Friday, February 3, 2023

कर्ज़ लेकर पढ़ने गए, किसान के इस बेटे ने UPSC में लहराया परचम बन चुके हैं IAS अधिकारी: प्रेरणा

कभी भी सफलता आसानी से प्राप्त नहीं होती है। हमारे अथक प्रयासों और लगातार कोशिश से हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं। जो व्यक्ति सफल होता है, उसकी खुशी में उसके साथ-साथ उससे जुड़े परिवार वालों की खुशी भी शामिल होती है। सफलता को प्राप्त करने के लिए कितने कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, अगर सफलता हासिल हो गई तो कठिनाइयां मायने नहीं रखती। अगर बात UPSC परीक्षा के रिजल्ट की हो तो यह मात्र एक रिजल्ट ही नहीं बल्कि कई युवाओं और उनके परिवार वालों का सपना हकीकत में परिवर्तित करता है।

आज हम आपको ऐसे युवा से रूबरू कराएंगे जिन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए कई संस्थानों में दाखिला लिया लेकिन उनका नामांकन नहीं हुआ। इन्हें आज “कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय” द्वारा “टॉप ट्वेंटी यूपीएससी टॉपर्स” का सम्मान देने के लिए जब दिल्ली में आमंत्रित किया गया तो उनके पास वहां जाने के लिए किराए तक के पैसे उपलब्ध नहीं थे।

Gopal Krishna Ronanki

किसान के बेटे गोपाल कृष्णा रोनांकी

हम जिनकी बात कर रहे हैं, वह टॉपर युवा है गोपाल कृष्णा रोनांकी (Gopal Krishna Ronanki). एक जानकारी के अनुसार इन्होंने अपने पड़ोसी से 50 हजार रुपये ऋण के तौर पर लेकर प्लेन का टिकट कराया ताकि वह सम्मान समारोह में दिल्ली (Delhi) जा सके। आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के श्रीकाकुलम (Shrikakulam) जिले के एक छोटे से गांव में गरीब किसान परिवार से नाता रखतें हैं।

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माता-पिता के सपनों को किया पूरा

इनके पिता रोनांकी अप्पा राव (Ronanki Appa Rav) और मां 30 साल से पूर्व जो सपना देखा उसे गोपाल ने पूरा किया। गोपाल ने पूरे देश में UPSC परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल कर अपने पैरेंट्स के सपनो को सच कर दिखाया। इन्होंने अपने मेंस की परीक्षा में तेलुगू साहित्य को वैकल्पिक विषय के तौर पर रखा और टॉप किया। इतनी बड़ी सफलता हासिल कर पाना गोपाल के लिए बेहद कठिनाइयों का सामना करने जैसा था।

Gopal Krishna Ronanki

सरकारी स्कूल से की है पढ़ाई

गोपाल के पिता एक किसान किसान थे और मां की तबीयत नाजुक रहती थी। इनके पिता चाहते थे कि यह एक अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाई करें लेकिन खुद के हालात को देखते हुए इन्हें मजबूरन सरकारी स्कूल में ही पढ़ना पड़ा। आगे इन्होंने दूरस्थ शिक्षा के आधार पर अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई संपन्न की। घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन्होंने अपने ही गांव के स्कूल में पढ़ाने का कार्य प्रारम्भ किया। लेकिन यहां गोपाल माता-पिता के सपने को पूरा करना चाहते थे। इस दौरान जब यह पढ़ा रहे थे तो अपनी सिविल परीक्षा की तैयारी पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे। जिस कारण इन्हें अपनी नौकरी त्यागनी पड़ी। आखिरकार इन्होंने अपनी मेहनत के दम पर सफलता प्राप्त कर सभी किसान परिवार के युवाओं का मनोबल बढ़ाया।

अति पिछड़े किसान परिवार में जन्म लेने के बाद भी गोपाल ने जिस तरह अपने पैरेंट्स के सपनों को पूरा किया, इसके लिए The Logically Gopal को सलाम करता है।