Sunday, November 29, 2020

74 घरों वाला यह गांव बिजली इस्तेमाल नही करता, खाना बनाने से लेकर हर कार्य सौर ऊर्जा से होता है:आत्मनिर्भर गांव

हमारी पृथ्वी पर बहुत सारे कुदरती स्रोत है लेकिन वे एक सीमित मात्रा में उपल्बध हैं। अगर हम किसी भी स्त्रोत का इस्तेमाल ज़रुरत से ज़्यादा करेंगे तो जाहिर सी बात हैं, उस स्रोत में कमी आएगी। देश दुनिया में दिन प्रतिदिन जनसंख्या में वृद्धि हो रही है। जनसंख्या में वृद्धि का मतलब है, हमारी प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल में बढ़ोत्तरी और संसाधनो की कमी।

इस बढ़ती जनसंख्या के ज़रुरतो की आपूर्ति के लिए दिन प्रतिदिन संसाधनों का इस्तेमाल असीमित मात्रा में हो रहा हैं। उदहारण के लिए पेड़-पौधों की अंधाधुन कटाई हो रही है। जल व बिजली का इस्तेमाल ज़रुरत से ज़्यादा हो रहा हैं। ऐसे ही और भी बहुत सारे स्रोत है जिनका अत्यधिक उपयोग हो रहा हैं। अगर हम सभी प्राकृतिक संसाधनों का ऐसे ही उपयोग करते रहें तो वो दिन दूर नहीं जब ये सब संसाधन कम या खत्म हो जायेंगें। फिर मनुष्यों का जीवन नष्ट होने के कगार पर आ जायेगा। संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण ही धरती का तापमान बढ़ रहा हैं। वैज्ञानिक नये-नये उपाय में इजाफा कर रहे है जिससे हमारी ज़रुरते भी पूरी हो और प्राकृतिक संसाधन भी बचे।

यह भी पढे :-

Solar Energy से हर रोज 500 बच्चों का खाना बनाया जाता है, इस तरह स्कूल ने बचाये लाखों रुपये

आजकल हर गांव में बिजली पहुंचाने का काम तेजी से हो रहा है लेकिन पहले के जैसे बिजली अभी भी कोयले से बनाई जा रही हैं। कोयला एक प्राकृतिक संसाधन हैं और इसकी मात्रा भी सीमित है अगर हम ऐसे इसका उपयोग सीमित नहीं किये तो यह गम्भीर चिंता का विषय बन जायेगा। इस चिंता को कम करने के लिए सौर उर्जा हमारे पास एक बेहतर विकल्प है। ऐसी ही एक जगह है जहां बिजली की पूर्ति सौर उर्जा से हो रही है और प्राकृतिक संसाधन भी बच रहें हैं।




मध्यप्रदेश के बेलूत जिले में स्थित एक गांव है जिसका नाम बांचा हैं। यहां 74 घर हैं। हर घर में सोलर उर्जा का उपयोग होता हैं। यह केंद्र सरकार और आईआईटी के छात्रों के सहयोग से ही सम्भव हो पाया हैं। इस गांव में खाना पकाने से लेकर रोशनी, और अन्य उर्जा से होनेवाले सभी काम अब सब सोलर उर्जा से ही होते हैं। वहां के लोगों का कहना है कि अब जंगल से लकड़ी काटने की ज़रुरत नहीं पड़ती है। सौर उर्जा से ही सब काम हो जाता हैं। उनका ये भी कहना है कि स्वच्छ उर्जा के इस्तेमाल से खाना बनाने वाला बर्तन भी काला नहीं होता जिससे उनका समय और मेहनत दोनो बचता हैं।

Source-Internet

केंद्र सरकार ने बांचा गांव को ट्रायल के लिए चुना था। वर्ष 2018 के दिसंबर तक इस गांव के सभी घरों को सोलर पैनल से जोर दिया। अब इस गांव के सभी लोग सोलर एनर्जी (solar energy) का ही उपयोग करतें हैं। मरकाम इंडिया रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 के अंत तक देश में सौर उर्जा की क्षमता 71,000 मेगावाट हो जायेगीं। केंद्र सरकार की कोशिश है कि हर गांव में सोलर प्लांट लगाया जाये।

समाज के कल्याण और प्राकृतिक संसाधनों के बचत में अहम भुमिका निभाने के लिए The Logically केंद्र सरकार, आईआईटी मुंबई के छात्रों और बांचा गांव के लोगों को नमन करता हैं।




Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

सबसे लोकप्रिय

30 साल पहले माँ ने शुरू किया था मशरूम की खेती, बेटों ने उसे बना दिया बड़ा ब्रांड: खूब होती है कमाई

आज की कहानी एक ऐसी मां और बेटो की जोड़ी की है, जिन्होंने मशरूम की खेती को एक ब्रांड के रूप में स्थापित किया...

भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन ‘तेजस’ बन्द होने के कगार पर पहुंच चुकी है: जानिए कैसे

तकनीक के इस दौर में पहले की अपेक्षा अब हर कार्य करना सम्भव हो चुका है। बात अगर सफर की हो तो लोग पहले...

आम, अनार से लेकर इलायची तक, कुल 300 तरीकों के पौधे दिल्ली का यह युवा अपने घर पर लगा रखा है

बागबानी बहुत से लोग एक शौक़ के तौर पर करते हैं और कुछ ऐसे भी है जो तनावमुक्त रहने के लिए करते हैं। आज...

डॉक्टरी की पढ़ाई के बाद मात्र 24 की उम्र में बनी सरपंच, ग्रामीण विकास है मुख्य उद्देश्य

आज के दौर में महिलाएं पुरुषों के कदम में कदम मिलाकर चल रही हैं। समाज की दशा और दिशा दोनों को सुधारने में महिलाएं...