Sunday, December 5, 2021

आदिवासी दम्पति ने 20 दिन में खोद दिया कुंआ : पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल

आज कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देश में लगे लॉकडाउन के कारण लोगों की अर्थव्यवस्था बिल्कुल चरमरा गई है ! ऐसे में कई लोग दूसरों से आस लगाए बैठे हैं कि कहीं , कोई उनकी मदद कर जाए ! पर इन सबसे इतर मध्यप्रदेश के सतना जिले के एक आदिवासी दम्पति ने अपनी सोंच , लगन और अथक मेहनत से आत्मनिर्भर बनने के लिए जो कार्य किया है वह सभी को प्रेरित करने वाला है ! उन्होने कहा कि आज तक हमलोगों को कई भी सरकारी लाभ नहीं दिया गया है , मुश्किलातों के इस विषम परिस्थिति में भी किसी ने हमारी कोई खबर नहीं ली है ! इसलिए हमने सोंचा कि अब किसी के भरोसा रहना उचित नहीं , हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए !

लोगों की प्यास बुझाने हेतु खोद डाला कुआँ  

ये दम्पति मध्यप्रदेश के सतना जिले के पिंडरा गाँव की बरहा बस्ती में रहते हैं ! उस बस्ती में 70 परिवार रहते हैं ! ग्रीष्म मौसम के चढते हीं इस बस्ती में पानी की समस्या गहराने लगती है ! लॉकडाउन में काम-काज बन्द होने से फुर्सत में बैठे इस दम्पति ने सोंचा कि क्यूँ ना इस समय का सदुपयोग किया जाए और जल संकट को दूर करने हेतु कुछ उपाय किए जाएँ ! पति-पत्नी दोनों ने अपने घर के पिछले हिस्से में एक कुआँ खोदना शुरू कर दिया ! जिस क्षेत्र में वे ये कार्य कर रहे थे वहाँ कुआँ खोदना कतई आसान नहीं था ! खोदने के क्रम में बड़े-बड़े पत्थर मिले जिन्हें उनके पास मौजूद हाथों वाले हथियार से तोड़ना बहुत मुश्किल कार्य था लेकिन उन दोनों के चट्टानी हौसलों के आगे पत्थर नहीं टीक पाए ! 20 दिनों की निरन्तर चले मेहनतकश खुदाई के बाद 15 फीट गहरा और 5 फीट चौड़ा कुआँ खोद दिया गया ! आदिवासी दम्पति ने कहा कि “हमें उस वक्त खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब खुदाई करते कुएँ में पानी निकल आया” !

जल-संकट दूर कर सब्जियों का उत्पादन

आदिवासी दम्पति ने कुआँ खोदकर अपने बस्ती के पानी की समस्या को खत्म कर दिया ! उन्होंने कहा कि “हमें दूसरों के आगे हाथ फैलाने के बजाय आत्मनिर्भर बनना चाहिए” ! पानी की समस्या खत्म होते हीं दोनों ने सब्जियों का उत्पादन करना शुरू कर दिया ! वे अपनी जमीन में कई तरह के सब्जियों की खेती कर रहे हैं और अपनी तथा आस-पास के लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं ! उन्होंने कहा कि “पानी की समस्या दूर होने से हमें किसी के भरोसे बैठना नहीं पड़ेगा ! हमने एक बगिया सजा ली है जिससे हमें मुश्किलों का सामना करने में मदद मिलेगी” !

किसी के आगे मदद का हाथ फैलाने के बजाय खुद आत्मनिर्भर बनने की जो पराकाष्ठा इन दम्पति ने पेश किया है वह अन्य लोगों के लिए भी प्रेरक है !