एक सफल इंसान बनना हर किसी की चाहत होती है। लेकिन इसके लिए उसे जी-तोड़ मेहनत करना पड़ता है। सभी माता-पिता अपने बच्चों को सफल बनाने का हर मुमकिन प्रयास करते हैं। अगर पिता नहीं है तो मां भी अपने बच्चों के लालन-पालन में कोई कमी नहीं रखती। एक पिता भी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उनकी मदद करता है। आज की यह कहानी ऐसे बेटे की है जिसके पिता ने घर-घर दूध बेचने का कार्य कर अपने बेटे को पढ़ाया और बेटे ने PCS बन पिता का नाम रौशन किया।

आइये पढ़ते हैं, इस पिता और बेटे के सफलता के सफर की कहानी और जानते हैं इसे इन दोनों ने कैसे और कब तय किया। इन्हें कितने मुश्किलों का सामना करना पड़ा तब जाकर बेटे को यह ओहदा हासिल हुआ।

कहते हैं, अगर हम किसी काम को पूरी लगन और जज्बे से कर रहें हैं और लम्बी अवधि के बाद उस कार्य में सफलता हासिल हो तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। ऐसा ही हुआ विपिन के पिता के साथ जब उन्हें पता चला कि उनका बेटा यूपीपीसीएस में चौथी स्थान हासिल कर चुका है। इस वक्त उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह अपनी खुशी किसके साथ जाहिर करें। विपिन के पिता घर-घर घूमकर दूध बेचने का कार्य किया करते थे। उन्होंने अपने बेटे को एक सफल इंसान बनाने के लिए हर मुमकिन प्रयास किया

विपिन शिवहरे का परिचय

विपिन शिवहरे (Vipin Shivhare) उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के जालौन (Jalaun) में स्थित एक छोटे से गांव के निवासी हैं। इन्होंने यूपीपीसीएस मेन्स परिणाम 2018 में चौथा स्थान प्राप्त कर अपने गांव के साथ-साथ पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन  किया है। 2018 की इस रिजल्ट में यह टॉप फाइव के लिस्ट में शामिल है। इस लिस्ट में एक बिहार, दो हरियाणा के लड़के शामिल हैं इन लड़कों के साथ विपिन ने भी अपना नाम इस रिजल्ट में अंकित करा चुके हैं। कहते हैं ना कि अगर मन में कुछ करने की ठान लो तो उसे किसी भी तरह से पूरा किया जा सकता है। ऐसा ही विपिन के साथ भी हुआ। एक छोटे से गांव में रहने के बावजूद भी इन्होंने अपने सपने को उड़ान भरने का मौक़ा दिया।

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घर में छाया खुशी का माहौल

विपिन के इस सफलता की खुशी सबसे ज्यादा उनके पिता को हुई। उन्होंने बताया कि जब मेरे गांव के व्यक्ति अपने बच्चों को मोटरसाइकिल पर बैठाकर विद्यालय में लेकर जाया करते थे, तब मैं साइकिल पर दूध का कंटेनर लिए लोगों के घर में दूध बेचने जाया करता था। बहुत ही संघर्ष के बाद मैंने यह खुशी देखी है। मेरे घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी अच्छी नहीं थी और मुझे घर चलाने के लिए यह कार्य करना पड़ता था। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी और अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए हमेशा कोशिश किया। जब विपिन के घर वालों को पता चला कि वह UP PCS में चौथा स्थान प्राप्त कर चुके हैं तो इनके घर में खुशी का माहौल बन गया। दुपहर का समय था जब यह बात सबको पता चली। हालांकि विपिन कुछ नौकरी कर रहे थे लेकिन उनका यह सपना था कि वह एक अफसर बने और उस सपने को उन्होंने पूरा किया।

पिता ने किया संघर्ष

विपिन के पिता अपने बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए साइकिल पर बोरा बिछाकर उस पर बैठाते, फिर स्कूल ले जाया करते थे। जब छुट्टी हो जाती तो इनके दोनों बेटे शॉप के बाहर की खाली स्थान पर बैठ अपने पिता के आने का का इंतजार करते थे। विपिन के पिता दूध बेचने के बाद उन कन्टेनरों को साफ कर रखते और फिर अपने बच्चे को साइकिल में बिठाकर घर वापस लाया करते थे। इनके पिता ने बहुत ही संघर्ष कर अपने परिवार की जरूरतों को पूरा किया है। एक बात की खुशी थी कि विपिन की मां हमेशा अपने पति की मदद करती और उनका मनोबल बढ़ाती। विपिन के पिता ने विलाप भरे शब्दों में कहा मेरा सारा मेहनत सफल हुआ जब मेरा बेटा यह मुकाम हासिल कर लिया।

विपिन की स्कूलिंग

वीपिन ने अपनी आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए सरस्वती विद्या मंदिर (Sarsawati Vidhya Mandir) में नामांकन कराया और वहां से सम्पन्न की। वर्ष 2006 में विपिन ने 12वीं में फर्स्ट आकार आगे की पढ़ाई जारी रखी। वर्तमान में विपिन भोपाल (Bhopal) में SBI बैंक के “असिस्टेंट ऑडिटर ऑफिसर” (Assistent Audit Officer) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एक फोन कॉल के जरिए बताया कि वह अफसर बनना चाहते हैं लेकिन उनकी परेशानी यह थी कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह तैयारी नहीं कर पाते।

SBI में बनें कैशियर

विपिन एक सफल व्यक्ति बनना चाहते थे। इसके लिए वह हमेशा कोशिश में लगें रहें। वर्ष 2008 में विपिन ने Airforce का भी एग्जाम दिया था। वह क्वालीफाई तो हो गए लेकिन मेडिकल की परीक्षा में उनका सलेक्शन नहीं हुआ और वह बाहर निकल गयें। फिर वर्ष 2013 में SSC क्वालिफाइ कर SBI बैंक में Cashier के पद पर कार्यरत हुए। इनकी पहली पोस्टिंग मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक शहर पन्ना (Panna) में हुई। विपिन का प्रमोशन हुआ तो इन्हें भोपाल में Assistent Audit Officer का पद मिला। लेकिन इनका सपना अफसर बनना था। इन्होंने उसकी तैयारी शुरू की। इनके इस तैयारी में इनके एक दोस्त आलोक कुमार (Aalok Kumar) ने काफी मदद की। विपिन सेल्फ स्टडी से 5 घंटे पढ़ाई किया करते थे, वह भी नौकरी करने के पश्चात। विपिन की शादी हो चुकी है। इनकी बहन भी यूपीएससी की तैयारी में लगीं हैं।
 
The Logically विपिन शिवहरे को ढेर सारी शुभकामनाएं देते हुए उनकी सराहना करता है और यह उम्मीद भी करता है कि हमारे देश के युवा इनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेंगे।

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