Thursday, February 25, 2021

पिता हैं DGP और बेटी बन गई IAS, इस परिवार के सभी लोग सिविल सर्विसेज निकाल चुके हैं

कहा जाता है, हम अपनी गलतियों से ही सीखते हैं। अगर एक बार हमें असफलता मिले तो हमें उससे हार नहीं मानना चाहिए बल्कि अपनी गलतियों को समझ कर दुबारा प्रयास करना चाहिए। आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही लड़की की है जिसे यूपीएससी की परीक्षा में दो बार असफलता मिली परंतु उसने हार नहीं मानी, अपनी गलतियों से सीख लेकर अपनी मंजिल हासिल की।

मेघा अरोड़ा (Megha Arora)

मेघा का पूरा परिवार सिविल सर्विस से जुड़ा है। उनके पिताजी पंजाब के डीजीपी हैं और उन्हें सिविल सेवा परीक्षा में आईपीएस का पद नियुक्त हुआ था। ना सिर्फ़ मेघा के पिता बल्कि उनकी माँ भी आईआरएस सेवा के लिए चयनित हुईं थी। मेघा बचपन से ही सिविल सर्विस को अच्छे से समझती थी और उनका झुकाओ भी इसी तरफ रहा।

IAS Megha Arora

मेघा 108वीं रैंक के साथ हुई यूपीएससी की परीक्षा में पास

मेघा अपनी स्कूली शिक्षा भारत में पूरी करने के बाद आगे की पढाई के लिए विदेश चली गई। मेघा ने ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन दोनों ही विदेश से किया। उसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर्स की डिग्री ली। फिर अपने बचपन के सपने को पूरा करने इंडिया आ गईं और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में लग गई। मेघा हमेशा से इंडियन फॉरेन सर्विसेस ज्वॉइन कर भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिप्रेजेंट करना चाहती थी और उन्होंने बिल्कुल ऐसा ही किया। यूपीएससी की परीक्षा में 108वीं रैंक प्राप्त करने के बावजूद भी मेघा ने इंडियन फॉरेन सर्विसेस का ही चुनाव किया।

मेघा सेल्फ स्टडी को बेहतर विकल्प मानती हैं

मेघा भारत लौटकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुट गई। उन्होंने इसके लिए एक कोचिंग भी ज्वाइन किया, परंतु कुछ दिनों बाद उन्होंने वह कोचिंग छोड़ दिया। उन्हें ऐसा लगता था कि वहां किसी एक स्टूडेंट पर पर्सनल ध्यान नहीं दिया जाता। मेघा अन्य कैंडिडेट को भी यही सलाह देती हैं कि अगर आपको लगता है कि आप सेल्फ स्टडी कर सकते हैं तो सेल्फ स्टडी ही करें। उसके बाद उन्होंने सेल्फ स्टडी पर ही जोर दिया और तैयारी करने लगी। मेघा का मानना है कि कोचिंग लेना हैं या नहीं यह किसी भी कैंडिडेट का अपना व्यक्तिगत चुनाव होता है। किसी के दबाओ में कोई फैसला नहीं करना चाहिए।

IAS Megha Arora with her parents

मेघा अपने तीसरे प्रयास में हुई सफल

मेघा ने साल 2014 में अपना पहला अटेम्प्ट दिया परंतु वह प्री परीक्षा में सफल ना हो सकी। उसके बाद साल 2015 में दूसरा अटेम्प्ट दिया और इस बार भी प्री परीक्षा में पास नहीं हो पाई। असफलता से परेशान होकर उन्होंने अगले साल कोई परीक्षा नहीं दिया। फिर साल 2017 में तीसरा अटेम्प्ट दिया और तीनों स्टेजेस क्लियर कर यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त की।

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मेघा की पहले और दूसरे अटेम्प्ट की गलती

मेघा अपनी पहले और दूसरे अटेम्प्ट की गलती मानते हुए कहती हैं कि उस समय उन्होंने अच्छे से रिवीजन नहीं किया था। इसके अलावा उनका टाइम मैनेजमेंट भी सही नहीं था। उन्होंने अपनी गलतियों को समझते हुए उसे सुधारने का प्रयास किया। तीसरी अटेम्प्ट में मेघा ने प्री के लिए कम किताबों चुनी और बार-बार उसका रिवाइज किया। इसके अलावा उन्होंने खूब मॉक टेस्ट भी दिए।

IAS Megha Arora with her parents

मेघा करती थी 6 से 7 घंटे पढ़ाई

मेघा मेन्स की बारे में कहती हैं कि उन्हें ऐस्से और एथिक्स थोड़ा आसान लगता था, इसलिए उन्होंने इसमें वैल्यू एडिशन किया ताकि अच्छे नंबर मिल सकें। ज्योग्राफी में वह अच्छी नहीं थी, इसलिए मेघा ने अन्य विषय में अच्छे अंक पाने की कोशिश की। मेघा ने पिछले साल का पेपर देखा ताकि वह जान सकें की कैसे प्रश्न पूछे जाते हैं। मेघा बताती हैं कि शुरुआत के दिनो में वह 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थी और फिर जैसे-जैसे परीक्षा की तारीख पास आई, उन्होंने पढ़ने का समय और बढ़ा दिया।

मेघा कहती हैं कॉन्फिडेंट रहना हैं बहुत जरूरी

मेघा कहती हैं, जो चीज आपको डिस्ट्रैक्ट करे उससे दूरी बनाए। यह एक लंबी जर्नी हैं और इसमें कन्सन्ट्रेशन की बहुत जरूरत होती है। आपके लिए हर घंटे का महत्व होता है। इसके लिए बहुत जरूरी हैं खुद को पॉजिटिव रखना और पूरे कॉन्फिडेंस के साथ तैयारी करना। जो आपसे निगेटिव बातें करे उनसे दूरी बना ले। अंत में मेघा यही कहती हैं कि अगर आप कॉन्फिडेंट हैं तो यूपीएससी परीक्षा में सफलता अवश्य प्राप्त कर सकते हैं।

The Logically मेघा अरोड़ा के कठिन परिश्रम की तारीफ करता है और उन्हें उनकी सफलता के लिए बधाई देता है।

प्रियंका ठाकुर
बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

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