Thursday, May 19, 2022

वह महिला IPS जिसने मुख्यमंत्री तक को गिरफ्तार किया था, लोग इनकी बहादुरी की मिशाल देते हैं: IPS रूपा मुदगिल

अभी तक सभी ने ऐसे कई IPS और IAS की कहानी सुनी भी है और पढ़ी भी है, जिसने कठिन मेहनत और कई सारी चुनौतियों का सामना कर के इस पद को हासिल किया है। आपने देश के सैनिकों की बहादुरी के बारें में भी सुना है, इसके अलावा आप सभी ने कई कहानियां पुलिस की बहादुरी की भी सुनी होगी। लेकिन शायद ऐसा कम या ना के बराबर ही सुना होगा जिसने किसी मंत्री को या मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया हो।

आज हम आपको एक ऐसी महिला IPS के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मिसाल हमेशा दी जाती है। जो हमेशा अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहीं, अपने कर्तव्य को निभाने के लिए मन से सभी प्रकार के डर को निकाल दिया। आइये जानते हैं कौन वह IPS हैं जिसने मुख्यमंत्री को भी गिरफ्तार कर लिया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है।

हम बात कर रहें है IPS रुपा दिवाकर मोदगिल (Roopa Diwakar Moudgil) की। वह कर्नाटक कैडर की 2000 बैच की आईपीएस ऑफिसर हैं। उनका जन्म कर्नाटक के देवणगेरे में हुआ। उनके पिताजी इंजीनियर थे, जो अब रिटायर्ड हो चुके हैं। वर्तमान में डी रुपा बेंगलूर में रेलवे पुलिस में इस्पेक्टर जनरल के पद पर पोस्टेड हैं। इसके पहले रूपा होम गार्ड ऐण्ड एक्स ओफिसियो अडिसनल जनरल, सिविल डिफेन्स में अडिसनल कमांडेंट के पद पर कार्यरत थीं। इसके साथ ही उन्होंने ट्रैफिक एन्ड रॉड सेफ्टी विभाग में कमिशनर के पद को भी सम्भाला।

IPS Rupa

डी रूपा कर्नाटक जेल विभाग की डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल भी रहीं। उनका नाम बड़े-बड़े नेताओं के साथ भी जुड़े लेकिन दोस्ताना तरीके से नहीं। रूपा नेताओं के लिए काल साबित हुईं। रूपा ने किसी के भी साथ नर्मी नहीं बरती। चाहे वो मध्यप्रदेश की सीएम उमा भारती हो या फिर जय ललिता की खास शशिकला। डी रूप देश की पहली महिला पुलिस अधिकारी हैं जिसको 2013 में पुलिस डिविजन में साइबर क्राइम का कमान सौंपा गया था।

रूपा शुरु से हीं पढ़ाई में होशियार रही हैं। उन्होनें स्नातक कुवंपू यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडल जीतने के साथ पूरा किया। उसके बाद उन्होंने बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजि से M.A की पढ़ाई पूरी की। रूपा ने नेट जेआरएफ की परीक्षा पास की तथा इसके साथ हीं यूपीएससी की तैयारी भी करने लगीं।

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रूपा आईपीएस बनना चाहती थीं इसलिए जेआरएफ की नौकरी न कर के UPSC की तैयारी करने लगीं। उनकी मेहनत असर लाई और 24 वर्ष की उम्र में ही रूपा ने यूपीएससी में पास कर गईं। UPSC में रूपा ने ऑल इंडिया में 43वां रैंक हासिल किया था। वह चाहती तो IAS बन सकती थी लेकिन उन्होंने शुरु से IPS का चुनाव किया था। रूपा एक बेहतरीन शार्प शूटर भी रही और शूटिंग में उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते। रूपा की शादी एक आईएएस ऑफिसर मुनीश मुर्दिल से 2003 में हुई। उनके 2 बच्चे भी हैं तथा रूपा की बहन इन्कम टैक्स विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर के पद पर हैं।

रूपा को राजनेताओं और सीनियर किसी का भी डर नहीं है। वे इमानदारी से अपना ड्यूटी करती हैं। बात सही गलत की हो तो रूपा जवाब देने से भी पीछे नहीं हटती हैं। एक समय की बात है सांसद प्रताप सिम्हा ने एक आर्टिकल ट्विट किया था जिसमें वैसे ऑफिसरों के नाम थे जिसने मनचाही जगह पर ट्रांसफर न मिलने के कारण अपना राज्य हीं बदल लिया। उसमें रूपा का भी नाम था। इस आर्टिकल के जवाब में रूपा ने जवाब दिया कि, “ब्युरोक्रेसी को राजनीति से दूर हीं रहने दीजिए जनाब। अफसरों को राजनीति में मत घसीटिए, क्यूंकि आने वाले समय में सिस्टम और समाज दोनों को ही फायदा होगा।”

