Wednesday, August 4, 2021

अपनी जान जोख़िम में डालकर, बाढ़ पीड़ितों तक सहायता पहुंचा रहा युवाओं का यह समूह: रोटी बैंक छपरा

बारिश, पानी और नाव अधिकांश लोगों को अच्छे लगते हैं. पर ये बारिश रुकने का नाम न ले, नदियों का पानी उफान पर हो और नाव सड़कों पर चल रहें हो तो उस स्थिति में क्या कहेंगे. क्या तब भी ये हमें सुहावने लगेंगे? संस्कृत में एक कहावत है, “अति सर्वत्र वर्जयेत” (Excess of everything is bad). ऐसे ही ज़रूरत से ज़्यादा बारिश भी हालत खस्ता कर देती है. देश के कई राज्यों में बाढ़ की वजह से गंभीर हालात बने हुए हैं. असम, बिहार, गुजरात, राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और उत्‍तर प्रदेश तक बाढ़ के हालात हैं.

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बिहार राज्य के 16 जिलों की लगभग 83.62 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हो चुकी है। एक तो COVID-19 ऊपर से बाढ़ ने इन सब की ज़िंदगी अस्त व्यस्त कर दी है। इन सभी लोगों की ज़िंदगी वापस से पटरी पर लाने के लिए हम सभी को एक जुट होकर काम करना होगा। जो सक्षम हैं, उन्हें ज़रूरतमंदों की मदद करनी होगी। आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही इंसान की है जो अपने संगठन ‘रोटी बैंक, छपरा’ के जरिए नि:स्वार्थ भाव से भूखे को भोजन कराते है। इनका नाम है, रवि शंकर उपाध्याय। बाढ़ की स्थिति में भी रवि शंकर अपनी टीम के साथ आगे आकर लोगों की मदद कर रहे हैं।

रविशंकर उपाध्याय (Ravishankar Upadhyay) सारण जिले के छपरा शहर के निवासी श्री टुनेश्वर उपाध्याय एवं श्रीमती निर्मला उपाध्याय के सूपुत्र हैं। रवि शंकर पेशे से एक शिक्षक हैं। इनका कहना है कि सारण में बाढ़ की स्थिति ज़्यादा भयावह है। इसे मद्देनजर रखते हुए हमारी रोटी बैंक की टीम ज़रूरतमंदों तक खाना पहुंचाने का काम कर रही है। ‘Zomato Feeding India’ की तरफ से ‘संकल्प एक प्रयास’ एनजीओ है जो पूरे बिहार में कार्यरत है। उसकी मदद से हमारी संगठन ‘रोटी बैंक’ छपरा’ को खाने के 500 पैकेट्स प्राप्त हुए हैं। रवि शंकर कहते हैं कि बाढ़ के कारण बिहार के गांवों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। बहुत सारे तकलीफों को पार करते हुए हमारे टीम के सदस्य लोगों तक इन पैकेट्स को पहुंचा रहें हैं।

ऑल इंडिया रोटी बैंक वाराणसी के कार्यों को देखकर गरीबों की मदद करने के लिए रोटी बैंक छपरा की शुरुआत की

रोटी बैंक, छपरा केवल बाढ़ में ही नहीं बल्कि बाढ़ के पहले भी वर्ष 2018 से ग़रीब, असहाय और भूखे लोगों को खाना खिला रहा है। The Logically से बात करते हुए रविशंकर ने बताया, “रोटी बैंक, छपरा की शुरुआत वर्ष 2018 के 10 अक्टूबर को हुई थी। लेकिन इसकी रूप रेखा अप्रैल महीने में ही बन गई थी। फेसबुक पर ऑल इंडिया रोटी बैंक (AIRBT-630) वाराणसी के कार्यों को देखकर अपने शहर में भी ऐसी ही एक संगठन शुरू करने का ख़्याल आया। चुंकि अपने शहर में भी बहुत सारे ज़रूरतमन्द हैं जो हर रात भूखे पेट सोने को विवश है। अक्सर चौक-चौराहों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और सड़क किनारे भूखे और लाचार रूप से सोने व रहने को मजबूर लोगों को देख मन व्याकुल एवं व्यथित हो जाता था। पर मैं उनके लिए कुछ कर नहीं पाता। फेसबुक पर रोटी बैंक वाराणसी का कार्य देखकर कुछ आशा की किरण दिखने लगी। उस वीडियो में दिखाया गया था कि कड़ाके की सर्दी में वाराणसी के सड़को पर कुछ युवा ज़रूरतमन्दों को नींद से उठाकर भोजन दे रहे थे। फिर क्या.. अपने शहर में ऐसे ग़रीब और असहाय लोगों की सहायता के लिए मैंने ‘रोटी बैंक, छपरा’ नामक संगठन की शुरुआत की।”

