Saturday, December 3, 2022

100 साल पहले एक पहलवान ने की थी डोडा बर्फी की खोज, जानिए इससे जुड़े रोचक इतिहास के बारें में

हमारे देश की हर चीज अपने आप में बहुत ही अद्भुत होती है जिसकी कायल पूरी दुनिया है। फिर चाहे वह यहां का रहन-सहन हो, परिधान हो या फिर कोई खानपान की चीज। भारतीय मिठाइयों को ही ले लीजिये, ये स्वाद में जितनी अधिक स्वादिष्ट होती है उतने ही अनोखे अंदाज में बनाई जाती है। किसी को घंटों तक कड़ाही में पकाया जाता है तो वहीं कईयों को चाशनी में डुबोकर बनाया जाता है। काफी मेहनत के बाद बनाई गई स्वादिष्ट मिठाइयों को खाने के बाद सभी उसी के गुण गाने लगते हैं।

हालांकि, हर किसी को अलग-अलग मिठाइयाँ पसंद होती है जैसे जलेबी, रसगुल्ला, काजू कतली, बर्फी गुलाबजामुन आदि। बहुत सारे लोगों की पसंदीदा मिठाई डोडा बर्फी (Dodha Barfi) है, जिसकी विशेषता यह है कि इसे बनाने के लिए मावे का इस्तेमाल नहीं किया जाता है इसके बाद भी ये खाने में काफी स्वादिष्ट होता है। इतना ही नहीं पंजाब और हरियाणा समेत हर जगह खुशियों के मौके पर इसी मिठाई का इस्तेमाल किया जाता है। इसी कड़ी में चलिए जानते हैं डोडा बर्फी के इतिहास के बारें में-

अजादी से पहले का है इतिहास

डोडा बर्फी का इतिहास आज से नहीं बल्कि उस समय से है जब भारत को हिंदुस्तान के नाम से जाना जाता था और वह अखंड भारत था अर्थात् भारत अभी दो टुकड़ों में नहीं बंटा था। यह बात 1912 के भारत की है जब हमारे हिंदुस्तान में “हंसराज विग” (Hansraj Vig) नामक पहलवान हुआ करते थे। History of Dodha Barfi Dessert.

डोडा बर्फी की कैसे हुई शुरूआत

जैसा कि आप जानते हैं पहलवान को शक्ति के लिए बड़ी मात्रा में दूध, घी का सेवन करना पड़ता है। रेसलर हंसराज विग को भी दूध और घी का भारी मात्रा सेवन करना पड़ता था जो उसे पसंद नहीं था। उसने इसका विकल्प ढूंढना शुरु किया और इसके लिए उन्होंने एक कड़ाही में एक साथ दूध, घी, मेवा, चीनी और मलाई डालकर उसका एक्सपेरिमेंट करना शुरु किया। इन सभी चीजों को मिलाने के बाद एक बेहद स्वादिष्ट मिठाई बनकर तैयार हुई जिसे आज पूरे विश्व में “डोडा बर्फी” (Dodha Barfi) के नाम से जाना जाता है।

डोडा बर्फी का स्वाद हंसराज को काफी पसंद आई जिसके बाद वे इस मिठाई को बार-बार बनाकर उसका सेवन करने लगे। इतना ही नहीं धीरे-धीरे वे इसकी बिक्री भी करने लगे जिसके बाद यह देश के बच्चों से लेकर बड़े-बूढों तक की पसंदीदा मिठाई बन गईं। हालांकि, इस मिठाई को चबाकर खाई जाती है। History of Dodha Barfi Dessert.

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स्वास्थ्य के लिए है फायदेमंद

इस मिठाई को घर पर भी बहुत ही सरलतापूर्वक बनाई जा सकती है और इसे आप फ्रिज में दो सप्ताह तक ताजी रख सकते हैं। हंसराज विग द्वारा खोजी गई यह मिठाई स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। डोडा बर्फी को उत्तर भारत के लोग बड़े ही चाव से खाना पसंद करते हैं। History of Dodha Barfi Dessert.

Royal Dodha House की हुई शुरूआत

अब आपके दिमाग में यह सवाल बार-बार उठ रहा होगा कि डोडा बर्फी (Dodha Barfi) की खोज करने वाले हंसराज विग (Hansraj Vig) का क्या हुआ वे कहां गए आदि। ऐसे में बता दें कि जब भारत का बंटवारा हुआ तो हंसराज भारत में आ गए। यहां उनका परिवार सरघोडा जिला जो वर्तमान में अभी पाकिस्तान में है, से पंजाब के कोटकपुर में आकर रहनेलगे और भारत का वासी बन गए। कोटकपुर में ही उन्होंने Royal Dodha House की शुरूआत भी की। लेकिन उनके परिवार का एक सदस्य भारत में न रहकर पाकिस्तान चला गया और वहां भी इस मिठाई को मशहूर करके आगे बढ़ा रहा है।

विदेशों में भी हो रहा है एक्सपोर्ट

बता दें कि, अब Royal Dodha House को उनके पोते विपिन विग संचालित करते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी डोडा बर्फी का स्वाद आज भी बिल्कुल वैसा है जैसा सौ साल पहले थे। वर्तमान में यह मिठाई पूरे पंजाब में इस कदर प्रसिद्ध है कि वहां के हर शहर में इसकी डिलीवरी की जाती है। इतना ही नहीं अब उन्होंने विदेशों में भी इस मिठाई को एक्सपोर्ट करने की शुरूआत कर दी है।

उम्मीद करते हैं पसंदीदा डोडा बर्फी से जुड़े इतिहास के बारें में जानकर आपको अच्छा लगा होगा। ऐसे ही अन्य रोचक आर्टिकल्स पढ़ने के लिए The Logically के साथ जुड़े रहें।