Birds conservation by Challenger group

आंगन में फुदकती गौरैया,मकान के मुंडेरों पर मेहमानों के आगमन की सूचना देता कौवा और ऊंची उड़ान भरते गिद्ध अब बहुत मुश्किल से दिखाई देते हैं। चैत महीने में कोयल की कूक भी अब अमराइयों में कभी-कभी ही कानों में सुनाई पड़ती है। इनके अलावा पक्षियों की कई अन्य प्रजातियां भी धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं।

शहर में गुम होती चहचहाहट, विलुप्त हो रहे पक्षी

हमने शहरीकरण और अंधाधुंध कटाई कर तमाम पक्षियों का आशियाना छीन जो लिया है। तमाम वैश्विक संगठन विलुप्त होते पक्षियों के संरक्षण (Birds conservation) के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं लेकिन परिणाम हम सभी के सामने है। भारत की बात की जाए तो केंद्र और राज्य सरकार की योजना समय के साथ ठंडे बस्ते में चली जाती है।

Birds conservation by Challenger group

नोएडा के चैलेंजर्स ग्रुप ने शुरू की खास पहल

नोएडा जैसा शहर जहां तमाम युवा कामकाज नौकरी में सक्रिय बिजी लाइफ जीते हैं। वहीं इन दिनों एक ऐसी संस्था उभर कर सामने आई है जिससे कई युवा जुड़कर पक्षियों के संरक्षण के लिए पहल कर रहे हैं। यह संस्था है Challengers Group जिसके संस्थापक 23 वर्षीय प्रिंस शर्मा (Challengers group founder Prince Sharma) हैं।

प्रिंस का कहना है कि “बदलते वातावरण और क्लाइमेट चेंज के मद्देनजर अगर पक्षियों का संरक्षण नहीं किया गया तो गौरैया या कोयल मात्र किताबों तक ही सीमित रह जाएंगी।”

 Challenger group
Birds conservation by Challenger group

कम लागत में टिकाऊ फूड शेल्टर बना रहे युवा

चैलेंजर्स ग्रुप की यह पहल है कि वह एकजुट होकर शहर में ज्यादा से ज्यादा जगहों पर पक्षियों के लिए दाना पानी का बंदोबस्त कर सकें। इसके लिए टीम ने बेहतरीन आइडिया निकाला है। The Logically से इस बारे में जानकारी साझा करते हुए प्रिंस ने बताया कि ” दाना और पानी रखने के लिए हमने पहले घी, तेल, रिफाइंड के खाली कनस्तर कबाड़ की दुकान से खरीदा। फूड शेल्टर बनाने के लिए मुख्य तौर पर रिसाइकल्ड टिन और कनस्तर (Recycled products to make bird shelter) का प्रयोग किया गया है।”

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 Challenger group help people

सुविधा का रखा गया खास ध्यान

अब बारी थी इसके हुलिए को बदलने की। तस्वीरों में देख सकते हैं कि कनस्तर को चारों ओर से काटा गया फिर बाहरी हिस्से को आगे की ओर मोड़ दिया गया है। ताकि उस पर दाना पानी आराम से रखा जा सके। चारों ओर बॉर्डर को मोड़ दिया गया है ताकि पक्षियों को कोई नुकसान न पहुंचे। इसके बाद कनस्तर के अंदर भरपूर मात्रा में पानी और बाहरी प्लेट्स पर चारा रखकर इसे पेड़ों पर टांग दिया गया। शुरुआत में जब कोयल समेत कई अन्य पक्षियों को आते हुए देखा गया तो टीम को हौसला मिला। इस प्रकार कई और फूड शेल्टर बनाने का काम शुरू हो गया।

Birds conservation by Challenger group

सेटअप के लिए 500 जगह चयनित

शहर में ऐसे 500 स्पॉट चुने जा चुके हैं जहां पक्षियों के लिए दाना और पानी का इंतजाम करने का लक्ष्य है। अब तक सेक्टर 12/22, सेक्टर 57 आउटपोस्ट, डीएम ऑफिस सेक्टर 27, सेक्टर 26,24,55 मिलाकर 51 जगहों पर पक्षियों के लिए यह सेटअप लगाया जा चुका है।

Challenger group help animals

अन्य सामाजिक मुद्दों पर भी इन युवाओं का दमखम

शैलेन्द्र, रोशनी, विशाल, गीतिका, सूरज, शुभम, सतीश और अन्य तमाम युवा 2017 से सक्रिय चैलेंजर्स ग्रुप से जुड़कर इस नेक पहल में योगदान दे रहे हैं। प्रिंस ने बताया कि अनाधिकारिक तौर पर वह सात साल पहले से ही इस काम में जुटे हैं। फिलहाल अब टीम में कई युवा मेंबर्स शामिल हैं। जो शिक्षा, जागरूकता, स्वास्थ्य , महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति काम कर रहे हैं। यह युवा नुक्कड़ नाटक से भी लोगों को जागरूक करते हैं।

हम और आप भी रिसाइकल्ड प्रोडक्ट से ऐसे सेटअप तैयार कर सकते हैं। जिसमें दाना और पानी का प्रबंध कर के इसे अपनी बालकनी या छत पर टांग सकते हैं। ताकि चिलचिलाती धूप और गर्मी में इन बेजुबानों को बचाया जा सके।

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