Monday, November 30, 2020

महिला IAS अधिकारी ने गांव की परिस्थितियों में इतना सुधार किया की इनके नाम पर लोगों ने गांव का नाम रख दिया

दिव्या देवराज अपने कार्यालय तक आम लोगों के पहुँच को आसान बनाने और वहाँ के भाषा को सीखने में कामयाब होने के कारण जल्द ही एक अधिकारी मैडम से लोगों के दिलों में जगह बनाने और वहां के परिवार का हिस्सा बनने में सफल रहीं।

दिव्या को जब लगा कि वो वहां के लोगों की भाषा बोल सकती है तब उन्होंने लोगों से खुल कर बात करनी शुरू की और मात्र 3 माह में जिस पंचायत के बैठक में बिल्कुल चुप रहने वाली दिव्या खुलकर बात करने लगी, यह बात वहां के लोगों के दिल को छू गई। सरकारी अस्पतालों में खासकर आदिवासी समाज में भाषा अनुवाद के नियुक्ति को लेकर दिव्या अपने प्रशासनिक कार्यकाल तक आम लोगों के पहुंच को बेहद आसान बनाया और वहां के भाषा को जल्दी सीखने की पूरी कोशिश की, जिसके कारण वो अधिकारी मैडम से वहाँ के परिवार का हिस्सा बन गई और वहां  के लोगों ने अपने ही गांव का नाम दिव्या के सम्मान में रखा।

आईएएस महिला अधिकारी के सम्मान में गांव का नाम रखा गया है दिव्यगुड़ा

आदिलाबाद गांव के लोगों ने अपने ही गांव का नाम दिव्या देवराज के नाम पर रखा “दिव्यगुड़ा”। हालाँकि आदिलाबाद से  दिव्या का स्थानांतरण हो चुका है। वहां विकलांग, महिला, बाल और वरिष्ठ नागरिकों के लिए दिव्या की नियुक्ति सचिव और अयुक्त के रूप में हुई। उनका कहना है कि अगर वो अभी भी उस जिले में रहती तो उन्हें कभी ऐसा नहीं करने देती।

जिस समुदाय के लिए दिव्या ने काम किया वो उनको कभी नहीं  भूल पाएंगे ,वो किसी भी मुद्दे का तुरंत समाधान निकालने की कोशिश करती थी। उस क्षेत्र में बेरोजगारी,अशिक्षा ,स्वास्थ्य जैसी कई समस्याएं थी ,जिसपर दिव्य ने काम किया और समाधान भी निकला। आदिलाबाद में अंतरजातीय हिंसा बहुत ज्यादा है  जिससे बहुत हद तक काम करने में दिव्या कामयाब हुई और वहां के लोगों का विश्वास जीत पाई। उस गांव का नाम दिव्यगुड़ रखने में वहां के एक बहुत ही कमजोर वर्ग के आदिवासी नेता मारुति ने विशेष भूमिका निभाई। मारुति के अनुसार पहली बार उनके इलाके में कोई ऐसी कलक्टर आई जिनके के कार्यालय में उन्होंने कदम रखा इससे पहले कभी भी कलेक्टर कार्यालय में मारुति ने कदम तक नहीं रखा। क्योंकि आने वाले कोई भी अधिकारी आम लोगों की बिल्कुल परवाह नहीं करते थे। दिव्या देवराज की खास बात यह थी उन्होंने कार्यालय तक सबके पहुंच आसान बनाई थी और गांव के हर घर का दौरा किया था यहां तक की सबको उनके नामों से भी जानती थी।

पहले मारुति के क्षेत्र में हर साल बाढ़ आती रहती थी लेकिन जबसे दिव्या ने कार्यभार संभाला इससे बहुत हद तक राहत मिली जिसके लिए आदिवासियों के पास दिव्या को कुछ उपहार देने के लिए नहीं थे लेकिन वो लोग चाहते थे कि उनके बाद उनकी आने वाली पीढ़ी दिव्या के नाम और कार्यों को जाने जिसके लिए वे लोग अपने गांव का नाम दिव्या देवराज के नाम पर रखा।

वहां की भाषा सीख कर उनका विश्वास जीतना

दिव्या के पहले कोई भी अधिकारी आदिलाबाद की भाषा सीखने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की और ना ही उनके समस्याओं को सही से समझने की किसी ने कोशिश भी की तो वहां के बुनियादी भाषा सीखने के बाद बंद कर दिया लेकिन दिव्या ऐसी पहली अधिकारी है जिन्होंने वहां की भाषा पर अपनी पकड़ बनाई और लोगों के साथ बातचीत करने में रुचि पाई। उनके वहां के भाषा सीखने के कारण वहां के मुद्दे को समझने में सहायता मिली । धीरे-धीरे लोग उन पर भरोसा करने लगे कि वह वहां के लोगों को समझने की कोशिश कर रही हैं। दिव्या ने सप्ताह में 1 दिन सुनिश्चित किया जिस दिन केवल शिकायतों का निवारण किया जाता था। हालांकि वहां के लोगों का भरोसा जीतना दिव्या के लिए एक चुनौती से कम नहीं था लेकिन उन्होंने खुद का हौसला बुलंद रखा और वह कामयाब हुई।

लोगों को उनका अधिकार समझाना

आदिलाबाद में दिव्या का पहला काम वहां के जनजातीय समस्याओं का समाधान खोजना और संवैधानिक साधन के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करना था। इसके साथ आदिवासियों के संस्कृति सम्मान और संरक्षण के लिए उन्होंने आधिकारिक रूप से त्योहारों का समर्थन और उनके परंपरा का दस्तावेजीकरण के लिए सहायता की।

दिव्या का जन्म तमिलनाडु में एक किसान परिवार में हुआ था उन्होंने बचपन से ही देखा ऋण प्रणाली के मामले में किसानों को काफी मुश्किलें होती थी। अधिकारियों के आने के डर से उनके दादाजी मंदिर में छिप जाया करते थे, इस घटना से उन्हें एहसास हुआ कि प्रशासन चाहे तो किसानों की बहुत मदद कर सकते हैं लोगों के समस्याओं को सुनकर उन्हें उनका समाधान देकर उनकी जीवन बदल सकते हैं। दिव्या के यह करियर चुनने के पीछे एक और कारण उनके पिता थे जो तमिलनाडु में बिजली विभाग में काम करते थे। वे भी लोगों के सेवा करने में आनंद पाते थे , जब वे अपने गांव में बिजली लाने के लिए मदद किए तो लोगों के चेहरे पर जो खुशी देखी , उससे वो काफी संतुष्ट हुए और यही खुशी दिव्या भी महसूस करना चाहती थी।

Anita Chaudhary
Anita is an academic excellence in the field of education , She loves working on community issues and at the same times , she is trying to explore positivity of the world.

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