Thursday, February 2, 2023

क्लास में बच्चे नहीं आए पढ़ने तो प्रोफेसर ने अपनी सैलरी के लौटा दिए 23 लाख रूपए: मानवता की मिसाल

कभी-कभी हम कुछ ऐसा वाक्या सुनते हैं जिसे सुनकर उस पर तनिक भी विश्वास नहीं होता और ऐसा लगता है कि ही गई बात यूं हीं है, लेकिन जो बात सोलह आने सत्य है उसे कोई झुठला नहीं सकता।

अब अगर हम आपके साथ ये जिक्र करें कि क्या आप अपनी सैलरी लौटा सकते हैं तो जाहिर सी बात है आपका उत्तर ना होगा लेकिन प्रोफेसर ललन कुमार (Lalan Kumar) की बात हीं अनोखी है क्योंकि उन्हें अपने 23 लिख रूपये जो उन्हें सैलरी के रूप में मिल रही थी उसे लेने से इन्कार कर दिया। हर किसी को अपने सैलरी का बेसब्री से इंतजार रहता है इसलिए अगर सैलरी मिले तो उसे लौटाना क्या इसके बारे में हम सोंच भी नहीं सकते??

आज जहां एक ओर ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है जिन्हें लगता है कि उन्हें काम कम करना पड़े या फिर बिना किए ही उन्हें पूरी तनख्वाह मिल जाए। लेकिन दूसरी ओर एक वाकया ऐसा भी है जिसमें एक प्रोफेसर ने अपने ना पढ़ाने की अवधि की तनख्वाह को लेने से इनकार कर दिया वो भी 1-2 लाख रूपए नहीं बल्कि 23 लाख रुपए। आज हम उन्हीं प्रोफेसर की बात करेंगे और पूरे वाकये से रूबरू भी होंगे। उन्होंने अपनी 1 या 3 माह की सैलरी नहीं बल्कि 3 वर्ष की सैलरी लौटा दी है। आईए जानते हैं कि आखिर क्या वजह रही है कि उस प्रोफेसर ने अपनी 3 वर्ष की सैलरी लौटाने का निश्चय किया?

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प्रोफेसर ललन कुमार (Professor Lalan Kumar)

जानकारी के अनुसार यह किस्सा हमारे देश के बिहार (Bihar) राज्य के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) की है। मुजफ्फरपुर में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में नितिश्वर कॉलेज है। यहां के एक प्रोफेसर ने अपनी सैलरी लौटा दी है। वह प्रोफेसर हैं ललन कुमार (Professor Lalan Kumar)। जो यहां हिंदी के सहायक प्रोफेसर के पोस्ट पर कार्यरत हैं। वह बताते हैं कि मेरे क्लास में लगभग 3 वर्षों से कोई स्टूडेंट पढ़ने नहीं आया है इसीलिए मेरा यह मानना है कि जब मैंने मेहनत नहीं किया है तो फिर मैं पैसे क्यों लूं? उन्होंने अपने तबादला के लिए कुलपति को एक लेटर लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि उनका ट्रांसफर एमडीडीएम या आरडीएस कॉलेज में हो जाए तो अच्छा है। हालांकि उनके लिखे गए पत्र पर कोई जवाब नहीं मिला है।

6 बार कर चुकें है ट्रांसफर के लिए आवेदन

प्रोफेसर ललन कुमार (Lalan Kumar) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है, साथ ही उन्होंने जेएनयू से पीजी तथा दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी एवं एमफिल के भी उपाधि हासिल की है। उसके बाद वर्ष 2019 में उनकी नियुक्ति यहां मुजफ्फरपुर के कॉलेज में हुई। जब वह यहां आए तो उन्होंने देखा कि यहां पढ़ाई को लेकर बहुत ही ढिलाई होती है इसके लिए उन्होंने बहुत बार प्रशासन से अपनी बात जाहिर भी की। उन्होंने प्रशासन को यह बताया कि वह ऐसे कॉलेज में जाना चाहते हैं वहां बच्चों को पढ़ाया जाता हो। उन्होंने अपने ट्रांसफर के लिए लगभग 6 बार आवेदन किया है परंतु इसकी कोई सुनवाई नहीं की गई है।

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किया गया आवेदन अस्वीकार

डॉक्टर आरके ठाकुर जोकि यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार हैं वह बताते हैं कि जब 4 जुलाई को प्रोफेसर ललन कुमार हमारे ऑफिस आए और उन्होंने यहां आकर एक लेटर दिया जिसे अस्वीकार किया गया। उनका कहना है कि अगर हम पीजी क्लास में किसी टीचर का ट्रांसफर कर रहे हैं तो वहां ऐसे प्रोफेसर की जरूरत होती है जो अनुभवी है। इसीलिए मेरा यह मानना है कि प्रोफेसर ललन कुमार जहां पर है वहीं पर अपने बच्चों को मोटिवेट करें ताकि वह वहां पढ़ने आए जिस कारण उन्हें कहीं और जाने की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।