Saturday, July 31, 2021

देवयानी, लोगों के घर से पुराने समान इकठ्ठा कर बेचती हैं और उससे होने वाली कमाई से गरीब बच्चों को पढ़ाती हैं

काम तो हर कोई करता है, अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए लेकिन एक सच यह भी है कि इंसान की जरूरतें ना कभी खत्म होती है ना पूरी। इसलिए जिस कार्य को करने से हमें ख़ुशी मिले, दूसरों की तकलीफ़ दूर हो, उनकी जरूरतें पूरी हो, और वह उनके लिए उपयोगी हो, वही कार्य हमें करना चाहिए। वही कार्य वास्तव में तारीफ़-ए-काबिल होते हैं। वैसे देखा जाए तो देश में ऐसे बहुत से अमीर व्यक्ति है जो सिर्फ अपनी जिंदगी से मतलब रखते हैं और ऐसे बहुत से आम आदमी हैं जो हर संभव प्रयास करते हैं कि ज़रूरतमंदों की मदद करें जिससे उन्हें खुशियां मिले।

आज की यह कहानी एक ऐसी महिला की है जो लोगों के घर-घर जाकर पुराने सामान एकत्रित कर उन्हें नया रूप देकर बेचती है, उस पैसे से जरूरतमंद बच्चों की फीस भर्ती हैं। तो चलिए पढ़ते हैं इनकी कहानी कि यह किस तरह लोगों की मदद करतीं हैं।

यह है बंगलुरु की देवयानी त्रिवेदी

अक्सर हम ऐसा देखते हैं कि हर बड़े-बड़े शहर में ऐसी बस्ती भी होती है जहां पर लोगों का जीवन बहुत ही गरीबी में गुजरता है। Devyani Trivedi, Bangluru के वाईटफील्ड से संबंध रखतीं हैं। व्हाइटफील्ड के पीछे एक छोटा गांव है। जिसका नाम विजय नगर है। देखा जाए तो यहां पर रहने वाले लोगों और व्हाइटफील्ड में रहने वाले लोगों जिंदगी में बहुत ही फर्क है। जो लोग वहां रहतें हैं वह अति गरीब और पिछड़े हैं। इन लोगों की सहायता करने के खातिर व्हाइटफील्ड के लोगों ने “वाईटफील्ड राइजिंग सोशल ग्रुप” बनाया। देवयानी भी उन लोगों में से एक है जो लोगों की मदद करना चाहती हैं। इसीलिए इन्होंने इस ग्रुप से बात कर “क्लॉथ डोनेशन ड्राइव” की आयोजना बनाई। इसके माध्यम से राइजिंग ग्रुप में यह ऐसे-ऐसे लोगों से जुड़ी जिन्होंने कपड़े दान कियें। इस दौरान इनके पास बहुत सारे कपड़े एकत्रित हो गए।


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री-स्टोर खोला

देवयानी का मानना है कि जरूरतमंद लोगों को उनके अनुसार कोई भी सामान सिलेक्ट करने का हक बनता है। देखा जाए तो अक्सर ऐसा होता है कि लोगों को जो भी दिया जाता है वह इसे लेकर खुश होतें हैं। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए इन्होंने री-स्टोर खोलने का निश्चय किया और इसके लिए एक दुकान भाड़े पर ली। फिर शुरू हुआ री-स्टोर का काम। इन्होंने इस स्टोर को एक दुकान की तरह सजा के रखा। उस दुकान में हर समान अलग-अलग कैटेगरी में रखी गई। जैसे बच्चों के लिए किताबें, पेन, पेंसिल, खेलने के लिए गेम्स की सामग्री, बर्तन, बच्चे, औरतों और बुजुर्गों के लिए कपड़े। यहां तक की फर्नीचर को भी उन्होंने अपने दुकान में सजाकर रखा। कोई भी व्यक्ति इस री-स्टोर से इन सामानों को लेकर जा सकता है।

हर इंसान के लिए हैं यह री-स्टोर

ऐसा नहीं कि यह रिस्टोर सिर्फ गरीबों के लिए ही है। यहां पर कोई भी व्यक्ति आकर सामान खरीद सकता है। बहुत ही उचित मूल्य पर यहां हर सामग्री मिलती है। अगर औरतों के लिए कोई कुर्ती लेना है तो वह मात्र 30 से 40 रुपये में मिल जाएंगे। अगर वही जीन्स लेना है तो वह 100 रुपये में मिलेगी। यहां 5 रुपये से शुरू होकर 500 तक के सामान मिलते हैं। जिन बच्चों को स्टोर में मदद करने का मन है वह अपनी पुरानी चीजें यहां रख देते हैं और फिर यहां से अपने लिए कुछ खिलौने लेकर चले जाते हैं।

सभी को इसके बारे में समझना

यह लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि किस तरह लोग मार्केट से ज्यादातर समान खरीद कर रख लेते हैं। जो पसंद ना हो उसे भी अपने घर में रख लेते हैं और फिर थोड़े दिन बाद उसे अपने घर से बाहर फेंक देते हैं। इससे हमारे पर्यावरण का संतुलन तो बिगड़ता ही है, साथ ही हमारा पैसा भी जाया जाता है। इसलिए यह कार्य देवयानी कर रहीं हैं ताकि लोग रीयूज और रिसाइकिल को समझें।

इसके अलावा करती हैं और भी मदद

इन्हें जो भी स्टोर से आमदनी मिलती है, उससे यह पहले उस स्टोर का किराया देती है। फिर जो लोग वहां काम करते हैं उन्हें उनकी सैलरी देती है। कुछ ऐसी महिलाएं भी है जो वहां सिलाई-कढ़ाई का काम करती है उन्हें भी पैसे देने पड़ते हैं और फिर जो बच गया उससे स्टोर के लिए समान खरीदनी है, उसके लिए पैसे देने पड़ते हैं। इन्होंने तीन लड़कियों का एडमिशन प्राइवेट स्कूल में कराया है। इन लड़कियों के घरवालों के पास पैसे नहीं थे कि अपनी बच्चियों को पढ़ायें और यह लड़कियां पढ़ने में काफी तेज तर्रार थी। इसलिए इन्होंने इन लड़कियों का नामांकन प्राइवेट स्कूल में कराया है। यह हर समय यही कोशिश करती है कि वह लोगों की मदद करें और इस कार्य में लगी हुई है। इनके इस निःस्वार्थ प्रेम भाव और दया के कारण इनकी जान पहचान बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी है।

लोगों की मदद कर उन्हें रीयूज का मतलब सिखाने और इनकी दरियादिली के लिए The Logically Devyani को शत-शत-नमन करता है।