Wednesday, August 4, 2021

अपने प्रयासों से इस जलयोद्धा ने 450 नदियों को पुनर्जीवित किया है जिससे 1200 गांव को फायदा मिल रहा है

हर इंसान दूसरों के लिए कुछ न कुछ अवश्य करना चाहता है, जिनमें अक्सर लोगों का अपना स्वार्थ छिपा होता है। बहुत लोग अपने लिए जीते है और बहुत समाज के कल्याण के लिए, कुछ लोग अपना जीवन पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित कर देते है तो वहीं कुछ जल संरक्षण के लिए। एक ऐसे ही जल योद्धा है रमनकांत त्यागी जिनका जीवन नदियों और तालाबों के संरक्षण के लिए ही समर्पित है।

उत्तरप्रदेश (Utterpradesh) के मेरठ (Meerut) जनपद के पूठी गांव रहने वाले रमनकांत त्यागी (Ramankant Tyagi ) अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरठ (Meerut) में ही नौकरी करने लगे, लेकिन उससे वह संतुष्ट नहीं थे। उन्हें समाज हित के लिए कुछ अलग कुछ बड़ा करना था। मेरठ में काम के दौरान साल 2001 में रमनकांत की मुलाकात अनिल राणा से हुई जो एक समाज सेवक थे। अनिल राणा अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़कर सामाजिक कार्यों में संलग्न थे। वह मेरठ में ही जल संरक्षण का कार्य करते थे।

रमनकांत त्यागी (Ramankant Tyagi ) को अनिल (Anil) जी से मुलाकात के बाद मानो एक नया रास्ता मिल गया, जिसकी उन्हें पहले से तलाश थी। दोनों ने एक साथ मिलकर बिना किसी स्वार्थ के काम करने का फैसला लिया। रमनकांत अपनी नौकरी छोड़कर अनिल राणा के साथ काम करने लगे। धीरे-धीरे उनकी भी जल संरक्षण में रुचि बढ़ती गई। अनिल राणा के ऑफिस में रमनकांत ने पानी के स्रोत नदी-तालाब, वर्षा जल संचयन आदि के ऊपर रखे सारे किताबें पढ़े जिससे उन्हें जल संरक्षण के बारे में काफी जानकारी हासिल हुईं। आगे वे उत्तरप्रदेश (Uttarpradesh) के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों में भ्रमण किए और यात्रा के दौरान हिंडन नदी (Hindon River) की सरहनपुर से लेकर गौतमबुद्ध नगर तक का नक्शा तैयार किए।

रमनकांत त्यागी के अनुसार उनके द्वारा बनाया गया नक्शा सरकार भी इस्तेमाल कर रही है। आगे वे बहुत सारे तालाबों के संरक्षण पर काम किए। रमनकांत अनिल राणा को अपना गुरु मानने लगे थे। साल 2008 में दिल का दौरा पड़ने से अनिल राणा का देहांत हो गया जो बहुत ही दुखद था। आगे रमनकांत ने अनिल के दिखाए रास्ते पर जल संरक्षण का कार्य जारी रखे। उन्होंने यह निर्णय लिया कि अपने गुरु के कार्य को पूरे देश में विकसित करना है।

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हजारों नदियों और तालाबों को किए पुनर्जीवित

रमनकांत ने अपने भाई के साथ मिलकर ‘नेचुरल एनवायरनमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च (नीर) फाउंडेशन’ (Neer Foundation) की नींव रखी और जल संरक्षण के कार्य को आगे बढ़ाया। जल संरक्षण के कार्य से उन्हें साल 2009 में इस्तांबुल के ‘वाटर फोरम’ आयोजन में जाने का मौका मिला। उस आयोजन में उनकी मुलाकात अनेकों जल संरक्षकों से हुई, जिससे उन्हें काफी प्रोत्साहन भी मिला। पिछले 10 साल में रमनकांत अपने फाउंडेशन के जरिए उत्तरप्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश के हजारों गांवों में जल संरक्षण के कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिए।

