशी का माहौल बनता है। चाहे वह खुशी उनके घर मे हो या पूरे देश के लोगों में। लेकिन जब उनके कार्यों को महत्व नहीं दिया जाता तो उन्हें कितनी कठिनाई होती है। ऐसी ही हैं कराटे चैंपियन बिमला जिन्हें चैम्पियन होने के बावजूद अपने जीवन-यापन के लिए देशी शराब बेचना पड़ता है।

नेशनल चैंपियन बिमला मुंडा

जिस लडक़ी ने झारखंड के लिए दर्जनों पदक अर्जित किए, जिसमें 34 वीं राष्ट्रीय खेलों में रजत पदक (Silver Medal) भी शामिल है। वित्तीय संकट से निपटने और आजीविका कमाने के लिए वह देशी शराब बेचने को मजबूर हैं। उनके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने सोमवार 19 अक्टूबर को घोषणा की कि “राष्ट्रीय कराटे चैंपियन” (Bimla Munda बिमला मुंडा (Bimla Munda) को एक महीने के भीतर सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी।उन्होंने कहा कि यह दिन इस चैंपियन को पूर्व की सरकार ने दिखाया है। लेकिन मेरे द्वारा पदकों की प्राप्ति के लिए इस कराटे चैंपियन को और 32 अन्य उम्मीदवारों को राज्य सरकार के द्वारा नौकरी दी जाएगी। 

Bimla Munda

देशी शराब बेचने को थीं मजबूर

26 वर्षीय बिमला को वित्तीय संकट से निपटने के लिए और आजीविका कमाने के लिए बीयर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। मुंडा ने कहा “मेरे परिवार की खराब वित्तीय स्थितियों के कारण और मुझे अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने के लिए यह कार्य करना पड़ा। साथ हीं वह अपने कराटे का अभ्यास जारी रखने के लिए जिस खर्च की आवश्यकता थी वह इस व्यवसाय को शुरू करने से पूरा हुआ।

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मां करती थी दिहाड़ी मजदूरी

मुंडा ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया इस खेल में किसी को अपनी जेब से फीस का भुगतान करना पड़ता है और हर टूर्नामेंट के लिए यात्रा की लागत को वहन करना पड़ता है, जिसके लिए बहुत पैसे की आवश्यकता होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार मुंडा की माँ एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करती थीं। लेकिन बुढ़ापे और खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें काम छोड़ना पड़ा है। 

Bimla Mundas Medel

मुंडा ने 2008 में अपना पहला टूर्नामेंट खेला और जिला स्तर के टूर्नामेंट में अपना पहला पदक अर्जित किया।उन्होंने राज्य सरकार से कुछ छात्रवृत्ति या नौकरी पाने की उम्मीद की थी, लेकिन उसे खारिज करने या देने के लिए सरकार द्वारा ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।एक बार अपने चमकते हुए पदक और असाधारण उपलब्धियों पर गर्व करते हुए मुंडा ने कहा कि “पदक अपने रंग में खो जाने के साथ उन्हें जीवन की कठिन वास्तविकताओं को महसूस कराते हैं”।

बिमला और अन्य कैंडिडेट्स की उपलब्धियों और कार्यों को महत्व देते हुए झारखंड सरकार ने जो घोषणा किया है उसके लिए The Logically झारखंड सरकार की प्रशंसा करता है।

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