Wednesday, September 28, 2022

वैज्ञानिकों ने किया अनोखा शोध, ग्राफ्टिंग विधि से एक ही पौधे से आलू, बैगन और टमाटर उगाये: जानें तरीका

कृषि उत्पादन को उत्तम व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराने के लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक नित नये शोध व अनुसंधान करते रहते हैं जिससे, हमारे किसान भाईयों की न केवल कृषि संबंधी समस्याएं हल हो सकें बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि हो सकें।

हाल ही में वाराणसी के शंहशाहपुर के अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ आनंद बहादुर सिंह (Dr. Anand Bahadur Singh) ने ‘ग्राफ्टिंग तकनीक’ (Grafting Technique ) का इस्तेमाल करते हुए इस तरह के पौधे विकसित किये हैं जिनमें दो अलग तरह की सब्ज़ियां जैसे टमाटर और बैंगन एक ही पौधे में उग रही हैं।

क्या है ‘ग्राफ्टिंग तकनीक’

‘ग्राफ्टिंग तकनीक’ को ‘कलम बांधना तकनीक’ भी कहा जाता है। इस तकनीक से एक ही पौध में एक प्रजाति (जैसे टमाटर व बैंगन एक ही प्रजाति की सब्ज़ी हैं) की दो या दो से अधिक तरह के फल-सब्जी एकसाथ उगाई जा सकती हैं।

बेहद सराहनीय है कृषि वैज्ञानिक आनंद बहादुर सिंह का यह प्रसास

वाराणसी के भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ आनंद बहादुर सिंह द्वारा ‘ग्राफ्टिंग तकनीक’ का इस्तेमाल करके एक ही पौधे में दो अलग तरह की सब्ज़ियों को उगाने का यह प्रयास बेशक ही अनूठा है। इस तकनीक के तहत वे टमाटर के पौधे में बैंगन के पौधे की कलम लगाकर एक ही पौधे पर एकसाथ दो सब्ज़ियां उगा रहे हैं।

Dr. Jagdish Singh

बिना सूर्य प्रकाश के ही नर्सरी में उगाई जा रही हैं ये सब्ज़ियां

इन पौधों की सबसे विशेष बात यह है कि इन्हे 24 से 28 डिग्री टैम्प्रेचर पर रखते हुए 85 प्रतिशत से ज़्यादा नमी और बिना प्रकाश के नर्सरी में ही तैयार किया जा रहा है। डॉ आनंद के अनुसार- “ग्राफ्टिंग करने के 15 से 20 दिन के बाद इन पौधों को खेत में बो दिया जाता है, फिर इनमें आवश्यक मात्रा में उर्वरक व पानी दिया जाता है, साथ ही पौधे की कांट-छांट का काम किया जाता है, 60 से 70 दिन बाद इस पर सब्ज़ी आनी शुरु हो जाती है”

बारिश की दर अधिक होने पर बेहद उपयोगी है यह तकनीक

साल 2013 में ‘ग्राफ्टिंग तकनीक’ विकसित हुई थी। ऐसे क्षेत्र जहां बारिश की दर अधिक हो या बारिश के मौसम में काफी दिनों तक पानी भरा रहता हो वहां यह तकनीक काफी सहायक सिद्ध होती है।

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किसानों को अच्छा उत्पादन देने में सहायक है पौधों की ग्राफ्टिंग

भारतीय सब्जी अनुसंधान के डायरेक्टर डॉक्टर जगदीश सिंह (Dr. Jagdish Singh)खेती में ग्राफ्टिंग तकनीक का इस्तेमाल करने के बारे में कहते हैं – “ग्राफ्टिंग तकनीक से किसानों को अच्छा उत्पादन मिलेगा और उनकी आय भी बढ़ेगी, जिन किसानों के पास कृषि भूमि क्षेत्र की कमी है वे अलग-अलग सब्ज़ियां थोड़े ही स्थान में उगा सकते हैं”

एक ही पौध में हो रही है आलू, बैंगन व टमाटर लगाने की कोशिश

हाल ही में डॉक्टर जगदीश सिंह की पूरी टीम एक ही पौधे में एकसाथ आलू, बैंगन व टमाटर पैदा करने का प्रयास कर रही है। उम्मीद है कि 1 से 2 साल में उन्हे अपने इस प्रयास में सफलता हासिल होगी।

Tomato

पूर्व में केवल फूलों व फलों के लिए ही इस्तेमाल होती थी ‘ग्राफ्टिंग तकनीक’

बता दें कि कृषि पॉलीहाउस में मृदा जनित समस्याओं को दूर करने के लिए कारगर समझे जाने वाली यह ‘ग्राफ्टिंग तकनीक’ पूर्व में एक पेड़ में दो या तीन प्रकार के केवल फलों अथवा भिन्न प्रकार के फूलों को एकसाथ उगाने के लिए इस्तेमाल की जाती रही है। बता दें कि ये तकनीक शहरों में टेरेस गार्डन के लिए भी बेहद उपयोगी है ।

अमेरिका में भी ग्राफ्टिंग तकनीक का अनूठा उदाहरण देखने को मिला है

अमेरिका के विजुअल आर्ट्स के प्रोफेसर सैम वान अकन (Sam Waanh Akaan) ने एक ही पेड़ पर 40 प्रकार के फल उगाकर सभी को आश्चर्य मे डाल दिया है। यह अद्भुद पेड़ अमेरिका में है। इसे वहां के लोग ‘ट्री ऑफ 40’ (Tree for 40)के नाम से भी जानते हैं। इस पेड़ में बेर, सतालू, खुबानी, चेरी और शफ़तालू के फल उगते हैं। इस पेड़ को खरीदने के लिए अभी तक लाखों रुपए की बोली लग चुकी है, लेकिन हर बार प्रोफेसर सैम इसे बेचने से मना कर देते हैं। ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार किये गये इस पेड़ में कई बेहद प्राचीन और दुर्लभ पौधों की प्रजातियों का भी सहारा लिया गया है।