Sunday, November 29, 2020

शून्य से शुरू कर आज 2.5 लाख तक सलाना कमा रही हैं, मशरूम की खेती से पहाड़ों से पलायन रोक रही हैं रौशनी

अगर आपको अपने सपने को साकार करना है तो उसके लिए दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास को कायम रखना पड़ेगा अपने सपने को साकार करने में उत्तराखंड की एक लड़की ने मिसाल कायम किया। उन्होंने अपने सपने को साकार कर वहां के व्यक्तियों का पलायन रोक दिया है। वैसे तो उन्होंने अपना कार्य शून्य से शुरू किया लेकिन आज वह लाखों की कमाई कर रही हैं। वह सिर्फ पैसा हीं नहीं कमा रहीं बल्कि वहां के महिलाओं और युवाओं को भी अपनी खेती से जोड़कर उन्हें रोजगार दिया है।

रुद्रप्रयाग जिले की रोशनी

रोशनी (Roshani) रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) जिले के एक गांव कविल्ठा से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने मशरूम फार्मिंग के जरिेए बहुत से व्यक्तियों को रोजगार दिया है। उन्होंने यह जानकारी दिया कि उनके गांव में सब ठीक चल रहा था लेकिन केदारनाथ त्रासदी के कारण बहुत कठिनाइयां हुई जिससे सब कुछ परिवर्तित हो गया। चंद पैसों के लिए उनके यहां से सभी पलायन करने लगे। उन्होंने यह मन बनाया कि वह कुछ ऐसा करेंगी जिससे लोगों को रोजगार मिले और जिससे वह कहीं और जाने को मजबूर ना हो पाएं। इसी बातों के दौरान उनके यहां कुछ ऐसे NGO के लोग पहुंचे जिन्होंने मशरूम की खेती के विषय मे जानकारी दिया। रोशनी ने उनसे प्रशिक्षण लिया और मशरूम की खेती शुरू करने के लिए सोंचा। लेकिन समस्या यह थी कि उसके लिए पैसे कहां से आए। शुरुआत में लगभग 30 हजार की जरूरत रही जो कि उनके पास नहीं था। उन्होंने अपनी बचत से पैसे निकाले और कुछ कर्ज लिया लेकिन फिर भी पैसे कम पड़े। फिर उन्होंने मां जी से जबदस्ती कर 3 हजार रुपये मांगे।

Roshani

कमरे में शुरू की खेती

किसी तरह जुगाड़ किए गए पैसों की मदद से रोशनी ने अपने घर के कमरे में हीं लगभग मशरूम के 10 बैग को लगाया। उन्होंने 10 बैग से खेती की शुरुआत तो की लेकिन मन में थोड़ा डर भी था। लगभग 25 दिनों के बाद पौधे बाहर नहीं निकले तब लोगों ने उन्हें ताना मारना शुरू कर दिया। लोगों के तानें से उनका मन बहुत हताश हुआ। जब एक महीना बीत गया तो स्थिति इस कदर बदल चुकी थी कुछ बताया नहीं जा सकता। सुबह का वक्त था जब रोशनी अपने कमरे से बाहर निकलकर मशरूम के कमरे को खोला तो उसमें उन्होंने जो देखा उससे उन्हें बहुत खुशी हुई। उनके मशरूम खिले थे। उन्हें अपने उस मशरूम की खेती से 2 किलो मशरूम का लाभ मिला। जो लोग उन्हें ताने मार रहे थे उन लोगों ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा तुम और तरक्की करो।

यह भी पढ़े :- पिछले 10 वर्षों बिहार के अनेकों क्षेत्रों में मशरूम की खेती कर रही हैं, 40 लोगों को दे चुकी हैं रोजगार

खुद स्टॉल लगाकर बेचा मशरूम

मशरूम तो निकलने लगे लेकिन उससे एक सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उनके मशरूम को लोकल मार्केट वाले लोग खरीदने के लिए तैयार नहीं थे। उसके बाद रोशनी बिना देर किए रुद्रप्रयाग की ओर रूख किया। उन्होंने निश्चय किया कि रुद्रप्रयाग में जाकर मैं खुद स्टॉल लगाकर उन्हें बेचुंगी।

mushroom farming

90 किलो उगाती हैं मशरूम

इस दौरान उन्हें बहुत सारी कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा क्योंकि ज्यादातर मशरूम खराब हुए। लेकिन जब लोग मशरूम खरीदने लगे तो उन्हें खुशी हुई और लोगों का अच्छा रिस्पांस मिला जिसकी वजह से उन्होंने मशरूम पैकिंग करके बेचना शुरू कर दिया। वर्तमान में वह 90 किलो का मशरूम उत्पादन कर रही हैं। उन्होंने अपने तीन कमरे में मशरूम की खेती शुरू कर दी है। एक कमरे में लगभग डेढ़ सौ से अधिक मशरूम के बैग रखे जा रहे हैं। वैसे तो रोशनी अभी मशरूम में सिर्फ गुलाबी, ढींगरी एवं सफेद मशरूम का ही उत्पादन कर रही हैं। उनके अनुसार कमरे का तापमान जितना होना चाहिए उतना मौजूद है। उनके मशरूम सिर्फ उनके गांव ही नहीं बल्कि आस-पड़ोस के गांव-शहरों में भी बिकने को जाते हैं।

गांव की महिलाओं को उससे जोड़ा

रोशनी सिर्फ खुद से खेती हीं नहीं कर रही हैं बल्कि उन्होंने अपने गांव के अन्य महिलाओं को भी ट्रेनिंग देकर इस मशरूम की खेती से जोड़ दिया है। वह उनलोगों को मशरूम के बीज लगाने और उनका देखभाल करने के लिए रोजाना 200 रुपये देती हैं। इतना ही नहीं उन्होंने ट्रेकिंग का प्रशिक्षण भी लिया है इसलिए वह इसका ट्रेनिंग भी लोगों को करा रही हैं।

अपने दम पर रोजगार शुरू करना और इससे अन्य व्यक्तियों को जोड़ने के लिए The Logically रोशनी जी को सलाम करता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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