Monday, November 30, 2020

विकलांगता की हालत में घरवालों ने छोड़ दिया, कठिन हालातो में पढाई कर पहली प्रयास में ही बनी IAS अधिकारी

हमारे जीवन में हर दिन कुछ-ना-कुछ सीखने को मिलता है। हर दिन जिंदगी में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं जिससे लोगों को निराशा मिलती है और कुछ उस उतार-चढ़ाव से सीख लेकर ऐसा कार्य करते हैं कि वह वह सभी के लिए उदाहरण बनते हैं। अपनी जिंदगी में तमाम बाधाओं को तोड़ते हुए अपने सपनों को पूरा करने वाली एक ऐसी लड़की है उम्मुल खेर। उनके परिवार ने उनका आर्थिक सहयोग छोटी उम्र में ही छोड़ दिया लेकिन उन्होंने अपने IAS बनने का सफर अपने दम पर पूरा किया।

उम्मुल बचपन से हीं हैं दिव्यांग

यूं तो यूपीएससी का एग्जाम हर वर्ष होता है और बच्चे अपने सपनों को पूरा करते हैं। लेकिन वर्ष 2016 में यूपीएससी के एग्जाम में उम्मूल खैर ने पहला प्रयास किया और उन्होंने उसमें 420वीं अंक प्राप्त कर अपने सपने को पूरा किया। उम्मुल खेर (Ummul kher) राजस्थान (Rajasthan) के पाली मारवाड़ की निवासी हैं। वह बचपन से ही दिव्यांग है उन्हें अजैले बोन डिसऑर्डर बीमारी है जो हड्डियों को नाजुक करते हैं और उसे मजबूत नहीं होने देते। ये कहा जाए की उन्हें गरीबी और बिमारी विरासत में मिली है तो ये गलत नहीं होगा। लेकिन फिर भी वह अपने दम पर यूपीएससी क्लियर कर सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं।

Ummul kher

बिमारी के कारण उठानी पड़ती है परेशानी

उन्हें उनकी बिमारी के कारण बहुत दिक्कत हुई है। ये बीमारी हड्डियों को कमजोर करता है जिससे गिरने पर फैक्चर हो जाता है। यह अपने 18 साल के उम्र में लगभग 15 से अधिक बार फैक्चर जैसी कठिनाई को भुगत चुकी हैं।

यह भी पढ़ें :- घर चलाने के लिए पिता घूमकर दूध बेचते थे, बेटे ने UPSC निकाला, बन गए IAS अधिकारी: प्रेरणा

पिता फुटपाथ पर बेचते थे मूंगफली

उम्मुल के पिता फूटपाथ पर मूंगफली बेचते और उनका गुजारा उसी से होता था। उनका पूरा परिवार दिल्ली में निजामुद्दीन के पास झोपड़ियों में रहता था उस झोपड़ी में उन्हें बहुत सारे दिक्कतों का सामना हर रोज करना पड़ता था। अगर बरसात का मौसम हुआ तो बरसात में पानी के कारण ही रात में सो नहीं पाते थे। वर्ष 2001 में जब झोपड़ी टूट गई तब वह त्रिलोकपुरी की तरफ अग्रसर हुए। कम उम्र में इतनी समझदार थीं कि उन्हें यह समझ आ गया था कि अगर आपको अपनी जिंदगी में कुछ करना है तो शिक्षा बेहद जरूरी है। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इस कदर कमजोर थी कि वे उन्हें पढ़ाना नहीं चाहते थे।

मां का हुआ इंतकाल

मुश्किलें कम नही हुईं तब तक उनकी मां का इंतकाल हो गया। उनकी मां अपनी बेटी के सभी कार्यों में सहयोग किया करती थी। अब उनके पिता का विवाह हुआ और सौतेली मां आई। उनकी सौतेली मां इतनी अजीब थी कि वह रिश्ते को नहीं संभाल पाई और उम्मुल इस कदर मजबूर हो गईं कि उन्होंने घर छोड़ दिया। आगे उन्होंने किराये पर मकान लिया और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। वह बच्चों को जब ट्यूशन पढ़ाया करती थीं तो उन्हें 100-200 रुपये मिल जाया करते थे। उन्हीं दिनों उन्होंने सोंचा कि मैं आईएस बनूंगी और दुनिया का सबसे कठिन परीक्षा दूंगी।

Handicapped Ummul kher

10वीं में आए 91% अंक

उन्होंने अपनी 5वीं कक्षा तक की शिक्षा आईटीओ में निर्मित 1 विकलांग स्कूल में की और आगे 8वीं तक की पढ़ाई कड़कड़डूमा (Karkardooma) के अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट (Amar Jyoti Charitable trust) में किया। वह पढ़ाई में परिश्रम किया करती थीं और तेज-तर्रार थीं। उन्हें 8वीं में अच्छे मार्क्स आए और उन्हें स्कॉलरशिप मिला। स्कॉलरशिप के कारण उन्हें अवसर मिला कि वह प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सकें। 10वीं में उम्मुल को 91% मार्क्स और 12वीं में 90% मार्क्स आए। आगे उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली से की। वह अपनी पढ़ाई भी करतीं और ट्यूशन भी पढ़ाया करतीं।

UPSC में हुई सफल

आगे भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा और 2016 में उन्होंने UPSC का एग्जाम दिया और पहली प्रयास में 420 रैंक प्राप्त किए। वैसे तो उनकी फैमिली ने उनका साथ छोड़ दिया था फिर भी उन्होंने उन्हें माफ कर दिया है।

अपने कमजोरी को ताकत बनाकर जिस तरह उम्मुल ने सफलता हासिल की वैसे में उनकी लगन की जितनी तारीफ की जाए कम है। The Logically उम्मुल खेर को नमन करता है और साथ ही उन्हें बधाई भी देता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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