Saturday, July 31, 2021

सूटकेस पर सोते बच्चे को खिंचती माँ…. कोलकत्ता के दुर्गापूजा पंडाल ने दिखाया मजदूरों का दर्द: तस्वीर देखें

दुर्गापूजा हिन्दुओं के मुख्य त्योहारों में से एक है। यूं तो भारत के हर राज्य में इसे काफी धूम-धाम से मनाया जाता है लेकिन कोलकाता में दुर्गापूजा का अलग ही जोश और उत्साह नज़र आता है। हर साल कोलकाता में कारीगरों द्वारा भव्य पंडाल व मूर्तियां बनाई जाती है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भारी तादाद में लोग आते हैं। इस साल भी यह जोश और जुनून यूं ही रहता लेकिन हमें पता है कि कोरो’ना संक्रमण का दौर चल रहा है जिस वजह से संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुए दुर्गा मां की पूजा अर्चना की जा रही हैं।

इस साल कोलकाता में कारीगरों द्वारा दुर्गा मां के अनोखे तस्वीर के साथ पंडाल को भी चित्रित किया गया है, जिसमें संक्रमण के दौरान होने वाले कठिनाइयों को व्यक्त किया गया है। केशोपुर कानन पंडाल में दुर्गा पूजा के मौके पर प्रवासी मजदूरों के संकट और सोनू सूद द्वारा लोगों के मदद के लिए किए गए प्रयासों को भी दर्शाया गया है। लॉकडाउन होने के बाद सभी मजदूर अपने घर लौटने को मजबूर हो गए थे। भूखे-प्यासे, पैदल अनेकों कठिनाइयों को झेलते हुए लोगों द्वारा हजारों किलोमीटर की यात्राएं पूरी की गई, जिसे कोलकाता में दुर्गापूजा के माध्यम से पंडाल के साथ-साथ देवी मां की तस्वीरें भी श्रमिकों के लिए समर्पित की गई है।

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केस्टोपुर प्रफुल्ला कानन पंडाल में देवी मां के मूर्ति की जगह प्रवासी मजदूरों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं। दिए गए तस्वीर में एक सूटकेस पर सोते हुए बच्चे की प्रतिमा लगाई गई है जिसे लिए बच्चे की मां द्वारा यात्रा की जा रही है। यह तस्वीर लॉकडाउन के दौरान काफी कष्टदायक थी।

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गर्मी, धूप, भूख-प्यास और थकान के साथ चलते मजदूरों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में थी। कैसे अनेक मजदूर अपने लंबे यात्रा के दौरान बीमार पड़े और कुछ को अपनी जान भी गवानी पड़ी। मजदूरों द्वारा किए गए संघर्ष और उनके बुरे वक्त को व्यक्त करती यह तस्वीर।

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गर्मी, भूख-प्यास और थकान के साथ मजदूरों के यात्राओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर देख कर कलेजा छल्ली हो जाता था। कैसे मजदूर अपने थकावट दूर करने के लिए रेलवे ट्रैक पर भी रातें गुजारते थे।

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लॉकडाउन के दौरान एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें एक 15 वर्षीय बेटी अपने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक 1200 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा तय की थी। ज्योति ने नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया था जिसकी वजह से सभी लोग उनकी काफी तारीफ कर रहे थे, यहां तक की यूएसए के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ने भी ट्वीट कर ज्योति की तारीफ की थी।

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बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद द्वारा मजदूरों की अनेकों तरह से मदद की गई। सोनू सूद हर संभव कोशिश करते थे कि ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को उनके घर पहुंचने में मदद कर सके। दिए गए तस्वीर में मजदूरों को हवाई जहाज से उनके घर भेजे गए तस्वीर को चित्रित किया गया है। यह प्रतिमा सोनू सूद के प्रयासों को सम्मानित करती हैं।

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देशभर से अनेकों मजदूर अपने घर पहुंचने के लिए पैदल यात्रा प्रारंभ किए। यात्रा के दौरान लोगों की परेशानियों को देखते हुए रेलवे द्वारा उनके लिए विशेष श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलवाई गई, ताकी सभी लोगों को घर पहुंचने में सुविधा मुहैया हो सके। यह तस्वीर मजदूरों के उस खुशनुमा पल को बयां करती है।

मूर्ति कलाकारों द्वारा मजदूरों के संघर्ष और इस साल के हक़ीक़त को दर्शाया गया है। जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि देवी देवताओं का कोई विशेष स्वरूप नहीं होता हम आप सबमें भगवान है।