Female collie works with male at railway station

“तू जीत का आगाज है बुलंद तेरा अंजाम है, तुझसे ये सारा संसार है, तू सृष्टि का आधार है। नारी तू नहीं लाचार है, तुझमें शक्तियां अपार है”

आवश्यकता पड़ने पर महिला किसी भी दुर्गम रास्तों पर चलना सहर्ष स्वीकार कर लेती है तथा अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मुश्किल से मुश्किल कार्य भी करती है। कुली का नाम सुनते हीं हम सभी के मन में एक पुरूष का हीं ख्याल आता है परंतु आज आपको हम एक महिला कुली के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने कार्यों से सभी के लिए बहुत हीं अनोखी प्रेरणा स्थापित कर रही हैं। आईए जानते हैं उस महिला के बारे में…

संध्या मारावी (Sandhya Maravi) मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) में रहती हैं तथा उनकी उम्र 31 वर्ष है। वह अपने 3 बच्चे और बुजुर्ग सास की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर मध्य प्रदेश के कटनी स्टेशन (Katni Station) पर यात्रियों का सामान ढो रही हैं। जब वह बहुत हीं साहस और परिश्रम के साथ यात्रियों के भारी वजन वाले सामान लेकर स्टेशन पर चलती हैं तो उसे देखकर सभी लोग हैरान हो जाते हैं।

Female collie works with male at railway station

संध्या बताती हैं कि “भले हीं उनके सपने टूटे हैं लेकिन हौसले अभी जिंदा हैं। जीवन ने मुझसे मेरा हमसफर छीन लिया, लेकिन बच्चों को पढ़ा-लिखाकर फौज में अफसर बनाना मेरा सपना है। इन सब के लिए मैं किसी के सामने हाथ नहीं फैलाऊंगी। कुली नंबर 36 हूं और इज्जत का खाती हूं।”

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कुली के कार्य के पीछे छुपी वजह

संध्या मारावी (Sandhya Maravi) वर्ष 2017 से कुली का कार्य कर रही हैं। उन्होंने इस कार्य के पीछे छुपी मजबूरी के बारे में बताया कि वह अपने पति और तीन बच्चों के साथ कटनी में रहती थीं। उनके पति की तबीयत लंबे वक्त से खराब चल रही थी, जिसके बाद 22 अक्तूबर वर्ष 2016 को पति ने जीवन की अन्तिम सांस ली। तबीयत बीमार होने के बावजूद भी उनके पति मजदूरी कर के घर-परिवार की आजीविका चलाते थे लेकिन उनके स्वर्गवासी होने के बाद सारी जिम्मेदारी संध्या के ऊपर आ गई। ऐसे में संध्या को जो भी नौकरी मिली उन्होंने उसे अपना लिया।

Female collie works with male at railway station

संध्या ने नम आंखों से बताया कुली बनने का सफर

संध्या ने बताया कि वह नौकरी की खोज में थी, ऐसे में उन्हें किसी ने बताया कि कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली की आवश्यकता है। यह खबर सुनते हीं संध्या ने फौरन उसके लिए अप्लाई कर दिया जिसके बाद उनका चयन भी हो गया। वहां वह 45 पुरूष के साथ कार्य करती हैं। पिछ्ले वर्ष उन्हें बिल्ला नंबर 36 मिला है।

काम के लिए प्रतिदिन 90 किमी. दूर से आना पड़ता है

संध्या का इस कार्य से जुड़ी सबसे बड़ी बात है कि वह इस नौकरी के लिए प्रतिदिन 90 KM (45 किमी आना-जाना) का सफर तय करके कटनी रेलवे स्टेशन (Katni Railway Station) आती हैं। उनके बच्चों की देखभाल उनकी सास करती हैं। रोज इतनी दूर से आकर मेहनत भरा उनका कार्य करना उनके बुलन्द हौसले का परिचायक है।

The Logically संध्या मारावी के अदम्य साहस और मेहनत को शत-शत नमन करता है। उन्होंने सभी के लिए एक मिसाल पेश किया है।

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