रमनकांत मुजफ्फरनगर के काली नदी (Kaali River) को पुनर्जीवित करने का कार्य शुरू किए। काली नदी उद्गम मुज्जफरनगर के अंतवाडा गांव से है और वहां से यह नदी हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, फर्रुखाबाद से होते हुए कन्नौज की गंगा में जाकर मिलती है। जिसकी लंबाई 598 किलोमीटर है। यह नदी कभी 1200 गांवों के लिए जल का स्त्रोत हुआ करती थी जो बिल्कुल सुख गईं है। इस नदी को पुनर्जीवित करने के साथ उन्होंने वहां बसे लोगों में जागरुकता फैलाया कि इसकी सफाई सबकी जिम्मेदारी है। लंबे समय तक कार्य चलने के पश्चात 20 नवंबर 2019 को उद्गम नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य संपन्न हुआ।

जल संरक्षण के कार्य को लेकर रमन काफी सजग है, वे पांच स्तर पर काम करते है –

  1. जन-जागरूकता,  2. तालाब-पुनर्जीवन,  3. पौधारोपण,  4. रसायन-मुक्त कृषि, और 5. कचरा प्रबंधन

काली नदी (Kaali River) के साथ रमनकांत हिंडन नदी को 15 किमी तक पुनर्जीवित करने का भी काम किए, साथ हीं 450 तालाबों को पुनर्जीवित किए। मुजफ्फरनगर के डबल और मोरकुका गांव के 400 परिवारों को साफ पानी मुहैया करवाए। नीर फाउंडेशन (Neer Foundation) ने 10 गांवों के लिए ओवर हेड वॉटर टैंक और बागपत के 4 गांवों में सोलर टैंक बनवाए। साथ ही पश्चिमी यूपी के लगभग 80% इलाकों को वर्षा जल संचय की तकनीक सिखाए और बुलंदशहर से निकलने वाली नीव नदी के संरक्षण के कार्य में लगे हुए हैं।

किसानों की मदद किए

रमनकांत जल संरक्षण के कार्य के साथ किसानों की भी मदद किए। ग्रामीण इलाकों में 50 गांवों में एल. आर कम्पोस्टिंग यूनिट भी लगवाए जो काफी शोध के बाद खुद ही तैयार किए। इस यूनिट में गन्ने के छिलकों को डाल कर उर्वरक बनाया जा सकता है। उस इलाके में गन्ने की बहुमात्रा में खेती की जाती है। कम्पोस्टिंग यूनिट की सफलता के बाद रमनकांत ने जीरो वेस्ट जैगरी यूनिट बनने का कार्य शुरू किए। गन्ना का उत्पादन ज्यादा मात्रा में होने के कारण उत्तरप्रदेश में गुड़ बनने वाले कोल्हू भी अधिक मात्रा में है। लेकिन उस कोल्हू के उपयोग से बहुत सारे कचरे निकलते है जिसके निदान के लिए पुराने कोल्हुओं को जोड़कर एक जीरो वेस्ट यूनिट का मॉडल तैयार किए। इससे किसानों को काफी मदद मिली।

मिले कई सम्मान

रमनकांत त्यागी को शुरुआत में आर्थिक मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। आगे उन्हें कई संगठनों का समर्थन भी मिला। वह अपने कई प्रोजेक्ट को किसी न किसी साथी संगठन जैसे वाटर कलेक्टिव, इंटरनेशनल वाटर एसोसिएशन, फिक्की, वेटरकीप अलायन्स, यूनाइटेड नेशन जैसे अनेकों बड़े नाम शामिल है। उन्हें कई जगह से सम्मान भी मिल चुका है, 3 बार वर्ल्ड वाटर चैंपियन के ख़िताब भी मिले हैं।

यदि आप जल योद्धा रमनकांत त्यागी से संपर्क करना चाहते हैं तो दिए गए नंबर 9411676951 या ईमेल आईडी [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं।

The Logically रमनकांत द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करता है जो पूरे देश के लिए एक मिसाल है और अपने पाठकों से जलसंरक्षण की अपील करता है।