Monday, January 25, 2021

आंखों से कुछ नही दिखता, ऑडियो रिकॉर्ड कर पढाई की और IRS मेन्स की परीक्षा निकाल ली: प्रेरणा

आंखें हैं तो दुनिया की हर चीज, प्रकृति का हर वह देन और आनेवाला कल भी खूबसूरत है। लेकिन जरा सोंचिए वो लोग अपनी जिंदगी को कैसे जीते हैं जिनके पास आँखें नहीं है। जो शुरुआती दौर से ही दृष्टिहीन होते हैं उन्हें उतनी कठिनाइयां नहीं होती क्योंकि उन्होंने तो कभी उजाले को देखा ही नहीं है। लेकिन अगर कोई उजाला देखे और फिर उसके जीवन मे अंधेरा-ही-अंधेरा हो तब उसके मन की व्यथा बहुत कम व्यक्ति हीं समझ पाएंगे। या फिर इस हाल को वही समझ सकता है जो इस दौर से गुजर चुका हो। लेकिन कहते हैं कि अगर जिंदगी को जीने की तमन्ना हो तो मुश्किलें कितनी भी आएं मकसद सिर्फ अपने लक्ष्य को प्राप्त करना ही होता है।

यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसकी जिंदगी में तो पहले उजाला ही उजाला था। लेकिन कुछ वर्षों बाद यह अंधेरे में चली गई। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को पूरा किया। इन्होंने अपनी दृष्टिहीनता को कमजोरीनहीं बल्कि ताकत बनाया और आरएएस की परीक्षा पास किया।

प्रतिभा अग्रवाल

कुछ कहानियां सुनते ही मन भावुक हो जाता है और आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। प्रतिभा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 29 वर्षीय प्रतिभा अग्रवाल (Pratibha Agrawal) झुंझुनूं (Jhunjhunun) जिले के चिड़ाव (Chirawa) की रहने वाली हैं। पहले तो प्रतिभा सामान्य व्यक्तियों की तरह देख सकती थी और प्रकृति के द्वारा निर्मित इस संसार की सभी चीजों का आनंद ले सकती थी। लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी और जिंदगी में अंधेरा छा गया। लेकिन आंखों की रोशनी खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से आरएएस (Rajasthan Administrative Service) राजस्थान प्रशासनिक सेवा का मुख्य परीक्षा में सफलता प्राप्त किया है।


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वर्ष 2011 तक थी सामान्य

वर्ष 2011 तक प्रतिभा तो सामान्य जिंदगी व्यतीत कर रही थीं। जब यह M.A. प्री का एग्जाम दे रही थीं इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि उनकी आंखों की रोशनी चली गई। जिससे इनके परिवार को बहुत जोर का धक्का लगा। इन्होंने बहुत कोशिश किया कि प्रतिभा की आंखें ठीक हो सके। जिसके लिए परिवार वालों ने प्रतिभा को अमेरिका और दिल्ली एम्स में भी दिखाया। लेकिन डॉक्टरों ने कुछ ऐसा कहा जिससे उन्हें को निराशा हाथ लगी। प्रतिभा को “रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा बीमारी”  हुई थी जिसके कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। डॉक्टर ने बताया कि हम इसका इलाज नहीं कर सकते, इसका इलाज असम्भव है। इस दौरान उनके परिवार में निराश का माहौल छा गया। लेकिन प्रतिभा हार नहीं मानी और उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। फिर उन्होंने बीएड में एडमिशन कराया जिसे उन्होंने 2017 में कंप्लीट किया।

18-20 घण्टे करतीं पढ़ाई

प्रतिभा की तैयारी में इनके दोस्त, शिक्षक और परिवार के सदस्यों ने खूब मदद की। महेश जो की प्रतिभा के परिवार के सदस्य हैं, उन्होंने यह जानकारी दी कि प्रतिभा प्रतिदिन लगभग 18 से 20 घंटे तक पढ़ाई किया करती थीं। इनकी सहेली का नाम श्रद्धा पंसारी है। उन्होंने मेरी प्रतिभा की बहुत मदद की है। राजेश शर्मा जो चिड़ावा के रहने वाले हैं वे प्रतिभा के लिए जो पढ़ाई करना था उस नोट्स का ऑडियो लाकर दिया करती थीं। आरएएस परीक्षा प्रतिभा से जो भी सवाल पूछे जाते उसका उन्होंने मौखिक जवाब दिया। यह शुरू से ही पढ़ने में अव्वल रही हैं। उन्होंने अपने मैट्रिक और इंटर में 76 प्रतिशत मार्क्स प्राप्त किया है।

रिकॉडिंग और यूट्यूब से किया पढ़ाई

सबसे अहम और और खास बात यह है कि जिस तरह इनके परिवार और सहेलियों ने प्रतिभा की मदद की वह बहुत ही सराहनीय कार्य है। उन लोगों ने प्रतिभा को जो भी पढ़ना था उस कंटेंट को रिकॉर्ड कर मोबाइल के माध्यम से उन्हें सुनाया। साथ ही यूट्यूब के जरिए भी उन्हें एग्जाम की तैयारी करवाई गई। वह हमेशा उन रिकॉर्डिंग को सुना करती थी जो इन्हें पढ़ाई के लिए मिलता था। वैसे तो प्रयिभा 90% अपनी आंखों की रौशनी खो चुकी हैं लेकिन अपने हौसलों को बुलंद रखकर सभी युवाओं के लिए उदाहरण बनी है।

प्रतिभा के लगन और हौसलों से प्राप्त किए गए सफलता के लिए The Logically उन्हें बधाईयां देता है और कामना करता है कि वह और तरक्की करें।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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