Wednesday, December 13, 2023

मंदिर के बेकार फूलों से साबुन, अगरबत्ती, स्प्रे जैसे प्रोडक्ट बनाकर 1.5/महीने की कमाई करती हैं: Maitri Jariwala

सूरत की रहने वाली मैत्री जरीवाला (Maitri Jariwala) पेशे से केमिकल इंजीनियर हैं। रोज सुबह उठ कर वे अलग-अलग मंदिरों में जाती हैं। पूजा-पाठ करने के लिए नहीं, बल्कि वहां कूड़े के ढेर में पड़े फूलों का कलेक्शन करने के लिए। पिछले बीते एक साल से मैत्री यह काम कर रही हैं। अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर इन बेकार पड़े फूल जिनको अक्सर हम नहर में प्रवाहित कर देते है वे इनका क्या करती हैं? तो जवाब हम आपको यहां देंगे। दरअसल मैत्री इन बेकार पड़े फूलों को अपसाइकिल (Upcycle) करके साबुन, अगरबत्ती, मोमबत्ती, ठंडई, स्प्रे, वर्मीकंपोस्ट सहित 10 से ज्यादा वैराइटी के प्रोडक्ट बनाती हैं। इससे मैत्री हर महीने 1.5 लाख रुपए तक की कमाई कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने 9 लोगों नौकरी भी दी है।

कौन है मैत्री जरीवाला (Maitri Jariwala)

कॉलेज टाइम से ही मैत्री वेस्ट मैनेजमेंट ( Waste Management) पर काम कर रही थीं। 22 साल की मैत्री का कहना है कि कॉलेज के दौरान पहले साल से ही वह वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। करीब 3 साल तक अलग-अलग तरह के वेस्ट (कूड़ा) को लेकर काम किया। कई तरह के प्रोडक्ट तैयार किए और उनके हर पहलू को एनालाइज किया। इससे उन्हें हर तरह के वेस्ट प्रोडक्ट की अच्छी खासी समझ हो गई।

इसके बाद मैत्री ने महसूस किया कि बाकी वेस्ट की तुलना में फ्लावर वेस्ट (Flower Waste) को अपसाइकिल करना और उससे नए प्रोडक्ट बनाना ज्यादा बेहतर है। क्योंकि देखा जाए इसे अपसाइकिल करने में लागत कम आती है और इसकी प्रोसेस आसान होती है। जिससे उन्होंने कार्ड और कुछ पेपर भी तैयार किए थे।

मैत्री ने अपने कॉलेज के आखिरी सेमेस्टर में फ्लॉवर वेस्ट से कुछ प्रोडक्ट तैयार किए। इसके लिए जरूरी मशीनरी का सपोर्ट उन्हें कॉलेज की तरफ से मिला। इसके बाद उन्होंने अपने आसपास के लोगों और दोस्तों से फीडबैक भी लिया। हर जगह से मैत्री को पॉजिटिव रिस्पॉन्स ही मिला। कई लोगों ने उन्हें इस काम को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया।

Maitri jariwala waste flowers up cycling startup

सिर्फ 77 हजार रुपए की लागत से शुरू किया काम

मैत्री का कहना हैं कि फ्लॉवर वेस्ट हमारे आसपास बहुत ही आसानी से मिल जाता हैं। आप किसी भी मंदिर में जाइए या किसी नदी के किनारे जाइए, आपको बड़ी संख्या में बेकार फूल मिल जाएंगे यानी रॉ मटेरियल (Raw Material) की कमी नहीं है। इसलिए साल 2021 में पढ़ाई पूरी करने के बाद मैत्री ने इसे स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला लिया। हालांकि तब घरवालों ने उनपर थोड़ी नाराजगी दिखाई। घरवाले चाहते थे कि इंजीनियर बेटी इस मंदिर से उस मंदिर तक भटकने की बजाय किसी बड़ी कंपनी में काम करे, अच्छी नौकरी करे, लेकिन बाद में वे लोग भी फैमिली वाले भी सपोर्ट करने लगे।

मैत्री बताती है कि पिछले साल होली के मौके पर उन्होंने प्रोफेशनल लेवल पर काम करना शुरू किया। चूंकि होली का मौका था, लिहाजा पहला प्रोडक्ट रंग और गुलाल तैयार किया। इसके लिए सबसे पहले फ्लॉवर वेस्ट कलेक्ट किया। और उन्हें घर लाकर सेग्रिगेट किया और फिर सुखाया। इसके बाद ग्राइंड करके पाउडर तैयार किया। इससे अलग-अलग रंग के फूलों के वेस्ट से अलग-अलग रंग और गुलाल तैयार हुए। शुरुआत में कॉलेज की तरफ से हमें 77 हजार रुपए का फंड मिला था। इसी फंड से मैत्री ने अपना स्टार्टअप (Startup) शुरू किया।

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सोशल मीडिया की बदौलत अपने काम को रफ्तार देने वाली मैत्री का कहना है कि होली के मौके पर हमारा गुलाल और रंग खूब बिका। सूरत और आसपास के शहरों में उनका प्रोडक्ट पहुंच गया। इससे उनका मनोबल बढ़ा और उन्होंने अपना दायरा बढ़ाना शुरू किया। रंग-गुलाल के बाद साबुन, अगरबत्ती, मोमबत्ती, स्प्रे, वर्मीकंपोस्ट जैसे प्रोडक्ट बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे मैत्री के साथ कुछ एनजीओ भी जुड़ते गए। साथ ही माउथ पब्लिसिटी (Mouth Publicity) के जरिए एक के बाद एक कई कस्टमर्स उनसे जुड़ते गए।

नवंबर 2021 में मैत्री ने मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने का सोचा। इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे फेमस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने प्रोडक्ट की फोटो-वीडियो अपलोड करने लगीं। धीरे-धीरे उनके फॉलोअर्स बढ़ते चले गए। फिर मैत्री ने प्रोडक्ट को प्रमोट करना शुरू किया। इसका फायदा यह हुआ कि सूरत के बाहर से भी उनके प्रोडक्ट की डिमांड की डिमांड बढ़ने लगी। मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों के लोग उनके कस्टमर बन गए। अभी हर दिन उन्हें 20-25 उन्हें ऑर्डर मिलते हैं।

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आखिर मैत्री कैसे तैयार करती हैं अपने प्रोडक्ट्स?

मैत्री का कहना है कि उनके साथ 9 लोगों की टीम है। जिसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। जो फ्लॉवर वेस्ट से बेस्ट प्रोडक्ट बनाने का काम करती हैं। जहां तक रॉ मटेरियल की बात है। इसके लिए उनके साथ कई एनजीओ जुड़े हैं। कई मंदिरों से उनका अच्छा खासा टाइअप है। नगर निगम भी उन्हें सपोर्ट करते हैं। लिहाजा उन्हें फ्लॉवर वेस्ट की कमी नहीं होती है।

वेस्ट कलेक्ट करने के बाद मैत्री सबसे पहले फूलों की पत्तियों को सुखाती हैं। इसके बाद ग्राइंडर की मदद से उनका पाउडर तैयार करती हैं। इसके बाद उस पाउडर से अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट बनाती हैं। कई बार ग्राइंड करने की बजाय वो फूलों के वेस्ट को उबाल लेते हैं। फिर उसे छानकर स्प्रे, ठंडई जैसे प्रोडक्ट बनाते हैं। इसके बाद मैत्री उसकी लेबलिंग और पैकेजिंग करती है।

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