Sunday, June 26, 2022

अमेरिका में अच्छी कमाई को छोड़कर लौटे स्वदेश, ऑर्गेनिक खेती के साथ शुरू किया गुङ बनाने का काम

जब भी कोई शख्स नौकरी के लिए अपने देश को छोड़कर किसी अन्य देश जाता है तो उसके बाद बहुत हीं कम देखने को मिलता है कि वह शख्स फिर से अपने देश लौटना चाहता हो। अगर लौट भी जाता है तो खेती करना उनके वश की बात नहीं होती।

दरअसल,अमेरिका में अपनी अच्छी-खासी नौकरी को छोड़कर पंजाब के एक इंसान ने अब खुद को पूरी तरह से अपने खेतों की मिट्टी के लिए समर्पित कर दिया है। ये कहानी पंजाब के मोगा में रहने वाले रजविंदर सिंह धालीवाल की है जो एक वक्त अमेरिका में एक ट्रांसपोर्ट कंपनी का ट्रक चलाया करते थे। लेकिन अब वे अपने गांव लोहारा की जमीन में फार्म बनाकर ऑर्गेनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। रजविंदर सिंह धालीवाल का सफर कब और कैसे शुरू हुआ? आईए जानते हैं…

दरअसल, जब राजविंदर सिंह से पूछा गया कि आप अमेरिका क्यों गए थे? फिर इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनके परिवार के अधिकतर लोग विदेश में हैं। ननिहाल के लोग कनाडा में बसे हुए हैं, वहीं दादा पक्ष के लोग अमेरिका में रहते हैं। छोटी उम्र से ही उनकी नन्हीं आंखों ने विदेश जाने का सपना देखा और अंतत: 32 साल की उम्र में वो अपनी मां की मदद से अमेरिका जाने में सफल भी रहे।

Rajvinder Does Sugarcane Organic Farming

अमेरिका जाकर रजविंदर ने सभी प्रकार की छोटी-बड़ी नौकरी किए। उन्होंने अमेरिका की सड़कों पर ट्रक चलाया और वहां के होटलों में भी काम किया है। इसके बाद रजविंदर भावुक होकर बताते हैं कि महज एक साल में ही उनका मन अमेरिका से भर गया था। उनके लिए सबसे हैरानी की बात थी कि जिस अमेरिका का सपना उन्होंने बचपन से देखा था वो हकीकत में अलग था। जब उन्होंने वहां भारतीय संस्कारों को मरते हुए देखा तो मन ही मन तय कर लिया था कि वो जल्द से जल्द अपने वतन वापस लौट जाएंगे। हालांकि, यह आसान नहीं था।क्योंकि रजविंदर के परिवार वाले उनके इस फैसले के खिलाफ थे।

अंततः रजविंदर को भारत लौटते-लौटते चार साल लग गए। जिसके बाद 2012 में वो अमेरिका छोड़ भारत लौटने में सफल हुए। भारत लौटने के बाद रजविंदर ने पंजाब के बठिंडा शहर में फलों का काम शुरू किया और जल्द ही अपनी कड़ी मेहनत के दम पर छोटी ही सही लेकिन खुद की एक कंपनी खड़ा कर लिए और इसमें सफल भी रहे। एक तरह से रजविंदर का जीवन पटरी पर था लेकिन उनके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। मानसिक रूप से हैरान भी रहा करते थे।

यह भी पढ़ें:-68 वर्षीय इस महिला ने पूरे गांव को बनाया आत्मनिर्भर, अपनी खेती और कमाई से लोगों को कर रहे प्रेरित

दरअसल, वे खुद को अपने गांव की मिट्टी के लिए समर्पित करना चाहते थे। साथ हीं अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी कंपनी बेच दी और ‘लोहारा’ पहुंच गए। आगे रजविंदर का कहना है कि वो साल 2017 था, जब उन्होंने अपनी 6 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की थी। तब से लेकर आज तक उन्होंने अपने खेतों में प्राकृतिक खाद का ही प्रयोग किया है। उनके लिए खेती हीं उपार्जन का स्रोत बन गया है।

रजविंदर सिंह मुख्य रूप से अपने खेतों में गन्ना उगाते हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने अपने खेतों के किनारे-किनारे हजारों की संख्या में फलदार पेड़ भी लगाए लिए हैं। कुछ और भी है जो रजविंदर को दूसरे किसानों से अलग बनाता है। ज्यादातर किसान जो गन्ने की खेती करते हैं वे इसे बाद में बेच देते हैं लेकिन राजविंदर सिंह की खास बात यह है कि रजविंदर अपने गन्नों को बेचते नहीं हैं, बल्कि खुद ही गन्ने से बनने वाले मीठे पाउडर से गुड़ बनाते हैं।

Jaggery

बाजार में उनके गुड़ की अच्छी खासी मांग है। उनका साधारण गुड़ 100 रुपए प्रति किलो तक बिक जाता है। वहीं उनके मसाला गुड़ का दाम 350 रुपए प्रति किलो तक जाता है। पैदावार की बात करें रजविंदर सालाना 10 टन तक गुड़ का उत्पादन कर लेते हैं। जिससे सालभर में वो 11-12 लाख रुपए का टर्नओवर कर लेते हैं।

यह भी पढ़ें:-खुद से बीज तैयार करके कर रहे हैं प्याज की उन्नत खेती, अन्य किसानों की भी कर रहे हैं मदद

राजविंदर सिंह ने बताया कि सब ठीक चल रहा है। बस अपने इस सफर में वो अपने परिवार को मिस करते हैं।उन्हें अमेरिका से लौटे इतने साल हो गए लेकिन परिवार की नाराजगी दूर नहीं हुई। परिजनों को आज भी लगता है कि उन्होंने अमेरिका लौटकर अच्छा नहीं किया। शायद यही कारण है कि उन्हें खेती को लेकर अपने परिवार से किसी तरह का कभी कोई सपोर्ट नहीं मिलता। अपने पूरे ‘लोहारा फार्म’ का काम वो अकेले ही देखते हैं।

राजविंदर सिंह की ये सफलता दर्शाती है कि ये बहुत हीं मेहनती हैं और इससे दुनिया को ये सीख भी मिलती है कि इंसान गांव में रहकर भी बहुत कुछ कर सकता है।