Sunday, September 19, 2021

Lockdown के समय प्रवासी मजदूरों ने 100 एकड़ का पहाड़ काट डाला, 5 हज़ार लोगों को मिलेगा इससे पानी

Covid-19 के कारण पूरे भारत में लॉकडाउन लागू किया गया था। सारे कारखाने बंद कर दिए गए थे। ऐसे में मजदूरों के लिए रोजगार की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। बहुत मजदूर शहर छोड़ कर अपने गांव लौट गए है। प्रवासी मजदूरों के लिए गावों में भी कोई काम नहीं है, लेकिन कुछ मजदूरों ने अपने समय को व्यर्थ नहीं होने दिया। आज की कहानी ऐसे ही मजदूर वर्ग की है जो अपने गांव में पानी की समस्या सुलझाने के लिए 100 एकड़ पहाड़ काट डाले।

पहाड़ को काटकर दिलाया पानी की समस्या से निजात

भोपाल (Bhopal) के छत्तरपुर (Chhatarpur) जिले के अगरोता गांव में शहर से लौटे प्रवासियों ने गांव में पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मजदूरों ने मिलकर 100 एकड़ जमीन को काट कर तालाब बना दिया ताकि गांव में रहने वाले लोगों को पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़े। सूखे से ग्रसित इलाके में रहने वाले 5000 लोगों के लिए यह कार्य बहुत बड़ी राहत दिलाएगा।

TOI के रिपोर्ट के अनुसार इस तालाब का निर्माण एक प्रोजेक्ट के तहत 10 साल पहले लगभग 10 करोड़ के लागत खर्च से किया गया था। लेकिन उस तालाब में कभी पानी इकट्ठा नहीं हो पाता था, क्योंकि तालाब में पानी आने के रास्ते का रोड़ा पहाड़ था। जिसकी वजह से गांव में पानी की समस्या अबतक नहीं सुलझ पाई थी। जिस काम में सरकार से कोई मदद नहीं मिली, उसे गांव वालों ने लॉकडाउन का सदुपयोग करते हुए अपने बल बूते से कर दिखाया है।

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सरकार से नहीं मिली मदद

कोरोना संक्रमण के कारण हुए लॉकडाउन में अप्रैल महीने में उस गांव में लगभग 100 प्रवासी मजदूर अपने घर लौटे थे। मजदूरों को कहीं कोई काम नहीं मिल रहा था। लेकिन मजदूर वर्ग के लोग कभी अपने समय का दुरुपयोग नहीं करते है क्योंकि उन्हें मेहनत करके जीवन-यापन करने की आदत होती है। शहर से लौटे 100 प्रवासी मजदूर गांव में पानी की समस्या को देखते हुए बाकी गांव वालों की मदद से 100 एकड़ पहाड़ को काटकर तालाब में पानी आने का रास्ता बनाया।

जहां सरकार ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई वहीं गांव वालों ने ख़ुद नया तरीका अपनाकर अपनी समस्या का समाधान भी निकला है। The Logically मजदूरों द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करता है।