Saturday, December 3, 2022

12 वर्ष की उम्र में सर से उठा पिता का साया, मां ने मजदूरी करके पढ़ाया, बेटे ने IAS बनकर पेश की मिसाल

कहते हैं न, विपरीत परिस्थितियों में भी जिनके हौसलें बुलंद होते है उनके सफलता की मार्ग में कोई तूफान आड़ा नहीं बन सकती। आज हम बात करेंगे IAS अफ़सर अरविंद कुमार मीणा की, जिन्होंने घर के हालात अच्छे नहीं होने के बावजूद भी कभी धैर्य नहीं खोया बल्कि मुसीबतों का सामना करते हुए हिम्मत से आगे बढ़कर अपनी मुकाम को प्राप्त किया।

गरीबी में बिताया बचपन

अरविंद कुमार मीणा (IAS Arvind Kumar Meena), राजस्थान (Rajasthan) के ज़िला दौसा, सिकराया उपखंड क्षेत्र के नाहरखोहरा गांव के निवासी है। वे जब महज 12 साल के थे तभी इनके पिता की मृत्यु हो गई, जिसके बाद घर की हालात बिगड़ते लगी।

मां ने मेहनत मजदूरी कर अपने बेटों को पढ़ाया

अरविंद कुमार मीणा (IAS Arvind Kumar Meena) का परिवार एक तो पहले से हीं गरीबी की मार झेल रहा था और पिता के अचानक मृत्यु के बाद इनके परिवार पर दुखों का पहाड़ गिर गया। लेकिन मां ने इनके अरमानों को टूटने नहीं दिया और मेहनत मजदूरी कर अपने बेटों को पढ़ाया।
बता दें कि, वे जब कॉलेज में पढ़ने लगे तब भी उनका घर मिट्टी का हीं था।

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मां ने हमेशा बढ़ाया हौसला

अरविंद कुमार मीणा (IAS Arvind Kumar Meena) ने जब घर का हालात बिगड़ते देखा तो पढ़ाई-लिखाई छोड़ने का पूरा मन बना लिया लेकिन उनकी मां ने उनके हौसलें को बढ़ाया और आगे पढ़ने के लिए उन्हे प्रेरित किया।

मां से मिली प्रेरणा के बाद अरविंद कुमार मीणा पूरी तरीके से पढ़ाई पर ध्यान देने लगे और सरकारी नौकरी की तैयारी करने लगे।

एसएसबी में हुआ चयन

सरकारी नौकरी पाने के लिए अरविंद (IAS Arvind Kumar Meena) पूरे मन से पढ़ाई करते थे और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में सहायक कमांडेंट पोस्ट पर हो गया। लेकिन सेना में नौकरी के दौरान अरविंद UPSC की तैयारी भी किया करते थे।

आईएएस बन लोगों के लिए बने प्रेरणा

अरविंद कुमार मीणा (IAS Arvind Kumar Meena), सेना में नौकरी करने के दौरान भी यूपीएससी की तैयारी किया करते थे और अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी की परीक्षा में देशभर में उन्होंने 676वां रैंक और SC वर्ग में 12वां स्थान प्राप्त किया।