Thursday, August 18, 2022

Doctor से बिज़नेस वीमेन बनने की कहानी, चप्पल का कारोबार शुरू कर खड़ी कर दी 20 करोड़ की कम्पनी

“अगर हमारी चाह किसी भी काम को करने में है और हम उस काम को मेहनत और लगन के साथ करते हैं तो आगे चलकर हमें सफलता जरूर प्राप्त होती है”

आज हम आपको एक ऐसी कहानी के बारे में बताएंगे जिसमें आप जानेंगे कि कैसे एक लड़की ने अपने बलबूते पर और अपनी मेहनत और काबिलियत की वजह से आज उस ऊंचाई पर पहुंचीं जिसकी वो कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने डॉक्टर की पढ़ाई करने के बाद जूते-चप्पल (Kazarmax) का बिजनेस शुरुआत की, जिस वजह से इन्हीं लोगों से काफी ताने सुनने को मिले परंतु इन्होंने लोगों के तानों को अनदेखा करके आगे बढ़ती चली गईं। आज वे अपनी बिजनेस से 20 करोड़ रुपए का टर्नओवर कर रही हैं तो चलिए जानते हैं इन्होंने अपने इस सफलता तक पहुंचने के लिए कितना संघर्ष किया।

डॉ. सिमरन मान सचदेवा: -Dr Simran Mann Sachdeva

डॉ. सिमरन मान सचदेवा यह दिल्ली की रहने वाली हैं परंतु इनका पालन-पोषण चंडीगढ में हुआ है। इनका पूरा परिवार लॉ की फील्ड से जुड़ा हुआ है परंतु सिमरन को अपनी जिंदगी में कुछ अलग ही करने की चाह थीं। ये बचपन से ही अपनी फैमिली से हटकर कुछ अलग ही सोचती थीं। सिमरन बताती है कि उन्हें बचपन से ही जानवरों से कुछ ज्यादा ही प्यार था इसलिए वो जानवरों की डॉक्टर यानी वेटनरी डॉक्टर बनना चाहती थी परंतु जब वे 12 वीं की परीक्षा पास की तो उन्हें इस वेटनरी डॉक्टर में कुछ खास रुचि नहीं रही तो इन्होंने मन बना लिया कि वह डेंटल सर्जरी की डॉक्टर की पढ़ाई करेंगे। उन्होंने अमेरिका जाकर के वहां से डेंटल सर्जरी में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त किए। सिमरन अमेरिका में 7 साल की पढ़ाई की इसके बाद वह दिल्ली आ गए दिल्ली में इन्होनें 3 साल प्रेक्टिस किए।

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जूते चप्पल का आया आईडिया:-

डॉ. सिमरन (Dr Simran Mann Sachdeva) बताती हैं कि जब हमारी शादी हो गई और बच्चे हो गए तो हमसे डॉक्टरी कर पाना काफी मुश्किल हो रहा था, जिसकी वजह से हमने डॉक्टरी करना छोड़ दिया। हम घर पर अपने बच्चों की देखभाल करते थे परंतु घर में बैठने से हमारा मन नहीं लगा जिसकी वजह से हमने कुछ काम करने के बारे में सोचने लगी। सिमरन बताती हैं कि हमें हर 3 महीने में अमेरिका से जूते-चप्पल मंगवाने पड़ते थे जिससे हमारे घर की बजट पर धीरे-धीरे बोझ पङने लगा। क्योंकि हम जिस तरह के जूते-चप्पल पहनते थे उस क्वालिटी की जूते यहां इंडिया में उपलब्ध नहीं थी। इसी वजह से हमें इसके लिए अमेरिका से जूते-चप्पल मंगवाना पड़ता था। जिसकी वजह से उन्हें अपने घरों में खर्च ज्यादा आने लगे। अपनी इस समस्या से निपटने के लिए इन्होंने अपनी पति से बात की और बात करते-करते सिमरन को एक आईडिया आया।

उस आइडिए को उन्होंने अपने पति के साथ शेयर किया। सिमरन बताया कि हम अपनी इस समस्या से निपटने के लिए क्यों ना फुटवियर का बिजनेस करना शुरु कर दें। सिमरन की यह बात सुनकर के उनके पति भी उनका पूरा सहयोग करने लगे। डॉ. सिमरन अपनी इंटरनेशनल क्वालिटी (Kazarmax) के जूते बनाना शुरु कर दिया जो इंडिया में कहीं भी उपलब्ध नहीं थे। सिमरन बताती हैं कि हमने फुटवियर का बिजनेस स्टार्ट करने से पहले इसके बारे में काफी जानकारियां इकट्ठा की। इसके लिए हमने बहुत सारी किताबें पढ़ी और बड़े बिजनेस टायकून से मुलाकात की। सिमरन ने अपने ससुर को इस बिजनस का मेंटर बना दिया। जो कपड़े का एक बहुत बड़ा व्यापारी हैं। सिमरन अपनी सारी रिसर्च कर लेने के बाद साल 2017 में कजारमैक्स के नाम से अपना स्टार्टअप शुरु कर दिया।

