Tuesday, May 24, 2022

इन दोस्तों ने नौकरी छोड़ शुरू की मोती की खेती, कमा रहे हैं तीन गुणा अधिक पैसा: तरीका सीखें

मिट्टी से सोना उपजाने वाले किसानों के बारे में हम बख़ूबी जानते हैं। किसान हमारे लिए अन्नदाता हैं, जिनके मेहनत का गुण गान हम शब्दों में नहीं व्यक्त कर सकते। विभिन्न प्रकार के अन्न के साथ हीं कई लोग तरह-तरह के फलों की खेती करते है तो कई अनेकों प्रकार के मसालों की। लेकिन आज हम आपको ऐसे किसान से रूबरू करवाएंगे जो मोती की खेती करते है।

आज के समय में बहुत अच्छी पढ़ाई करने के बावजूद भी युवाओं के लिए नौकरी पाना बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। लेकिन कहते हैं, हौसला बुलंद हो तो सफलता के मार्ग में कोई भी कमी बाधा नहीं बन सकती है। एक तरफ लोग पढ़ाई करने बाद आराम की नौकरी करना चाहते है तो दूसरी तरफ युवा वर्ग का भी रुझान खेती की तरफ बढ़ते जा रहा है। वैसे ही तीन युवा मित्र अपनी नौकरी छोड़ मोती की खेती कर रहे हैं।

वाराणसी (Varanasi) चिरईगांव ब्लॉक के चौबेपुर क्षेत्र के नारायनपुर (Narayanpur) के रहने वाले तीन युवा मित्र श्वेतांक पाठक (Shwetank Pathak), रोहित पाठक (Rohit Pathak) और मोहित पाठक (Mohit Pathak) अपनी नौकरी छोड़ गांव के लोगों को नए युग की खेती के गुर सिखा रहे हैं। तीनों मित्रो ने मिलकर गांव में ही एक छोटा तालाब बनाकर सीप से मोती निकालने की खेती कर रहे हैं। मोती की खेती के साथ ये युवा मधुमक्खी पालन और बकरी पालन भी कर रहें और अच्छा मुनाफा कमा रहें हैं।

नौकरी की अपेक्षा खेती से हो रहा 3 गुना ज्यादा मुनाफा

युवा किसानों के अनुसार मोती की खेती सामान्य खेती से थोड़ी अलग है। वे कृषि उद्यम की मदद से मोती की खेती कर रहे हैं। तीनों मित्रों में श्वेतांक ने एमए-बीएड किया है। इसके बावजूद भी इनकी रुचि मोती की खेती में आईं। मोती की खेती की जानकारी   श्वेतांक ने इंटरनेट और यूट्यूब की मदद से ली, साथ ही इसके लिए एक ट्रेनिंग भी कर चुके हैं। उन्हें मोती की खेती में 3 गुना ज्यादा मुनाफा हो रहा है।

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मोहित पाठक द्वारा मधुमक्खी और बकरी पालन

मोहित पाठक (Mohit Pathak) मधुमक्खी पालन करते हैं जो बीएचयू से बीए की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। मोहित मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिल्ली गांधी दर्शन से लिए। फिलहाल वह वाराणसी में मधुमक्खी पालन के साथ दूसरे किसानों को भी इसका ट्रेनिंग दे रहे हैं। मधुमक्खियों से निकले शहद को बेच कर अच्छा मुनाफा होता है, साथ ही मोहित बकरी पालन भी कर रहें।

नौकरी छोड़ अपनाए खेती

रोहित पाठक (Rohit Pathak) एक समिति कृषि उद्यम से पहले ख़ुद एक प्रतिनिधि के रूप में जुड़े थे। रोहित कोरोनाकाल में रीजनल हेड की नौकरी छोड़कर वाराणसी वापस आ गए। यहां आकर अपने मित्र मोहित और श्वेतांक के साथ मिलकर कृषि की नई प्रणाली विकसित कर रहे हैं। तीनों मित्र साथ मिलकर ख़ुद खेती करने के साथ साथ लोगों को भी खेती की नई तकनीक सिखा रहे हैं जो सराहनीय है।

मोती की खेती सीखने के लिए यह वीडियो देखें

तीनों युवा मित्रों का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से जब दुनिया के साथ हमलोग भी घरों में बैठे थे तब कुछ नया सीखने का अवसर मिला। ये लोग अपने खाली समय को  व्यर्थ नहीं जाने दिए, जिससे इनके साथ और भी किसानों को फायदा हो रहा है।

रोजगार का तरकीब ढूंढने के लिए The Logically तीनों मित्रों द्वारा किए गए कार्यों की प्रसंशा करता है और अपने पाठकों से समय का सदुपयोग करने की अपील करता है।