Tuesday, September 28, 2021

80 रूपये उधार लेकर सात सहेलियों ने शुरू किया था लिज्जत पापड़ का कारोबार, अब है करोड़ों का टर्नओवर

लिज्जत पापड़ (Lijjat Papad) भारत के शादी, उत्सव, त्योहारों के लिए प्रसिद्ध पापड़ों में से एक है। हर बाजार में उपलब्ध लिज्जत पापड़ आज भी लाखों लोगों की पहली पसंद है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इतने सालों से लिज्जत पापड़ ने अपने ग्राहकों के साथ अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखा है। – know the history behind Lijjat Papad

7 सहेलियों ने मिलकर शुरू‌ किया लिज्जत पापड़

साल 1959 में 7 सहेलियों ने मिलकर लिज्जत पापड़ बनाने की शुरूआत की थी। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन यह पापड़ लोगों की पहली पसंद बन जाएगा।- know the history behind Lijjat Papad

मुंबई (Mumbai) की रहने वाली जसवंती बेन (Jaswanti Ben) और उनकी 6 सहेलियां पार्वतीबेन रामदास ठोदानी (Parvatiben Ramdas Thodani), उजमबेन नरानदास कुण्डलिया (Uzmben Narandas Kundalia), बानुबेन तन्ना (Banu Ben Tanna), लागुबेन अमृतलाल गोकानी (Laguben Amrutlal Gokani), जयाबेन विठलानी (Jayaben Vithlani) ने मिलकर घर पर ही पापड़ बनाने की शुरूआत की थी। इसके अलावा एक महिला को पापड़ बेचने की ज़िम्मेदारी दी गई थी।- know the history behind Lijjat Papad

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शुरूआत में पैसे को लेकर आई दिक्कत

7 सहेलियों ने घर चलाने के लिए पापड़ बनाने की शुरूआत की थी वहीं आज उनका बिज़नेस इतना आगे बढ़ चुका है कि हर घर में उनके बनाए पापड़ का इस्तेमाल होता है। शुरूआत में उनकी सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि पापड़ बनेंगे कैसे, क्योंकि उसे बनाने के लिये सामान चाहिये था और उनके पास इसके लिए पैसे नहीं थे।

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80 रुपये उधार लेकर शुरू किया काम

ऐसे में 7 सहेलियों ने मिलकर सर्वेंट ऑफ़ इंडिया सोसायटी के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता छगनलाल पारेख (Chhaganlal Parekh) से 80 रुपये उधार लेकर काम शुरू किया था। उस 80 रुपये से इन सहेलियों ने पापड़ बनाने वाली मशीन ख़रीदी और पापड़ के 4 पैकेट बनाकर एक व्यापारी को बेचे। उसके बाद व्यापारी ने उनसे और पापड़ बनाने की मांग की और इसी तरह धीरे-धीरे पापड़ की मांग बढ़ती चली गई और लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता भी बढ़ती गई।- know the history behind Lijjat Papad

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1,600 करोड़ रुपये का है व्यापार

इन महिलाओं ने छगनलाल से पापड़ की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के गुण सीखे। साल 1962 में संस्था का नाम ‘श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़’ रखा गया। साल 2002 में लिल्जत पापड़ का टर्न ओवर करीब 10 करोड़ था। वर्तमान में इसके 60 से ज़्यादा ब्रांच हैं, जिसमें लगभग 45 हज़ार महिलाएं काम करती है।

80 रुपये से शुरूआत कर 1,600 करोड़ रुपये का व्यापार करने वाली ये 7 सहेलियां हर किसी के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं। – know the history behind Lijjat Papad

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