Tuesday, October 27, 2020

16 वर्षों में सरकार यह कार्य नही कर पाई , ग्रामीणों ने खुद की मेहनत से 3 महीनों में पुल निर्णाण कर डाला

पहाड़ी क्षेत्रों के छोटे-छोटे गांव जो शहर से दूर किसी एकांत और प्रकृतिक ज़िन्दगी का वरण करते हैं, वह शहरी लोगों की तुलना में अधिक कर्मठ और क्रिएटिव होते हैं । अरुणाचल प्रदेश के छोटे-छोटे कस्बों के रहने वाले लोग ने फिर से कुछ ऐसा किया जिससे एक मिसाल कायम हो गया ।

अरुणाचल प्रदेश के छोटे से प्रांत में रहने वाले लोगों ने एक ब्रिज को खुद की मेहनत से लगभग 3 महीने में बना डाला,यह ब्रिज नदी दूसरी तरफ अनेकों गांव को जोड़ने का काम करता था । 16 वर्ष पहले बाढ़ के कारण यह ब्रिज पूरी तरह से तहस-नहस हो गया था , सरकार पिछले डेढ़ दशक में इस पुल का निर्माण कराने में असमर्थ रही , लेकिन ग्रामीनवासियों ने खुद की मेहनत से यह पुल निर्माण कर डाला ।

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सन 2004 के पूर्व चकमा क्षेत्र के गांव को शहर से जोड़ने के लिए केवल यह एक पुल हुआ करता था जो बाढ़ के कारण ध्वस्त हो गया था। ग्रामीणों के अथक प्रयास के बावजूद भी नेताओं और सरकार ने इस पुल के निर्माण की अनेकों घोषणाएं की लेकिन पिछले 16 सालों में इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई । इस ब्रिज के टूट जाने के कारण यहां के ग्राम वासियों को दवा, स्वास्थ्य ,शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था , और इनके पास दूसरा विकल्प न होने के कारण यह पूरी तरह प्रभावित हो रहे थे।

इस परेशानी का समाधान निकालने के लिए ग्राम वासियों ने एक कमेटी का गठन किया और एक प्लान बनाया गया । इस कमेटी को चकमा यूथ वेलफेयर के निर्देशन में तैयार किया ।

गांव वालों की मदद से पैसे की व्यवस्था की गई और मार्च 2020 के शुरुआत में पुल निर्माण की कार्य शुरू की गई । हालांकि कोविड-19 के कारण कार्य में बाधा उत्पन्न हुई फिर भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए ग्रामीणों ने इस पुल को मई महीने के आखिरी दिन तक तैयार कर दिया । इस पुल को बनाने में कूल 4.85 लाख रुपए का खर्च आया जो पूर्ण रूप से ग्रामीणों के सहयोग से प्राप्त किया गया था । इस धनराशि में ₹1 भी सरकार की तरफ से सहयोग के तौर पर नहीं दिया गया।

इस पुल के निर्माण के कारण यहां के ग्रामीण वासियों को बहुत तरीकों से फायदे पहुंच रहे हैं अब उन्हें अपने सामानों को बेचने के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती , खरीदार अब उनके गांव की तरफ आकर खरीदारी कर लेते हैं ,इस तरह ग्रामीण वासियों ने अपने मेहनत और लगन से एक असंभव कार्य को बड़ी आसानी से पूर्ण किया वह सराहनीय और वंदनीय है ।

The Logically इन ग्राम वासियों के प्रयास की सराहना करता है।

Logically is bringing positive stories of social heroes working for betterment of the society. It aims to create a positive world through positive stories.

Prakash Pandey
Prakash Pandey is an enthusiastic personality . He personally believes to change the scenario of world through education. Coming from a remote village of Bihar , he loves stories of rural India. He believes , story can bring a positive impact on any human being , thus he puts tremendous effort to bring positivity through logically.

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