Wednesday, October 21, 2020

दसवीं बाद छोड़ दिये पढाई, अब पपीता की खेती कर कमा रहे हैं 5 लाख रुपये

कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहां ज्यादातर लोगों की पेशा कृषि हीं है। अपने जीविकोपार्जन हेतु वे कई प्रकार के फसलों और उसे उपजाने हेतु कई कृषि पद्धतियों को अपनाते हैं। आज बात एक ऐसे हीं किसान की जो ज्यादा पढ़े-लिखे तो नहीं हैं लेकिन अपनी कृषि से अपनी किसानी विद्वता का परचम लहरा रहे हैं। उनका नाम है परशुराम दास। आईए जानें कि परशुराम ने किस तरह अपनी कृषि को बृहद आयाम दिया और किसानी में अपनी काबिलियत को दर्शाया…

परशुराम दास जिन्होंने अपने संघर्ष से खुद को निखारा

मन मे लगन और दृढ़संकल्प हो तो कोई भी इंसान अपनी उपलब्धियों को हासिल कर सकता है। ऐसे ही हैं, भागलपुर (Bhagalpur) ज़िलें में स्थित एक गांव चापर (Chapr) के रहने वाले परशुराम दास (Parshuram Das)। इनका जन्म गरीब परिवार में हुआ था। इस कारण इन्हें बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। घर की स्थित ठीक ना होने के कारण इनकी पढ़ाई भी सही तरीके से नहीं हो पाई। यूं कहा जाये तो इन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई भी पूरी नहीं की। कुछ ही समय बाद इनकी शादी हुई और बच्चे भी हो गयें। इस दौरान घर का खर्चा बहुत ही ज्यादा हो गया। तब इनके पास जो 5 बीघा भूमि थी उसे गिरवी रखना पड़ी। थोड़ा मुश्किल हुआ क्योंकि जिस जमीन की मदद से गुजारा हो रहा था। इन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत ही मुश्किलों का सामना किया। आर्थिक परेशानियों के कारण इन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इन्होंने अपनी मेहनत से गिरवी पड़ी जमनी छुड़ाई और उसमें खेती कर 5 लाख का फायदा कमाया।

मित्र ने दिया परशुराम को खेती की सलाह

उनकी यह स्थिति देख इनके एक मित्र ने इन्हें पपीता की खेती के बारे में सलाह दी। वर्ष 2011 में इन्होंने जो जमीन गिरवी रखी थी उसी को रेंट पर लिया। उसमें पपीते को लगाया। पहले तो इस खेती से इन्हें निराशा हाथ लगी। फिर भी इन्होंने अपने कार्य को जारी रखा। इन्होंने वापस से जम कर मेहनत की और इस बार खेती में सफल हुयें। आगे अन्य प्रकार के पपीते जैसे चड्डा सिलेक्शन, पूसा नन्हा और रेड लेडी लगायें। इस खेती से इन्हें 5 लाख का मुनाफा हुआ जिससे यह बहुत खुश हुयें और इन्होंने अपनी गिरवी रखे हुए खेत को भी छुड़ा लिया। इन्होंने अपने खेत के विषय में सबको बताया और सभी किसानों ने भी यह खेती को अपनाया।


यह भी पढ़े :- किसान की अनोखी तरकीब, लगाए एक खेत मे तीन फसल, जो एक दूसरे को सींचते हैं


एक बार की खेती 4 सालों तक देती है फायदा

पपीता को भी लगाने के लिए मौसम देखना अनिवार्य है। आप इसे फरवरी-मार्च या नवम्बर-दिसम्बर में लगा सकते हैं। यह पेड़ 3-4 सालों तक आपको प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 80-100 टन का फल देगा। आप खुद सोंच सकतें हैं कि इससे कितना मुनाफा कमाया जा सकता है। हमारे यहां पपीते का डिमांड हर सब्जी मंडी में होता है।

स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है पपीता

पपीता हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है। इसके अनेक फायदें हैं। जैसे :-
यह कॉलेस्ट्रॉल कम करता है।
पाचनतंत्र को यह बेहद सही रखता है।
आंखों की रौशनी और रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाने में मदद करता है।

ज्यादा पढ़े-लिखे ना होने के बाद भी परशुराम जिस तरह कृषि से लाखो का मुनाफा कमा रहे हैं वह ना सिर्फ उनकी काबिलियत को प्रदर्शित करता है बल्कि कृषि में प्रयासरत लोगों के लिए एक बड़ी प्ररेणा हैं। The Logically परशुराम दास जी के कार्यों की खूब सराहना करता है और उन्हें सलाम करता है।

Vinayak Suman
Vinayak is a true sense of humanity. Hailing from Bihar , he did his education from government institution. He loves to work on community issues like education and environment. He looks 'Stories' as source of enlightened and energy. Through his positive writings , he is bringing stories of all super heroes who are changing society.

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

सबसे लोकप्रिय

Bimla Munda Bimla Munda

जब हमारे देश में कोई योद्धा या खिलाड़ी देश के लिए जीत हासिल करता है तो बहुत खुशी का माहौल बनता है।...

पराली का उपयोग कर बना दिये खाद, आलू के खेतों में इस्तेमाल कर कर रहे हैं दुगना उत्पादन: खेती बाड़ी

इस आधुनिक युग मे हर चीजों में बदलाव हो रहा है। चाहे वह तकनीकी चीजें हों या अन्य कुछ भी। पहले किसान...

कामधेनु आयोग ने गाय के गोबर और मिट्टी से 33 करोड़ दीये बनाने का लिया संकल्प: आत्मनिर्भर भारत

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बहुत जल्द दिवाली का त्योहार आने वाला है। दिवाली का त्योहार भारत के प्रमुख त्योहारों...

समाज के रूढ़िवादिता को तोड़ बनीं आत्मनिर्भर, यह सुपर Mom आज चलाती हैं शहर की सबसे बड़ी डांस अकेडमी: Seema Prabhat

कहते हैं- "कोई भी देश यश के शिखर पर तब तक नहीं पहुंच सकता जब तक उसकी महिलाएं कंधे से कन्धा मिला...