Thursday, August 18, 2022

Radhika Gupta : कभी हार मानकर करने वाली थी आत्महत्या, आज भारत के सबसे युवा CEOs में शुमार हैं

हमारे समाज में ऐसे अनेकों लोग हैं जो किसी को आगे न बढ़ने के लिए प्रेरित न करके उसका मजाक उड़ाते हैं या यूं कहें कि अपने मनोरंजन के लिए दूसरों का मजाक उड़ाना उनकी आदत है। लोगों द्वारा उड़ाई गई खिल्ली किसी की जिंदगी खराब कर देता है वहीं किसी की जिंदगी में उजाला भर देता है।

आज की हमारी यह कहानी भी एक ऐसी ही महिला की है, जिन्होंने खुद के लिए लोगों की हंसी को अनदेखा करके आगे बढ़ने का फैसला किया और आज उसकी सबसे युवा CEO में गिनती होती है।

सबसे युवा CEO राधिका गुप्ता

दरअसल हम बात कर रहे हैं राधिका गुप्ता (Radhika Gupta) की, जो एडलवाइज ग्लोबल ऐसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (Edelweiss Global Asset Management Limited) की सीईओ (CEO) हैं। उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए उसके बावजूद भी उन्होंने सबसे युवा CEO के लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। क्योंकि हर किसी को सफलता आसानी से नहीं मिलती है, बहुतों को उसके लिए कठिन परिस्थितयों का सामना करना पड़ता है। राधिका गुप्ता भी उन्हीं लोगों में से एक हैं।

अपने जीवन के संघर्ष इंस्टाग्राम पर किया साझा

39 वर्षीय राधिका ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी में आए चुनौतियों का सामना करते हुए CEO बनने तक के सफर को लोगों के सामने रखा है। वह कहती हैं कि, गर्दन टेढ़ी होने की वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

अलग-अलग देशों में पूरी हुई शिक्षा

राधिका गुप्ता ने Humans of Bombay के साथ भी अपने जीवन की कहानी शेयर की है। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि, पिता राजनयिक थे जिसके वजह से उनकी शिक्षा स्थायी नहीं थी। वे अलग-अलग देशों में अपनी पढ़ाई पूरी की जैसे वह भारत, पाकिस्तान, अमेरिका और नाइजीरिया आदि।

दोस्तों ने उड़ाया मजाक

चूंकि, भारतीय होने के नाते उनका बोलने का ढंग इंडियन था और उनकी गर्दन भी टेढ़ी थी। इसलिए जब वे नाइजीरिया में पढ़ रही थीं उस दौरान उनके दोस्त इन कारणों के उनका काफी मजाक उड़ाते थे। इतना ही नहीं बल्कि दोस्तों ने उन्हें अप्पू नाम भी दे दिया था, जो सिम्पसन के एक चरित्र का नाम है। Radhika Gupta CEO of Edelweiss Asset Management Limited Company.

लोगों की बातें सुनकर टूटा आत्मविश्वास

हमारे समाज में एक-दूसरे की तुलना करना आम बात है। राधिका भी समाज की इस बुराई से अछुता नहीं रहीं। वह कहती हैं कि, जिस विद्यालय में वह पढ़ती थीं उसी स्कूल में उनकी मां भी शिक्षक थी और वह काफी तेजस्वी महिला भी हैं। ऐसे में वहां के लोग राधिका की तुलना उनकी मां से यह कहकर करते थे कि वह अपनी माँ के सामने बेहद खराब दिखाई देती हैं। लोगों की इन बातों से राधिका अंदर तक टूट जाती थीं। हालांकि, ऐसी परिस्थिति में आत्मविश्वास का टूटना लाजमी है।

यह भी पढ़ें :- 4 हाथ और 4 पैर वाली चहुंमुखी, सोनू सूद ने ऑपरेशन करवाकर दी नई जिंदगी

करना चाहती थीं सुसाइड

राधिका आगे कहती हैं कि, उन्होंने कई जॉब इंटरव्यूज दिए जिनमें वह असफल रहीं। उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में 7 वें जॉब इंटरव्यू दिया और इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी, ऐसे में वे पूरी तरह टूट गई। जैसा की आप जानते हैं जब इन्सान को सफलता नहीं मिलती और वह हारने लगता है तो वह गलत कदम उठाने के बारें में सोचता है। राधिका के साथ भी ऐसा ही हुआ, जॉब इंटरव्यू में असफल होने के बाद उनके मन में भी सुसाइड करने का विचार आया। इस बारें में वह बताती हैं कि वह खिड़की से बस कूदने ही वाली थीं कि उनके दोस्तों ने उन्हें बचा लिया और एक मनोचिकित्सक के पास लेकर गए।

मैकेंजी में करने लगी नौकरी

राधिका डिप्रेशन में चली गई थी परिणामस्वरुप वहां उनका डिप्रेशन का इलाज हुआ। उन्हें एक जॉब इंटरव्यू के लिए जाना था, इस बात को जब डॉक्टर से बताया गया तब जाकर उन्हें मनोचिकित्सक वार्ड से छुट्टी मिली। शायद, इस बार उनकी किस्मत उनके साथ थी। इस जॉब इंटरव्यू में उन्हें सफलता मिली और मैकेंजी में उन्हें जॉब ऑफ़र हुआ।

यह भी पढ़ें :- कभी करना पड़ा था गरीबी का सामना, आज आंवले की खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं : अमर सिंह

शुरु किया एसेट मैनेजमेंट फर्म

राधिका अपने जीवन में आए इस पड़ाव के 3 वर्ष बाद कुछ अलग और नया करने का सोचा और इसी सोच के साथ वे 25 वर्ष की उम्र में अपने देश भारत वापस आ गईं। यहां आकर उन्होंने बिजनेस करने का फैसला किया और इसके लिए वह अपने पति और मित्र के साथ मिलकर एक “एसेट मैनेजमेंट फर्म” कम्पनी की नींव डाली जिसे आगे चलकर एडलवाइस एमएफ (Edelweiss MF) ने अधिकृत कर लिया। Radhika Gupta CEO of Edelweiss Asset Management Limited Company.

Radhika Gupta CEO of Edelweiss Asset Management Limited Company

33 साल की उम्र में बनीं CEO

राधिका ने बताया कि, अब वह सफलता की मार्ग पर आगे बढ़ रही थी और नए अवसरों की तलाश में थी। तभी उन्हें पता चला कि एडलवाइज (Edelweiss) को नए CEO की तलाश है। इसके बारें में जानकारी मिलते ही उनके पति ने इसके लिए उन्हें प्रेरित। उसके बाद उन्होंने CEO के पोस्ट के लिए अप्लाई कर दिया और 6 माह बाद एडलवाइज ने राधिका को CEO के पोस्ट पर बैठाया। इस प्रकार राधिका ने महज 33 वर्ष की उम्र में सबसे युवा CEO बनीं।

प्रेरणा

राधिका (Radhika Gupta) ने अपनी सफलता से सभी के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने साबित कर दिखाया है कि, जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आए इन्सान को हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। उनकी इस जीवनी से यह सीख भी मिलती है कि, निराशा हाथ लगने पर कभी भी गलत कदम नहीं उठाना चाहिए बल्कि हमेशा आगे बढ़ना चाहिए।