Monday, November 30, 2020

गरीबी के कारण माँ ने सिलाई कर पढाया अब दोनों बेटों ने IIT के बाद IAS बन कर माता-पिता का सपना पूरा किया

अपने जीवन में हर कोई कामयाबी की ऊंचाई तक जाना चाहता है। वह हर संभव कोशिश करता है कि सफलता के शिखर को छू सकें। लेकिन हर कोई इसे संभव नहीं कर पाता। जो सपनों के आगे घुटने नहीं टेकता, वही कामयाबी के शिखर तक पहुंच पाता है।

बच्चों की कामयाबी के पीछे माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान होता है। वे अपने बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाने के लिये दिन-रात हर संभव प्रयास करतें हैं। इस पूरे संसार में मां ही एक ऐसी शख्स होती है जो बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चे को सफलता के मार्ग में आगे बढ़ाने और सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद करती है। इसके लिये वह अपने सुख-सुविधाओं का भी त्याग करती है। एक मां खुद सभी प्रकार के कष्ट सहन कर अपने बच्चों को सारी सुविधायें उप्लब्ध करवाती हैं, ताकी उसके बच्चे को किसी भी प्रकार की कोई कमी न हो और वह जीवन में आगे बढ़ते रहे। मां के बारें जितना भी कुछ कहा जाये, वह कम ही है। बच्चे कभी चाहकर भी अपने माता-पिता का कर्ज नहीं उतार सकते।

आज हम आपको एक ऐसी मां और बेटे के बारें में बताने जा रहें हैं जो अपने बेटे को सफल बनाने के लिये दिन-रात सिलाई करती रही। ख़ुशी की बात यह है कि उस मां के दोनों बेटों ने पढ़-लिख कर बड़ा अधिकारी बन एक मिसाल कायम कर दी।

सुभाष कुमावत (Subhash Kumawat) राजस्थान (Rajasthan) के झुंझुनू गांव के रहनेवाले हैं। यह पेशे से दर्जी का काम करतें हैं। इनकी पत्नी का नाम राजेश्वरि देवी (Rajeshwari Dewi) हैं। यह भी पति के साथ सिलाई का काम करती हैं। इनकी एक छोटी-सी सिलाई की दुकान है। सिलाई के दुकान से ही उनके घर-परिवार का भरण-पोषण होता है। सुभाष कुमावत और राजेश्वरि देवी के 2 पुत्र हैं। एक बेटे का नाम पंकज कुमावत (Pankaj Kumawat) और दूसरे बेटे का नाम अमित कुमावत (Amit Kumawat) है। अमित और पंकज दोनों भाइयों ने IIT Delhi से मैकेनिकल इंजीनियरिंग से B.Tech की पढ़ाई की हैं। दोनों भाईयों का सपना था कि वे सिविल सर्विस में जायें लेकिन इस सपने को पूरा करना आसान नहीं था। घर की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण बहुत-सी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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अपने बेटों के सपने को पूरा करने के लिये उनकी मां रातभर बिना सोये तुरपाई का काम करने लगीं और उनके पिता सिलाई का काम करते। वे चाहते थे कि उनके बेटे बड़े आदमी बने। ऐसे में आर्थिक तंगी को देखते हुयें बेटे को पढ़ाना बहुत कठिन कार्य था। लेकिन इसके बावजूद भी वे अपने बेटों की पढ़ाई के लिये किताबें, फीस, जरुरत की दूसरी सभी चीजों को उपलब्ध करवाते थे, ताकी उनके बेटों का सपना पूरा हो और वे एक दिन बड़े आदमी बन सके। पंकज और अमित पढ़ाई में बहुत तेज थे। इसलिए उन्हें पढ़ाई करने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती थी। आमदनी को बढ़ाने के लिये पंकज और अमित की मां रात-रात भर कपड़ों की तुरपाई का काम करती थी, ताकी बेटों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की कोई रुकावट न हो।

अपने माता-पिता के बलिदान और संघर्ष को देखकर पंकज और अमित दोनों भाईयों ने दृढ़ निश्चय कर लिया था कि वह सपना जरुर पूरा करेंगें और अपने मां-बाप का सर गर्व से ऊंचा करेंगें। ये दोनों भाईयों ने जम कर तैयारी शुरु की और उनकी मेहनत रंग लाई। पंकज और अमित दोनों भाइयों ने साल 2018 में यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की। यूपीएससी की परीक्षा में पंकज को 443वीं रैंक और अमित को 600वीं रैंक मिली। पंकज और अमित के सफलता के बारें में उनके माता-पिता को सूचना मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके आँखो से खुशी के आंसू छलक आये।

पंकज (Pankaj) और अमित (Amit) अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता-पिता को देते हैं। उनका कहना हैं कि यदि इन्सान सच्चे लगन से मेहनत करे तो सफलता मिल ही जाती है।

The Logically अमित और पंकज को उनकी सफलता के लिये बधाई देता है और साथ ही उनके माता-पिता को अपने बेटों के लिए त्याग और समर्पण के भाव को शत-शत नमन करता है।

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

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