Thursday, January 28, 2021

सम्मान्य खर्च से भी कम पैसे में बने इस घर मे AC की जरूरत नही पड़ती: जानिए खासियत

पेड़-पौधों की कटाई हो या प्लास्टिक का उपयोग, इन सभी कार्यों से दिन-प्रतिदिन पर्यावरण असन्तुलित होता जा रहा। लेकिन ऐसे बहुत से व्यक्ति हैं जो पर्यावरण को सुरक्षित करने में अपना कदम आगे बढ़ा रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे हीं शख्स के विषय मे बताएंगे जिनका घर इको फ्रेंडली है और जो पर्यावरण संरक्षण हेतु हमेशा प्रयासरत रहते हैं।

कर्नाटक के जितेंद्र

47 वर्षीय जितेंद्र (Jitendra) कर्नाटक (Karnataka) के हुबली (Hubli) के निवासी हैं। वह आर्किटेक्ट हैं। वह 24 वर्षों से इस कार्य को कर रहे हैं। वे उन चीज़ों का उपयोग दुबारा करना चाहतें हैं जिसे सब एक बार उपयोग कर उसे अनुपयोगी समझते हैं। वह कार्बन फुटप्रिंट के बचाव के लिए जब कोई इमारत को उनकी देख-रेख में तोड़ा जाता है तो उसकी हर एक चीज को सुरक्षित रखते हैं ताकि सही कर उसका पुनः उपयोग हो सके। उनका हुबली में एक आर्किटेक्चर फर्म भी है जिसका नाम “इंफ्रास्ट्रक्चर वन” है। उसके माध्यम से उन्होंने कुछ ही सालों में 200 से करीब प्रोजेक्ट को सम्पन्न भी किया है। बीते कुछ वर्षों में वह पूरी तरह ग्रीन बिल्डिंग को फोकस किए हैं। लेकिन बहुत हीं जल्द उनका यह ग्रीन बिल्डिंग निर्माण का कार्य खत्म होगा क्योंकि सभी की चाहत यह है कि ये अगर नया घर बना रहे हैं तो हर चीज नई उपयोग करें ना कि जो एक बार उपयोग है वो।

 Eco friendly house

लोगों की सोंच को मानतें है गलत

उन्होंने यह बताया कि लोगों को पुरानी चीजें अपने घर में लगाना पसन्द नहीं जो कि गलत है। उन्होंने जब अपना घर बनाया तब खुद वह उन सभी सामग्रियों का उपयोग किए जो एक बार उपयोग हो चुके थे। उन्होंने ढाई सौ वर्ग फीट भूमि में अपने घर का निर्माण किया जिसमे 40% कम खर्च लगा। उन्होंने खुद के घर को इसलिए ऐसा बनाया ताकि वह लोगों के लिए उदाहरण बनें और उन्हें पहले हीं किसी भी चीज को रीयूज करना पसंद था।

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सीखा चीजों का उपयोग करना

 Eco friendly house

वह अपनी पढ़ाई संपन्न कर अहमदाबाद आए तब उन्होंने वहां केवी जैन और एसोसिएट के तहत कुछ वर्षों तक कार्य किया। वहां पर उन्होंने अप साइकिलिंग सीखी और साथ हीं किसी भी चीज को दोबारा किस तरह उपयोग करना है यह समझ पाए। उन्होंने यह निर्णय लिया कि वह 2010 में घर बनाएंगे। इसी दौरान उन्होंने ग्रीन बिल्डिंग के निर्माण का निश्चय किया ताकि वह लोगों को यह समझा पाएं की ग्रीन आर्किटेक्चर कितना उपयोगी है। उसके लिए उन्होंने अपने घर में फेरोसीमेंट का उपयोग किया इसका वजन हल्का था इस कारण उनका घर बहुत हीं जल्द 9 महीने में बनकर तैयार हो गया। प्री-स्लैब का इस्तेमाल अधिकतर छत और उनके घर के बाहरी भाग में किया गया है जिससे उनका घर देखने में बहुत ही मनोरम है।

 Eco friendly house

साथ हीं उन्होंने अपने घर के निर्माण में जहां लकड़ियों की आवश्यकता पड़ी वहां उन्होंने एक बार यूज हुई लकड़ियों का भी प्रयोग किया जिसमें उन्हें बहुत हीं कम लागत लगा साथ हीं घर में अगर फर्नीचर है तो उन्हीं स्क्रैप लकड़ियों के उपयोग से हीं फर्नीचर का निर्माण हुआ है।

इको फ्रेंडली है घर

हम यह बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि जब सूर्य का प्रकाश आता है तो हमारा घर बहुत हीं जल्दी गर्म हो जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीवार पर बांस की झाङियां लगाई हैं जिस कारण दीवार को ठंडक मिलती है और घर भी ठंडा रहता है। उन्होंने अपने घर में प्लास्टर नहीं कराया है क्योंकि ऐसा करने से सिर्फ घर की शोभा बढ़ती है वह मजबूत नहीं होता। इतना हीं नहीं उन्होंने वेंटीलेशन का भी पूरा ध्यान रखा है। उन्होंने फनल इफेक्ट का उपयोग खिड़कियों में किया है जिसके कारण एयर सरकुलेशन बना रहता है। घर में प्रकाश की रोशनी पूरा दिन रहे इस कारण हर तरफ बड़ी-बड़ी खिड़कियां लगी हुई है। पानी को इकट्ठा कर रखा जाए इसके लिए उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोलर हीटिंग पावर सिस्टम का उपयोग भी किया है।

Jitendra

इको फ्रेंडली घर का निर्माण करने और अन्य व्यक्तियों को भी इस कार्य के लिए प्रेरित करने के लिए The Logically जितेंद्र जी को सलाम करता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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