माँ गृहिणी और पिता किसान, बेटे ने पहले इंजीनियरिंग किया और फिर UPSC निकालकर बने IAS अधिकारी: प्रेरणा

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IAS pradeep Kumar dwivedi

किसान शब्द सुनते हीं मन में कृषि करने वाले की तस्वीर उभर आती है। किसानी करने वाले कई लोगों की आंखें की पीढ़ि भी किसानी में हीं संलग्न हो जाती है। लोगों में एक धारणा बन जाती हे कि खेती करने वाला का संतान खेती हीं करेगा। सिर्फ ऐसा सोंचना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। एक किसान का भी सपना होता है कि उसकी संतान आईएएस और आईपीएस अधिकारी बने। कई किसान परिवार में जन्मे बच्चों का भी सपना होता है कि वह पढ़ लिखकर बड़े ऑफिसर बने। आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही व्यक्ति की है जो किसान परिवार से ताल्लुक रखते हुए आईएएस अधिकारी बने।

छतरपुर (Chhatarpur) बुंदेलखंड (Bundelkhand) के प्रदीप कुमार द्विवेदी (Pradeep Kumar Dwivedi) इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन की। पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक नौकरी की। आगे उनके जेहन में सिविल सर्विस का ख्याल आया और वह यूपीएससी की तैयारी करने लगे। प्रदीप यूपीएससी की पहली परीक्षा में असफल हुए लेकिन दूसरी परीक्षा पास किए। अच्छे रैंक नहीं मिलने के कारण उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी और कठिन परिश्रम कर तीसरी परीक्षा में अच्छे रैंक से सफलता हासिल किया।

pradeep Kumar dwivedi

प्रदीप का जन्म और पालन-पोषण एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता किसान और मां गृहिणी है। प्रदीप की शुरुआती पढ़ाई उनके गांव से हीं हुई, आगे वह इंजीनियरिंग करने के लिए भोपाल चले गए और वहां से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किए। इंजीनियरिंग करने के बाद प्रदीप मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में असिस्टेंट इंजीनियर के तौर पर नौकरी भी किए। वह दिल्ली नॉलेज ट्रैक मैं एक इंटरव्यू दिए जिसमें प्रदीप ने कहा कि सिविल सेवा का ख्याल मन में आने पर भी केवल एक ही पद उनकी आंखों के सामने नाचता था और वह था आईएएस बनने का। अपनी नौकरी के दौरान हीं प्रदीप यूपीएससी की पढ़ाई करते थे।

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दूसरी परीक्षा में प्रदीप यूपीएससी (UPSC) क्लियर कर लिए जिसमें वह 491 रैंक प्राप्त किए। सिविल सर्विस ज्वाइन करने की साथ हीं वह अपनी तैयारी जारी रखें और आगे तीसरी बार परीक्षा में शामिल हुए। जिसमें वह 74वीं रैंक हासिल कर आईएएस (IAS) पद के लिए चयनित हुए। प्रदीप अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ कुछ दोस्तों को भी देते हैं जो उनका मार्गदर्शक बनने के साथ-साथ अच्छे सपोर्टर भी थे। प्रदीप बिना किसी कोचिंग के केवल इंटरनेट के माध्यम से अपनी यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी किए।

प्रदीप का दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए गए इंटरव्यू का वीडियो यहां देखें –

प्रदीप के अनुसार उन्हें यूपीएससी की तैयारी के लिए कभी किसी कोचिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी। वह किसी भी परीक्षा के लिए कोचिंग को जरूरी नहीं समझते हैं। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और इंटरनेट के माध्यम से हम सभी तरह की परीक्षाओं की पूरी तैयारी कर सकते हैं। पूरी लगन, खुद पर भरोसा, सेल्फ स्टडी और निरन्तरता ही किसी भी सफलता को प्राप्त करने के लिए काफी है।

एक किसान परिवार में जन्म लेकर कठिनाईयों से बिना डिगे प्रदीप ने जिस तरह आईएएस बनकर सफलता पाई है वह अध्यक्ष के लिए बृहद प्ररेणा है। The Logically प्रदीप जी की खूब प्रशंसा करता है तथा बहुत-बहुत बधाईयां देता है।

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