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रूपा सबसे अधिक चर्चा में वी के शशिकला के केस में रहीं। 2017 में शशिकला जयललिता की पार्टी एऐएडीएमके की जनरल सेक्रेट्री थीं। बाद में उन्हें पार्टी से निष्काषित कर दिया गया। उस समय शशिकला जेल में थीं और डी रूपा जेल विभाग में डीआईजी के पद पर स्थापित थीं। 2017 में जिस जेल में थी उसका दौरा करने डी रूपा गई थीं। उसके बाद रूपा ने एक रिपोर्ट समिट किया जिसमें आरोप था कि शशिकला को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 5 जेल के कमरों के बराबर का बरामदा शशिकला को निजी कक्ष के तौर पर दिया गया है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जेल में शशिकला के लिए अलग से किचेन की व्यवस्था की गई है जहां उनका भोजन बनता है। इसके साथ हीं डी. रूपा ने यह भी आरोप लगाया था कि सभी सुविधाओं के बदले जेल अधिकारियों को 2 करोड़ रुपये की राशि भी दी गई है। इसके अलावा डॉ. रूपा ने जेल विभाग के डीजीपी पर भी आरोप लगाया था कि वे उनके कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

उनका आरोप था कि जेल में कई अवैध गतिविधियां चल रही हैं। उनके अनुसार उन्होंने 25 कैदियों का ड्रग टेस्ट कराया था जिसमें से 18 कैदियों का टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया था। डी रूपा ने फेक पेपर स्टैंप केस में दोषी पाए गए अब्दुल करीम का भी भंडाफोड़ किया था। उनका आरोप था कि वे जेल में 4 लोगों से मालिश करवाता था।

2003 मे जब उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं तो उनपर 10 वर्ष पुराने केस का गैर जमानती वारंट जारी हुआ। इस वारंट को हुबली कोर्ट ने जारी किया था। उस समय डी रूपा कर्नाटक के धाड़वाड़ जिले की एसपी थी। वारंट मिलते हीं वे उमा भारती को गिरफ्तार करने के लिए निकल गई। गिरफ्तारी से पहले उमा भारती ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। उमा भारती पर सम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप था। उन्होंने कर्नाटक के हुबली में 15 अगस्त 1994 को एक ईदगाह में तिरंगा फहराया था। उसी मामले में उमा भारती पर केस दर्ज हुआ और 10 वर्ष बाद वारंट जारी हुआ।

2008 में एक पूर्व मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर के रूपा ने राजनितिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। रूपा ने पूर्व मंत्री यवागल को भी गिरफ्तार किया था। इसके साथ हीं इसी केस में उन्होंने सबऑर्डीनेट डीएसपी मसूती को निलंबित कर दिया था। मसूती पर आरोप था कि वह यवागल से संपर्क बनाये रखा और कई मामलों में बचाने की कोशिश भी की।

एक वक्त जब रूपा बेंगलुरु में DSP के पद पर थीं तो 81 नेताओं की VIP सेवाओं को रद्द कर दिया था। इन सभी नेताओं की सुरक्षा में 216 गनमैन शामिल थे जिनको आदेश पर हटा दिया गया। इनमें मुख्यमंत्री येदियुरप्पा भी शामिल थे। इसके अलावा रूपा ने पूर्व मुख्यमंत्री से 8 नई SUV गाड़ियों को भी वापस ले लिया था जो पुलिस विभाग की थी लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री गैर सरकारी ढंग से उसका इस्तेमाल कर रहे थे।

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रूपा ने “नम्मा बेंगलुरु फाउंडेशन” संस्था द्वारा दिया जाने वाला अवार्ड को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि, “हर सरकारी कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह तटस्थ रहें। जिन संस्थाओं के थोड़े से भी राजनीतिक ताल्लुकात हैं, उनसे सामान दूरी बनाए रखने के साथ हीं उनके प्रति तटस्थ भी रहना चाहिए।”

यदि कोई इमानदार है तो उसे सराहना कम मिलेगी लेकिन कई बार अग्नि परीक्षा से गुजरनी पड़ती है। रूपा को भी हर बार इमानदारी से ड्यूटी निभाने के लिए गुजरना पड़ा। शशिकला केस ने जब तूल पकड़ा तो तुरंत हीं डी. रूपा का ट्रांसफर कर दिया गया। 2017 तक अर्थात् 17 वर्षों में रूपा का 41 बार ट्रांसफर हुआ।

इसके अलावा शशिकला केस में जिस DGP सत्यनारायण राव पर रूपा ने आरोप लगाया था कि जेल में VIP ट्रीटमेंट देने के लिए 2 करोड़ की राशि घुस ली गई है उसमें राव भी शामिल है, उसने रूपा पर 20 लाख की मानहानि का केस किया था। इतना सब होने के बाद भी रूपा अपने कर्तव्य से मुख नहीं मोङीं और ना ही किसी सियासतदानों के सामने झुकीं। रूपा को 2016-17 में 2 बार प्रेसीडेंट पुलिस मेडल द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

The Logically डी रूपा के अदम्य साहस और उनकी कर्तव्य के प्रति सच्ची निष्ठा को सलाम करता है।

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