Saturday, December 3, 2022

बंजर जमीन पर कर रहे जादुई फूलों की खेती, लागत से 5 गुना अधिक मुनाफा भी कमा रहे

आजकल किसानों के बीच फूलों की खेती को लेकर काफी जागरूकता दिख रही है। वे ट्रेडिशनल फार्मिंग के साथ फूलों की खेती कर लाखो रुपए का लाभ कमा रहें हैं। फूलों की खेती से लाभ कमाने वाले क्षेत्रों में नाम आता है उत्तर प्रदेश के हमीरपुर का। हमीरपुर के मुस्करा क्षेत्र स्थित चिल्ली गांव के व्यक्ति 40% परंपरागत खेती को अपनाने के साथ जादुई फूलों की खेती कर रहे हैं। यह फूलों की खेती बंजर जमीन भी हरी हो रही है इस जादुई फूलों को कैमोमाइल नाम से जाना जाता है। अगले माह इसमें फूल दिखने लगेंगे।

जादुई फूलों की खेती

हमीरपुर के मुखिया धर्मजीत त्रिपाठी यह बताते हैं कि बुंदेलखंड के झांसी के चार ब्लॉक में किसान अधिक से अधिक संख्या में जादुई फूलों की खेती अपना रहे हैं। हमीरपुर के अतिरिक्त चित्रकूट एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में भी जादूई फूलों की खेती के प्रति दिलचस्पी बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार कैमोमाइल को जादुई फूल कहा जाता है और यह निकोटीन रहित है। अगर किसी को पेट संबंधी समस्या है तो यह जादुई फूल उसके लिए लाभदायक सिद्ध होता है।

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1 एकड़ में 5 क्विंटल का उत्पादन

जानकारी के अनुसार इस फूल का उपयोग कॉस्मेटिक के तौर पर भी होता है। रघुवीर सिंह जो कि चिल्ली गांव की निवासी हैं वह बताते हैं आयुर्वेदिक कंपनी में फूलों का डिमांड अधिक होने के कारण यहां के हर किसान जादुई फूलों की खेती कर रहे हैं। 1 एकड़ जमीन में लगभग 5 क्विंटल फूलों का उत्पादन होता है जिसे बेचने के लिए किसानों को मार्केट का दौरा नहीं करना पड़ता है और यह घर बैठे ही निर्यात हो जाते हैं। जिस कारण किसानों का इसके प्रति अधिक झुकाव देखने को मिल रहा है।

किसानों के अतिरिक्त मजदूर भी कर रहें है खेती

रघुवीर सिंह जी बताते हैं कि मात्र 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही इसकी खेती की शुरुआत हुई है। खेतों में फूलों के पौधे लग चुके हैं। यहां के किसानों के अतिरिक्त चिमनियों पर काम करने वाले मजदूर जैसे श्यामलाल तथा मदनपाल भी जादुई फूलों की खेती कर रहे हैं। उनका यह मानना है कि हम हर वर्ष इससे लाखों रुपए का लाभ कमा सकते हैं इसीलिए हमने जादुई फूलों की खेती की है।

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5 गुना होगा लाभ प्राप्त

चिल्ली गांव के अतिरिक्त राठ तथा गोहांड के सैकड़ों किसान ट्रेडिशनल फार्मिंग के साथ जादूई फूलों को अपने खेतों में लगाएं हैं। किसान यह बताते हैं कि इसमें लागत लगभग 10 हज़ार रुपए है परंतु मुनाफा लागत से 5 गुना अधिक है। एक हेक्टेयर में लगभग 12 क्विंटल फूलों का उत्पादन होता है जिससे किसानों को लाभ मिलता है।

है अनेकों गुण

बीजों की बुआई के बाद इसे तैयार होने में लगभग 4 से 5 माह का वक्त लगता है। इसका उपयोग पेट संबंधी बीमारियों में किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को अल्सर है और वह इसके फूलों को सुखाकर चाय पिए तो वह अल्सर से मुक्त हो सकता है। इसका उपयोग होम्योपैथिक दवाओं में भी किया जाता है।