Wednesday, October 21, 2020

ख़ुद बनाते हैं खाद और 20 वर्षों से बंजर पड़ी जमीन पर उगाते हैं अनेकों सब्जियां: तरीका सीखने योग्य है

कर भला तो हो भला” यह एक कहावत है; इसका मतलब है, आप किसी के लिए अच्छा करोगे तो अच्छा पाओगे भी। अगर हम किसी गरीब को खाना खिलाएं, जरूरतमंदों की किसी भी प्रकार से मदद करें तो उसकी दुआ कभी ना कभी हमारे काम जरूर आयेगी। ऐसे ही अगर हम पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए पेड़ पौधें लगायें, या फलों का पेड़ अपने लिए लगायें तो यह हमें छाव भी देगा, फल भी देगा और आने वाली पीढ़ी को भी इसका लाभ मिलेगा।

हमारे देश में लोग सब्जियों और फलों की खेती भी इसलिए करतें हैं ताकि वह खुद ताजी सब्जियों का सेवन कर स्वस्थ्य रहें। आज की यह कहानी केरल (Kerala) के तिरुवल्ला (Tiruvalla) के निवासी Rennie Oommen की है।

Rennie Oommen का परिचय

अपने बचपन के दिनों से रेनिम अपने पिता को बस्ती क्षेत्र में एक छोटे से हिस्से में खेती करते देखतें जहाँ यह रहते थे। इसलिए यह भी कम उम्र में फूल और सब्जियां उगाने की आदत को विकसित कियें। रेनी ओमन को बागवानी बहुत पसंद है और कीटनाशक मुक्त भोजन भी। इसलिए यह खुद का भोजन उगाना शुरू कियें जो एक में सम्मिलित हुए दो अद्भुत शौक का संगम है।

उगातें हैं कई अन्य सब्जियों को

इन्होंने बताया कि फसल बुवाई के बीज सहित सरल चीजों को करने में असीम आनंद देता है और रोपाई देखने के लिए भी, फिर मिट्टी से निकल कर एक फलदार पौधा बन जाता है और अंत में फसल को काट लिया जाता है, जो रेनी ओमन को बहुत ही भाता है। यह प्याज, आलू और टमाटर को छोड़कर अपने दैनिक उपयोग के लिए आवश्यक लगभग सभी सब्जियों की खेती करते हैं। यह अपने दैनिक खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली सभी प्रकार की सब्जियां उगाते हैं जैसे सांप मटर, यम, बैंगनी यम, हरी मिर्च, गोभी, फूलगोभी, करेला, साँप लौकी, ड्रमस्टिक, कटहल, ककड़ी, पपीता, बिलंबी, पालक, अमरूद, नारियल और रामबूटान आदि।


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खुद करते हैं जैविक खाद का निर्माण

पानी और धूप की उचित मात्रा के साथ संयुक्त समृद्ध और स्वस्थ मिट्टी अच्छे उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उचित जुताई से फसल की गुणवत्ता और प्रदर्शन में काफी सुधार होता है। यह चावल के पानी और नीम के बीज के पाउडर का उपयोग कर प्राकृतिक कीट नियंत्रण विधियों का उपयोग कर उर्वरक बनातें हैं और हरे पेड़ को सुरक्षा देतें है।

20 वर्षों से बंजर पड़ी जमीन पर उगाई फसलें

यह बतातें है कि मेरे जैसे व्यक्ति के लिए नौकरी करना उसमे व्यस्त रहने के साथ किचन गार्डन के प्रबंधन के बारे में सोचना चुनौतीपूर्ण और आशंकित होने का मिश्रित भाव था। इस महामारी ने मुझे अपनी जड़ता से बाहर निकाल दिया है। यह अपने घर से सटे बंजर भूमि का एक छोटा सा टुकड़ा चुने, जिसका उपयोग पिछले 20 वर्षों से नहीं किया गया था। यह निश्चित रूप से इनके लिए एक चुनौती थी क्योंकि जलवायु परिस्थितियों में भी भिन्नता थी। शुरू में परिवार के सदस्य इनके कार्य और मकसद को लेकर सशंकित थे, लेकिन बाद में मेरी पत्नी और बच्चों ने भी मेरी मदद की।

लॉकडाउन के दौरान दिया ज्यादा वक्त

लॉकडाउन अवधि के दौरान खेती में चुनौतियां और उसे पूरा करने की खुशियाँ थीं। इनकी पत्नी गीशा (Gisha) और बच्चे बेटी नेहा (Neha) बेटा नील (Nil) मेरे भतीजे जिबीन (Jibin) और जेनसन (Jenson) के पास माँ की प्रकृति के साथ काम करने, पौधों को पानी देने और फसल काटने के पर्याप्त अवसर को पूरा कियें। यह पूरे परिवार के लिए हमारे श्रम के फल का आनंद लेने के लिए एक महान समय था।

खेती करना जीवन में धैर्य की एक पाठशाला है। हमारी धरती माता के मदद से ही हम खेतों में फसलों को लहलहाते देखतें हैं। The Logically Rennie Oommen को खेती करने और इनकी मदद के लिए जो परिवार ने किया, इसके लिए इन सभी को सलाम करता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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