Tuesday, September 28, 2021

जोधपुर के किसान ने देशी तरकीब से बनाई बीज़ जिससे 3-4 फ़ीट का हो रहा है बाजरा: हो रहा है दुगना फायदा

मैंने अक्सर अपने घर में दादाजी से ‘बाजरे’ (Black Millet or Pearl Millet) के बारे में सुना है। पहले बाजरे की खेती बड़े पैमाने पर की जाती थी। दादाजी मुझे बताते कि बाजरे की रोटी हमारे स्वास्थ्य के लिए कितनी फायदेमंद है। उन्हें बाजरे की रोटी चटनी के साथ बहुत ही पसंद थी। राजस्थान के पारंपरिक व्यंजनों में से भी एक है।

शायद आपको भी अपने बुजुर्गों से इसके फायदे के बारे में जानकारी मिली होगी। लेकिन जैसे-जैसे पीढ़ी बदलती गई वैसे-वैसे नई तकनीकों का उपयोग शुरू हो गया और बाजरे की खेती कम होने लगी। बाजरे से हमें बहुत ही लाभ मिलता है। बाजरा प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, फास्फोरस, फाइबर और आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। साथ ही यह हमारे कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखता है, एनर्जी देता है, पाचन तंत्र सही रखता है और डायबिटीज के मरीजों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन आज के समय में बाजरे की खेती लुप्त होत नजर आ रही है।

जोधपुर के एक किसान हैं। नाम रामपाल सोलंकी (Rampal Solanki) है। ये बाजरे की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। रामपाल बाजरे की ऐसी अनूठी खेती कर रहे हैं कि इसे देखने के लिए कई व्यक्ति उनके खेत में आते हैं।

Rampal Solanki

रामपाल सोलंकी

रामपाल सोलंकी (Rampal Solanki) जोधपुर (Jodhpur) के सोयला (Soyla) गांव के निवासी है। इनका खेत लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है। यह अपने खेत में बाजरे का उत्पादन करते हैं। जिसे देखने के लिए हर रोज कई व्यक्ति आते हैं। यह अपने खेत में देसी बाजरे की बुआई नए तरीके से करते हैं।

3-4 फीट होते हैं लम्बे सिट्टे

इनके खेत की खासियत यह है कि फसल पर जो सिट्टे आते हैं वह लगभग 3-4 फीट फीट लंबे होते हैं। अगर बाजार में इसके सिट्टे को देखा जाय तो वह ज्यादा से ज्यादा 1 फीट लंबा होता है। इनके खेत में ऐसी उपज देख सभी अचम्भित हैं। लोग सोच में पड़ जाते हैं कि रामपाल किस तरह खेती कर रहें हैं जो इतने लम्बे सिट्टे आते हैं।

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होता है अधिक लाभ

रामपाल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन्होंने देसी बाजरे को नई तकनीक के साथ लगाया फिर जो फसल तैयार हुई, उससे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। इसके सिट्टे की लंबाई लगभग 3 से 4 फिट दिखी। ऐसे तो अन्य पौधे के पेड़ की लंबाई 5-7 फीट होती है लेकिन यह 11 से 13 फीट लंबा है। जाहिर सी बात है कि अगर पौधे बड़े हैं तो सिट्टे भी बड़े होंगे और जब ऐसा होगा तो हमें लाभ भी अधिक मात्रा में मिलेगा।

1 बीघा में 15 क्विंटल तक होती है उपज

इन्होंने कुछ वर्ष पूर्व 5 सौ ग्राम बीज विदेश से ट्राई करने के लिए मंगवाया था जो कि सफल हुआ। सफलता को देख इन्होंने लगभग 3 बीघा से अधिक खेत में इस बीज की बुवाई की। तब जाकर इन्हीं फसलों में 4 फीट तक सिट्टे तैयार हुये। इन्होंने बताया कि प्रति एकड़ में लगभग 15 से 20 क्विंटल का उत्पादन हो रहा है। इस खेती से इन्हें बहुत ही फायदा है। एक तो अधिक उपज भी होती है और सिट्टे की लंबाई अधिक होने के कारण इसे मवेशियों के चारे के लिए भी उपयोग किया जा रहा है।

जो खेती धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है उसे बढ़ावा देने के लिए The Logically Rampal Solanki की प्रशंसा करता है।