•लोकल फॉर वोकल के ताज पर काम किए:-

डॉ. सिमरन बताती हैं कि हमने अपना बिजनेस से लोकल फॉर वोकल के तर्ज पर काम करना शुरु कर दिया। भारत में जूते-चप्पल की मैनुफैक्चरिंग काफी कम होती है जिसकी वजह से जूते-चप्पल इंडिया के बाहर से मंगाए जाते हैं। इसलिए हमने इंडिया में ही मैनुफैक्चरिंग करना शुरु कर दिया, जिससे लोगों को अच्छा और टिकाऊ जूते चप्पल मिल सके। इसके साथ-साथ वे यह भी बताती है कि हमारी कंपनी में फुटवियर के लिए कोई भी एनिमल प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं किया जाता हम इको फ्रेंडली प्रोडक्ट बनाते हैं। जो लोगों को काफी पसंद आने लगी जिसकी वजह से हमारी यह फुटवियर की कंपनी मार्केट में काफी रन कर दें। सिमरन बताती हैं कि जब हमने फुटवियर कंपनी की शुरुआत की थी तब इस कंपनी में हमने 7 लाख रुपए की लागत लगाई थी और आज यही कंपनी से हमें 20 करोड़ का टर्न ओवर हो रहा है।

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Dr.Simran mann sachdeva

डॉक्टर या बिजनेस वुमन (Dr Simran Mann Sachdeva)

डॉ. सिमरन बताती है कि जब हमने डॉक्टरी करना बंद कर दिया था और फुटवियर (Kazarmax) का बिजनेस की शुरुआत की थी तो हमारे बच्चे आज तक हमसे पूछते हैं कि मम्मा आपको बिजनेस वूमेन या डॉक्टर यह दोनों में से कौन सा टैग सबसे ज्यादा पसंद आती है। तो बे बताती हैं कि बच्चे के इस सवाल पर मुस्कुराते हुए बताती हूं कि मेरे लिए यह दोनों ही काम काफी प्रिय है परंतु इतना ध्यान रखना पड़ता है कि परिस्थिति के अनुसार हर चीज बदल जाता है। वे अपनी बच्चे को समझाते हुए बताती हैं कि अगर आप पढ़ाई करके डिग्री ले रहे हैं तो वह डिग्री आपको निरर्थक नहीं जाती है और यह जरूरी नहीं है कि आप जिस चीज की पढ़ाई कर रहे हैं उसी चीज में लगे रहें। इसके लिए आपको अपने परिस्थिति के अनुसार चलना पड़ता है और जो अपनी परिस्थिति को समझते हुए अपना कदम आगे बढ़ाता है वह एक सफल इंसान बन जाता है।

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महिलाओं को दी प्रेरणा:-

डॉ. सिमरन महिलाओं को प्रेरित करते हुए बताती हैं कि हमें बिजनेस के बारे में कुछ जानकारियां नहीं थी परंतु हमने किताबें पढ़कर के काफी कुछ जानकारियां प्राप्त की, जिससे आज हमने इस बिजनेस को अपनी ऊंचाई तक पहुंचाई। वे बताती हैं कि अगर किसी भी महिला के सामने कैसी भी परिस्थिति उत्पन्न होती है तो वह अपने इस समस्या से घबराए नहीं और खुद को अपनी समस्या से निपटने के लिए खुद को काबिल बनाएं जिससे आपकी समस्या का निवारण हो सके।

डॉ. सिमरन (Dr Simran Mann Sachdeva) बताती हैं कि हम जो पढ़ाई करते हैं वह बेकार नहीं जाती है। यह हमारी जिंदगी में किसी ना किसी मोड़ पर काम आ जाती है। इसलिए आप अपने काम पर पूरा ध्यान दें और जो आपको काम पसंद आए आप वही करें। इससे आपको यह फायदा होगा कि आप उस काम को लगन और मेहनत के साथ करेंगे जो आपको अपनी सफलता की ओर ले जाएगी। डॉ. सिमरन महिलाओं के लिए बताती है कि कोई भी महिला अपने लाइफ में कुछ ना कुछ करते रहें। वह अपने इस मूल्यवान समय को व्यर्थ ना जाने दें। आज डॉक्टर सिमरन हर महिलाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन गई है जिसे महिलाएं इनसे काफी प्रेरित होकर के इनके दिखाए हुए कदमों पर चलने का प्रयास कर रही हैं।