cremation of unclaimed corpese

कोरोना महामारी के इस भयावह दौर में न केवल संक्रमितों का इलाज एक बड़ी समस्या बना हुआ है बल्कि कोरोना से हो चुकी मौतों का अंतिम संस्कार भी एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। संक्रमण के डर से मृतकों के परिवारजन भी लाशों का अंतिम संस्कार करने से कतरा रहे हैं। इन हालातों में, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए दरभंगा (Darbhanga) के ‘कबीर सेवा संस्थान’ के सदस्य और पत्रकार व समाजसेवी नवीन सिन्हा लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं।

नवीन (Navin Sinha) के इसी समर्पण भाव और अपनी जान की परवाह किये बिना किये जाने वाले कार्य को देखते हुए हाल ही में उन्हे ‘विद्यापति सेवा संस्थान’(Vidhyapati Seva Sansthan) द्वारा ‘मिथिला विभूति सम्मान-2021’ (Mithila Vibhuti Sammaan-2021) से नवाज़ा गया है।

कोरोना ग्रसित लोगों की लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर रहे है नवीन

कोविड-19 की इन दुखद परिस्थितियों ने आज समाज का वो संवेदनहीन पक्ष भी दिखा दिया है जहां लोग अपने प्रियजनों की लाशों का अंतिम संस्कार करने से भी पीछ हट रहे हैं और उनकी लाशों को लावारिस छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे में दरभंगा के ‘कबीर सेवा संस्थान’ के सदस्य नवीन सिन्हा ने अपने प्राणों और संक्रमण की परवाह किये बिना इन लाशों के अंतिम संस्कार की भारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है।

Navin Sinha

नवीन के इस साहसिक काम के लिए ‘मिथिला विभूति सम्मान-2021’ मिला है

आज समाज का हर वर्ग कोरोना की वजह से अपने घर में कैद हो चुका है। लेकिन, नवीन आगे आकर और अपनी जान दांव पर लगाकर कोरोना से जान गंवा चुके दिवंगतों की लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। उनके इसी साहसिक काम और समाज के प्रति समर्पण भाव को देखते हुए उन्हें ‘विद्यापति सेवा संस्थान’ द्वारा ‘मिथिला विभूति सम्मान-2021’ से सम्मानित किया जा रहा है।

इस साल नंवबर में दिया जाएगा नवीन को अवार्ड

ऐसे शव जिनके संस्कार के लिए कोई आगे नही आना चाहता, उनके क्रियाकर्म के लिए मसीहा बनकर आये नवीन को इस साल नंवबर में ‘विद्यापति सेवा संस्थान’ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में ‘मिथिला विभूति सम्मान’ दिया जाने वाला है। विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉक्टर बैद्यनाथ चौधरी ने इस बात की घोषणा की है।

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‘कबीर सेवा संस्थान’ कर रही है लावारिस लाशों का क्रियाकर्म

दरभंगा निवासी और पत्रकार व समाजसेवी नवीन सिन्हा ‘कबीर सेवा संस्थान’ के फाउंडर हैं। कोरोना के दौर में इस संस्थान ने लावारिस लाशों की अंतियेष्टि का बीड़ा लिया है। अपने स्थापना वर्ष 2014 से लेकर अभी तक ये संस्थान तकरीबन सवा सौ लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुकी है। दरअसल, इस संस्था को आरंभ करने का मकसद ही ऐसे शवों की अंतियेष्टि करना था।

धार्मिक रीतियों के मुताबिक ही किया जाता है अंतिम संस्कार

वर्तमान में 12 सदस्यों की टीम कबीर सेवा संस्था के लिए काम कर रही है। जिसका नेतृत्व नवीन सिन्हा कर रहे हैं। कोरोना के दौर में इस संस्था के सरहानीय काम और समर्पण भाव को विशेष पहचान मिली है। यह संस्था अभी तक कई हिंदु व मुस्लिम शवों का संस्कार उनके संबंधित रीति-रिवाज़ों के मुताबिक करवा चुकी है। दरभंगा के डीएम भी नवीन के इस काम की बेहद तारीफ कर चुके हैं। कोरोना महामारी के इन विपरित हालातों में मानों जिदगीं और मौत दोनों के मायने बदल दिये है। समाज के हर अच्छ व बुरे पक्ष को और उजागर कर दिया है। ऐसे में नवीन का यह काम वाकई तारीफे काबिल है।

अर्चना झा दिल्ली की रहने वाली हैं, पत्रकारिता में रुचि होने के कारण अर्चना जामिया यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और अब पत्रकारिता में अपनी हुनर आज़मा रही हैं। पत्रकारिता के अलावा अर्चना को ब्लॉगिंग और डॉक्यूमेंट्री में भी खास रुचि है, जिसके लिए वह अलग अलग प्रोजेक्ट पर काम करती रहती हैं।

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