Tuesday, September 28, 2021

इस किसान ने तलाब के बदले खेत मे उगाये सिंघाड़े, एक एकड़ में डेढ़ लाख का फायदा हुआ: तरीका जाने

अधिकतर लोग कृषि में पुरानी चली आ रही पद्धति को अपनाकर कृषि करते हैं लेकिन वहीं पर कुछ लोग नए प्रयोगों से कृषि कर सफलता हासिल करते हैं। हमने यह तो अवश्य सुना है कि सिंघाड़े की खेती किसी तालाब में या जहां पानी इकट्ठा होता है वहां होती है। लेकिन एक किसान ऐसे हैं जो उसे तालाब में नहीं बल्कि मिट्टी में उगा रहें हैं और लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अच्छे से खेती की गई तो इस खेती में खर्च बहुत कम और मुनाफा अधिक है।

52 वर्षीय किसान सेठपाल सिंह

सेठपाल सिंह (Sethpal Singh) उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से ताल्लुक रखते हैं और वह मिश्रित खेती करतें हैं। वह अपने खेतों में जैविक उर्वरक का उपयोग करते हैं ताकि शरीर स्वस्थ रहे और मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी बनी रहे। इसके साथ-साथ वह नए-नए आविष्कार और खोज भी करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि अगर आविष्कार नहीं होगा तो किसान खेतों से अधिक मुनाफा नहीं कमा सकते। उन्होंने होमियोपैथी से डिग्री प्राप्त कर गांव में अपनी क्लीनिक के माध्यम से लोगों का इलाज भी किया है।

Sethpal Singh making organic fertilizer
अपने खेतों में ही बनाते हैं जैविक खाद

1995 में बने गांव के प्रधान

सेठपाल सिंह की जिंदगी में टर्निंग प्वाइंट तब आया जब वह गांव के प्रधान बने। गांव के प्रधान बनने के दौरान जरूरी होता है कि गांव में विकास के लिए कौन सा कार्य किया जाए?? तब उन्हें लगा कि गांव में अगर विकास जरूरी है तो किसानों को सही तरीके से खेती के बारे में जानकारी प्राप्त होना चाहिए। उसके बाद उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र में जाना शुरू किया ताकि वह नए-नए तरीके सीखें और गांव के किसानों की मदद कर सकें। केवीको ने उन्हें यह सलाह दी कि ट्रेडिशनल खेती के साथ, सब्जियों और फल-फूल की खेती करें।

शुरू किया खेतों में काम करना

केवीको की सलाह मानकर उन्होंने खुद खेतों में काम करना शुरू किया और फ्रेंच बिन्स की बुआई की। जब लोगों ने उन्हें खेतों में काम करते देखा तो उन्हें कहा कि प्रधान जी आप यह काम क्यों कर रहे हो?? लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी क्योंकि उन्हें खेती में कुछ अलग करना था। उन्होंने अपनी खेती के लिए केविको से खाद बनाना सीखा और जैविक खाद खुद बनाने लगे। वह अपने खेतों में पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों और फलों को भी उगाने लगे।

यह भी पढ़े :- खेती में कुछ नया करना चाहते हैं तो इन चार तरह की खेती को समझें, कम जगह में अच्छे पैदावार होते हैं

मिट्टी में उगाए सिंघाड़े

आश्चर्यजनक बात यह है कि वह अपने खेतों में सिंघाड़े उगाने लगे। जो सिंघाड़े आप अक्सर लोगों को तालाब में उगाते हुए देखें होंगे। उन्होंने मात्र 1 एकड़ भूमि में इसकी खेती की और जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा भी हुआ। उसके लिए उन्होंने अपने खेतों में मेड़ बनाई और उसमें पानी डाला। जैविक खाद को डालकर उसमे सिंघाड़े की बुआई की। बुआई के दौरान इन पौधों के बीच की दूरी लगभ 2 मीटर रखी ताकि वह अच्छी तरह फल दे सके। जैविक खाद द्वारा उगाई गई इस सिंघाड़े की मिठास अधिक है। उन्होंने मात्र 1 एकड़ में 1.50 लाख मुनाफा कमाया। उनकी खेती से वहां के अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिली।

Sethpal Singh chestnut field
सेठपाल सिंह का सिंघाड़े का खेत

रिले कोर्पिंग से हुआ लाभ

रिले कोर्पिंग की मदद से उन्हें अधिक लाभ हुआ। इसका मतलब यह हुआ कि आप एक के बाद एक फसलों को उगाकर उनसे पैसे कमा सकते हैं। उन्होंने सिंघाड़े की खेती के बाद उससे पानी को बाहर निकाला और उसमें सब्जियों की खेती की। सेठपाल जी अपनी सब्जियों की खेती में मेथी, मिर्च, करेला जैसे अन्य सब्जियों को लगाया और उससे लगभग 4 लाख का मुनाफा कमाया।

फसल बदलने की उगाया चावल

फिर उन्होंने एक एकड़ भूमि में चावल की पूसा 1507 किस्म को लगाया। उन्होंने अपने खेतों में जैविक उर्वरक का निर्माण किया था इसीलिए 1 एकड़ में लगभग 750 किलोग्राम चावल का उत्पादन हुआ। बार-बार वह इसी 1 एकड़ में खेती करते और उसके जो भी एग्रो-वेस्ट रह जाते उन्हें मिट्टी में मिल जाने देते। ताकि वह मिट्टी में मिलकर उसकी क्षमता को बनाए रखें। इसीलिए उनके खेतों में अधिक पैदावार होने लगी। उन्होंने लगभग 2 सालों तक वहां अन्य तरह की सब्जियों को लगाया।

जैविक विधि से मिश्रित खेती

उन्होंने यह जानकारी दिया है कि उन्होंने ना तो कभी पराली को जलाया है और ना ही अपने खेतों की कभी जुताई की है। फिर भी उनके खेतों में इतने पोषक तत्व मौजूद हैं कि पैदावार अच्छी होती है। उनके खेतों में सिर्फ सब्जियां ही नहीं बल्कि 160 आम और 122 अमरूद के भी पेड़ हैं। मौसम में उनके फलों की बिक्री लगभग 300 क्विंटल तक हो जाती है। उनके फल उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में भी बिकते हैं।

किया है मछलीपालन भी

उन्होंने सिर्फ खेती ही नहीं बल्कि कुछ जगह में तालाब का निर्माण कर मत्स्य पालन का कार्य भी प्रारंभ किया है। उन्होंने अपने तालाब के यत्र-तत्र आड़ू, लीची और केले जैसे फलों के पौधे लगाए हैं ताकि वहां ठंडक बनी रहे। सेठपाल जी उन किसानों के लिए उदाहरण हैं जो खेती से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं।

यहां कर सकते हैं सम्पर्क

अगर आप भी सेठपाल जी से खेती के गुण सीखना चाहतें हैं तो 9012911278 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

जिस तरह सेठपाल जी ने खेती के नए-नए तरीकों का उपयोग कर मुनाफा कमाया वह कार्य अनुकरणीय है। The Logically उन्हें उनकी खेती करने के तरीकों की प्रशंसा करता है।