Wednesday, August 4, 2021

देश की सबसे कठिन परीक्षा को मात्र दूसरे प्रयास में निकालकर कनिष्का बनीं IAS अफसर

“सटीक राह का चयन और निरन्तरता से प्रयास करके लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है”। यूपीएससी के क्षेत्र में जहाँ कैंडिडेट को सफलता प्राप्त करने में सालों लग जाते हैं वहीं आज हम एक ऐसी लड़की की बात करने वाले हैं जो अपने दूसरे अटेम्प में हीं कामयाबी के शिखर पर अपना नाम अंकित कर दिया। उन्होंने साल 2017 में अपना पहला अटेम्प्ट दिया था जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। उसके बाद साल 2018 में अपने दूसरे अटेम्प्ट में वह यूपीएससी की परीक्षा में सफल रहीं और उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हो गया। आईए जानते हैं कठिन लक्ष्य को अपने सटीक प्रयास से हासिल करने वाली कनिष्का सिंह के बारे में…

Kanishka Singh IAS

कनिष्का सिंह (Kanishka Singh)

कनिष्का दिल्ली (Delhi) की रहने वाली हैं और लेडी श्रीराम कॉलेज से साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। कनिष्का को UPSC के अपने पहले अटेम्प में प्री परीक्षा में भी सफलता नहीं मिल पाई थी जिसका कारण वो मॉक नहीं देने को कहती हैं। उन्होंने पहले अटेम्प में सिर्फ दस के करीब मॉक टेस्ट दिए थे, जबकि दूसरे अटेम्प्ट में वह इसकी संख्या बढ़कर 60 तक ले गईं। कनिष्का बताती हैं कि केवल मॉक टेस्ट देना हीं काफी नहीं होता, साथ ही रिवाइज करना भी बहुत जरूरी है। इससे आपको अपने गलतियों का पता चलेगा और उसे दूर करने में आपको मदद मिलेगी।

यह भी पढ़ें :- भाई ने अपनी नौकरी छोड़ बहन को कराई UPSC की तैयारी, घर मे दो-दो IAS बन गए

अपनी स्ट्रेटजी अपने हिसाब से बनाए

कनिष्का जहाँ प्री परीक्षा के लिए मॉक टेस्ट्स को जरूरी मानती हैं तो वहीं मेन्स के लिए आंसर राइटिंग को ज्यादा महत्व देती हैं। कनिष्का कहती हैं कि जब कंटेंट मिल जाए तब हीं आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस शुरू करनी चाहिए। इसके लिए दिसंबर या जनवरी से प्रैक्टिस करना शुरू करें। कनिष्का स्ट्रेटजी के बारे में बताते हुए कहती हैं कि इसे अपनी स्ट्रेंथ और वीकनेस के हिसाब से बनाए। वह जब एक विषय को पढ़ना शुरू करती थीं तो सिर्फ एक ही पढ़ती थीं जैस हिस्ट्री पढ़ती थी तो केवल हिस्ट्री हीं और वह पूरा खत्म होने के बाद हीं दूसरा विषय पढ़ना शुरू करती थीं। आगे कनिष्का कहती हैं कि अगर आप एक साथ दो विषय पढ़ सकते हैं तो जरूर ऐसा करें।

Kanishka Singh IAS

ऑप्शनल के लिए साइकोलॉजी को चुना

कनिष्का कहती हैं कि जिस विषय से आपका ग्रेजुएशन पुरा हुआ है अगर उसी विषय को आप यूपीएससी के ऑप्शनल के लिए चुनते हैं तो आपको बहुत लाभ होता है क्यूंकि उस विषय में आपको पूरी जानकारी होती है। अगर आप दूसरा विषय भी लेते हैं तो उसमें कोई परेशानी नहीं हैं बस उसके पीछे ज्यादा समय ना दें। कनिष्का ने यूपीएससी की परीक्षा में अपना ऑप्शनल साइकोलॉजी को चुना। वह साइकोलॉजी को एक बहुत ही बढ़िया विषय मानती हैं जिसमें तकनीकी कुछ भी ना होने के कारण उसे पढ़ना और समझना आसान होता है। इसे पढ़ने में कनिष्का को कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। साइकोलॉजी का दूसरा लाभ ये है कि यह एथिक्स के पेपर में बहुत मदद करता है, जिससे उत्तर प्रभावशाली बनता है और अंक भी अच्छे मिलते हैं और साथ हीं इससे इंटरव्यू के समय में भी बहुत मदद मिलती है। कनिष्का बताती हैं कि अगर आप साइकोलॉजी का कोई उत्तर भूल जाते हैं तो इसे खुद से भी बनाकर लिखा जा सकता है। कनिष्का के ऑप्शनल विषय में 281 अंक आए थे।

The Logically कनिष्का सिंह को उनकी कामयाबी के लिए बहुत-बहुत बधाईयां देता है।