Sunday, September 19, 2021

गेहूं के नए प्रयोग के साथ ही किसान अब करोड़ों में कमा रहा , अन्य राज्यों से भी मिल रहे आर्डर

देश में आजकल नए-नए तरीकों से खेती करने वाले अपने नयापन और अविष्कारों के कारण बहुत आगे निकल रहे हैं । जिस जमीन से हम पहले मुश्किल से खाने भर का ही अनाज पैदा कर पाते थे उसी जमीन से अब मुनाफा कई गुना तक बढ़ चुका है।प्रयोग के इस नए दौर में विनोद की खेती का प्रयोग काफी सराहनीय रहा ,अब विनोद 20 बीघा जमीन से ही लगभग लगभग 5 क्विंटल बीज लगाने के बाद 200 क्विंटल से भी अधिक गेहूं के फसल का उत्पादन बढ़ा चुके हैं। पहले इसी लागत से वह बड़े पहले मुश्किल से अपने घर का खर्चा ही चला पाते थे अब 10 गुना से भी ज्यादा फसल उपजाने में सक्षम हैं।

काला गेहूं एक विशेष प्रकार का गेहूं है जिसमें एंथोसाइएनिन की मात्रा आम गेहूं के बनिष्पद 150 मिलियन तक अधिक पाई जाती है। इस प्रकार की गेहूं में जिंक की मात्रा भी अधिक पाई जाती है और एंथोसाइएनिन होने के कारण यह शुगर फ्री भी होता है जिससे खाने में पाचन क्रिया अच्छा रहता है और इसमें स्टार्च की कमी होने के कारण शुगर के मरीज भी इसे आसानी से खा सकते हैं।

काला गेहूं – सोर्स इंटरनेट

इस तकनीकी के पीछे पंजाब के रिसर्च सेंटर National Agri Food Biotechnology मोहाली के कृषि वैज्ञानिक डॉ मोनिका गर्ग हैं जिन्होंने इस बीज पर रीसर्च कर एक नई तकनीकी का इज़ाद किया है।

विनोद चौहान ने इस फसल के बारे में इंटरनेट से सीखा था और फिर और उन्होंने इस गेहूं का बीज लगभग ₹200 प्रति किलो खरीदा । आज इनके उत्पादन से निकलने वाले गेहूं का आर्डर राजस्थान यूपी समेत कई दूसरे राज्यों से भी लगातार मिल रहे हैं।

काले गेहूं के फायदे
हालांकि इस प्रकार के गेहूं पर अभी भी रिसर्च जारी है लेकिन इस गेहूं में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होने के कारण इससे कैंसर रोगी को भी फायदा मिल सकता है और यहां तक भी दावा किया जा रहा है कि यह कैंसर के रोकथाम में भी लाभप्रद है।
गेहूं में स्टार्च की मात्रा कम होने के कारण इस गेहूं को खाने से मोटापा की शिकायत वाले मरीजों को भी फायदा मिल सकता है ।

आनेवाले दिनों में काला गेहूं कृषि क्षेत्र में एक क्रांति की संभावना बनकर उभर रहा है।