2018 के कलश स्थापना के दिन से शुरू हुआ यह सिलसिला अब तक कायम है

रविशंकर उपाध्याय (Ravishankar Upadhyay) बताते हैं, शुरुआत में उनकी टीम में 4-5 सदस्य थे। जिनमे मुख्य रूप से श्री सत्येंद्र कुमार, श्री अभय पांडेय, श्री रामजन्म माँझी, श्री बिपीन बिहारी थे। 10 अक्टूबर 2018 को दशहरा के कलश स्थापना के दिन से सबने मिलकर इस शुभ कार्य शुरुआत की। उस दिन अपने घर से 7 लोगों के लिए भोजन बनवा कर शहर में बांटने के लिए निकल गए। पहला दिन था। इसलिए मन में झिझक भी ज़्यादा थी। लोग क्या कहेंगे। कोई ग़लत न समझ ले। 7 पैकेट भोजन बांटने के लिए उन्हें पूरे 3 किलोमीटर जाना पड़ा। पर इस पहले दिन सफलता पूर्वक भोजन वितरित किया गया। तब से लेकर आज तक यह सिलसिला ऐसे ही कायम है। हर रोज रात 9 बजे गरीबी की मार झेल रहे भूखे लोगों का पेट भरने के लिए यह टीम शहर में निकल पड़ती है। ग़रीब व भूखे लोग हर रात 9 बजे इस टीम की राह भी देखते हैं।

खुशियों के रंग रोटी बैंक के संग

रविशंकर उपाध्याय हमारी टीम The Logically से बात करते हुए बताते है, शुरुआत में कुछ लोग सकारात्मक टिप्पणी करते तो कुछ लोग बेहद नकारात्मक। फिर धीरे-धीरे हमारे काम के तरीक़े को देखकर जब शहर के लोगों को यह बात समझ अाई कि हमारी यह संस्था (रोटी बैंक, छपरा) सामाजिक तौर पर ज़रूरतमन्दों की मदद करने के लिए बनाई गई है तब हमारी संस्था से और भी लोग जुड़ने लगें या आर्थिक रूप से मदद करने लगें। पहले हमलोग अपने घरों से भोजन बनाकर वितरण करने जाते थे। फिर “खुशियों के रंग रोटी बैंक के संग” के नारे से प्रभावित होकर शहर के लोग अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह, पूजा-पाठ या अन्य किसी शुभ अवसर पर गरीबों को भोजन कराने के लिए आने लगे।

फिलहाल उनकी टीम में 20 सदस्य है। उनमें से कुछ लोग नौकरी करते हैं तो कुछ व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। सभी अपने काम से समय निकाल कर समाजसेवा को देते हैं। श्री राकेश रंजन, श्री संजीव कुमार चौधरी, श्री अशोक कुमार, श्री पिंटू गुप्ता, श्री रंजीत जयसवाल, श्री कृष्ण मोहन, श्री प्रवीण कुमार, श्री मणिदीप पॉल, श्री राहुल कुमार, श्री विवेक कुमार, श्री किशन कुमार, श्री मनोज डाबर, श्री अश्विनी गुप्ता, श्री राजेश कुमार, श्री सूरज आनन्द, श्री हरिओम कुमार इत्यादि सदस्यों से मिलकर बनी रोटी बैंक छपरा की टीम गरीब व असहाय लोगों को खाना खिलाने लगी।

आज जब पूरा बिहार बाढ़ की चपेट में है तब भी यह संगठन लोगों की मदद करने में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं। पहले सर्वे होता है, फिर चिन्हित एरिया में जहां लोग बहुत लाचार है और बिल्कुल भी सक्षम नहीं है, उन तक रोटी बैंक छपरा के सदस्य खाने का पैकेट पहुंचा रहें हैं। अब तक अमनौर के 3-4 पंचायत, बांसडीह, मदारपुर, चैनपुर तकिया, साई टोला गवंद्री, मकेर सोन्हो, पचलख, गरखा के 500 परिवारों तक भोजन के पैकेट्स पहुंचाए जा चुके हैं। हर खाने में पैकेट में 4 किलो चुरा, 2 किलो फरूही, 1 बड़ा पैकेट बिस्किट और नमकीन, बच्चों के लिए दूध पाउडर और साबुन है। बाढ़ की वजह से गांव के लोगों तक पहुंचने में थोड़ी तकलीफ़ भी होती है। फिर भी इस टीम के सदस्य अपने पथ से विचलित नहीं होते। पिक उप व ट्रक की मदद से भोजन के पैकेट्स पहुंचाते हैं और अपना काम पूरे ईमानदारी से करते हैं।

भारत में भुखमरी

2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भुखमरी और कुपोषण के मामले में 117 मुल्कों की सूची में हमारा देश 102वें स्थान पर है। भूख के कारण औसतन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रति सेकेंड 1 व्यक्ति की और प्रति 5 सेकेंड में एक बच्चे की मृत्यु होती है। भारत के लगभग सभी शहरों में सड़क किनारे आज भी कुछ लोग खाली पेट सोने को मजबूर हैं। हर साल बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाएं लोगों की गिनती और भी बढ़ा देती है। इस साल COVID-19 ने भी लोगों की हालत ख़राब कर रखी है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए रोटी बैंक छपरा लोगों की मदद करने के लिए प्रयासरत है। लॉक डाउन में भी वृहद स्तर पर इस संगठन के द्वारा ज़रूरतमन्दों के बीच राशन, भोजन का वितरण किया गया है। साथ ही साथ सभी प्रवासियों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की गई थी।

ऑल इंडिया रोटी बैंक ट्रस्ट (AIRBT) के संस्थापक श्री किशोरकांत तिवारी जी और इनके सहयोगी श्री रौशन पटेल जी के द्वारा किए जा रहे इस नेक कार्य को देखकर बिहार के सारण जिले के छपरा शहर में भी रोटी बैंक शुरू करने वाले रविशंकर उपाध्याय (Ravishankar Upadhyay) और इनके टीम के सदस्यों के प्रति The Logically आभार व्यक्त करता है और अपने पाठकों से अनुरोध करता है कि ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए आप भी आगे आएं।