फौज की ट्रेनिंग में पूरी तरह पैरालाइज़्ड हो गए, अब गरीब और जरूरतमंद बच्चों की ज़िंदगी संवारते हैं, मिल चुके हैं कई सम्मान

1619

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत.. यह सिर्फ कहने की ही बात नहीं है, ऐसा सच में होता है। यूं तो मैं शुरू से ही इस बात को सही मानती हूं पर इसकी सौ प्रतिशत सत्यता तब साबित हुई जब मैं एक पैरालाइज़्ड इंसान की कहानी पढ़ रही थी। 100% डिसेबल्ड.. विज्ञान के अनुसार व्यक्ति कुछ भी करने लायक नहीं रहता। लेकिन वह व्हीलचेयर पर बैठ स्कूबा डाइविंग करता है, यह हैरानी वाली बात है। यह देश के ऐसे जवान की कहानी है जिन्होंने अपने हौसलें और हिम्मत से सभी कठिनाइयों को अपने पैरों में झुका दिया।

100% है पैरालाइज़्ड

हरियाणा (Hariyana) के निवासी नवीन गुलिया (Navin Gulia) पूर्व आर्मी कैप्टन (Indian Aarmy Caiptain) रह चुकें हैं। इनकी चाहत फ़ौ’ज में जाकर देश सेवा की थी। इनकी यह चाहत पूरी भी हुई लेकिन दुर्भाग्यवश इनके साथ बहुत गलत हुआ। जब यह अपनी ट्रेनिंग में थे तब इनके लिए एक दिन बहुत ही मनहूस साबित हुआ। वह दिन था 29 अप्रैल 1995 का। इस दिन इनके साथ एक दुर्घटना घटी जिसमें इनके रीड़ की हड्डी के साथ गर्दन की हड्डी भी बुरी तरह चोटिल हुई। यूं मानिए तो टूट गयी। जब इनका इलाज़ हुआ तब डॉक्टरों ने बताया कि यह 100% पैरालाइज़्ड हैं। इस दुर्घटना ने इनके सपने तो तोड़ दिए लेकिन नवीन गुलिया ने अपने हिम्मत और हौसलों को बचा लिया।

बने सबके लिए मिसाल

इन्हें बताया गया कि 100% डिसेबल्ड होने के कारण व्यक्ति पूरी तरह कुछ करने लायक नहीं रहता है। लेकिन उन्होंने इस बात को असत्य सिद्ध करने का निश्चय किया और अपने हौसलों को कायम रखा। इनका इलाज 2 वर्षों तक चला। 120 दिनों में यह व्हीलचेयर की मदद से घूमने लगें। फिर जिंदगी के एक नए सफर की शुरुआत हुई। इन्होंने 3 भाषाओं को अच्छी तरह सीखा और बुक्स पढ़ने लगें। इतना ही नहीं इन्होंने कंप्यूटर कोर्स भी पूरा किया। यह व्हीलचेयर पर बैठ जल में स्कूबा डाइविंग भी कर लेते हैं।


यह भी पढ़े :- दोनों हाथ नही हैं तो स्कूल ने एडमिशन नही लिया, अपने पैरों से करती हैं खूबसूरत पेन्टिंग और पहचान बना लिया


खुद का ADDA संस्था

इनके गांव के पास एक बरहणा गांव है जहां बेटियों के जन्म से सबको दुःख होता है और यह पाप माना जाता था। इन्होंने इस गलत सोच के विपरीत जाकर आवाज उठाई। यह बेटियों के साथ होने वाले फर्क को दूर करना चाहते थे। उनके आवाज़ के लिए उनके ऊपर कानून का दबाव भी डाला गया। आगे इन्होंने बच्चों को शिक्षा देने के लिए एक ADDA (अपनी दुनिया अपना आशियाना) नामक संस्था खोली और उनके लिए यह सब कुछ बनें। इनका मानना है कि अपनो को तो सब अपना बनाते हैं, मैं उन सभी को अपना बनाऊंगा जो बहुत सारी चीज़ो से वंचित हैं। उनके इस कार्य के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है।

महानायक अमिताभ बच्चन ने भी किया है सलाम

कौन बनेगा करोड़पति शो के सीजन 11 में इन्हें महानायक अमिताभ बच्चन ने सैल्यूट किया और इनके बारे में सबको बताया भी। इन्होंने इस शो के दौरान इन्होंने 12.50 लाख रुपये जीते जिन्हें बच्चों की संस्था के लिए रखा गया।

मिलें हैं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

इनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नामांकित है। इन्होंने 1110 किलोमीटर की यात्रा वो भी बिना किसी रुकावट के 18,632 फिट ऊंचे पहाड़ी “मासिर्मिक” में 3 दिन पूरे होने यानी 55 घण्टे में पूरी कर ली। इन्हें “राष्ट्रीय आदर्श” का पुरस्कार हमारे A. P. J. अब्दुल कलाम आजाद ने दिया। उन्होंने बताया कि मुझे इन सब पुरस्कारों से अधिक प्रसन्नता बच्चों की सहायता से मिलती है।

नवीन गुलिया की संघर्ष की कहानी दिए गए वीडियो में देखें –

पैरालाइज़्ड होने के बावजूद भी बच्चों को ध्यान से उनकी जरूरतों को पूरा करने और सबके लिए उदाहरण बनने के लिए The Logically नवीन को शत-शत नमन करता है और सैल्यूट भी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here