Friday, January 22, 2021

गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को दे रही हैं नौकरी, लगभग 800 महिलाओं को सिक्युरिटी गार्ड की ट्रेनिंग दे चुकी हैं

हमारे समाज मे पुरुष और महिलाओ के काम बांटे हुए है। महिलाओ को कुछ काम के सीमा में बांधा गया हैं। समाज की आम धारणा है कि कुछ काम महिलाओ के लिए नही है जैसे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी। कुछ समय पहले तक कोई यह सोच भी नही सकता था कि महिलाएं भी सिक्योरिटी गार्ड हो सकती हैं पर आज महिलाये बेफिक्र हो कर यह नौकरी कर रही हैं। इस आईडिया के पीछे है श्रावणी पवार( Shravani Pawar)।
श्रावणी पवार कर्नाटक के हूबली में पली-बढ़ी हैं। इन्होंने अपनी पढ़ाई सोशल वर्क विषय मे की हैं। पढ़ाई खत्म करने के बाद कुछ दिन तक इन्होंने एक NGO में काम किया जहां इन्हें ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को जोड़ कर एक स्वयम सहायता समूह बनाना था। इस काम के दौरान श्रावणी ने महिलाओ की ज़िंदगी को समझा और उनकी परेशानियों को देखा। श्रावणी ने महसूस किया कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक काम करती है पर उन्हें वह इज़्ज़त नहीं दी जाती हैं। तब श्रावणी ने फैसला किया कि वो इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएंगी।

महिलाओ को सिक्योरिटी गार्ड बनाने का विचार आया

श्रावणी पवार ने एक देशपाण्डे फाउंडेशन की सोशल इंट्रप्रेनशिप की फेलोशिप जॉइन की। इसके आखिरी दिन सबको अपने स्टार्टअप का आईडिया देना था। बहुत सोचने के बाद श्रावणी ने महिलाओ को सिक्योरिटी गार्ड की ट्रेनिंग देने का सोचा।

helps women

दो साथियों ने इस काम मे साथ बीच मे ही छोड़ा

श्रावणी का यह सफर आसान नही था। जब इन्होंने इस सफर की शरुआत की तब इस काम मे इनकी दो साथी थी। एक साथी स्टार्ट अप का रजिस्ट्रेशन करने के पहले ही हट गई और दूसरी साथी ने एक साल बाद संगठन छोड़ दिया।

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सेफ हैंड 24×7( Safehands24×7) की शुरुआत

श्रावणी ने 2009 में अपने संगठन की नींव रखी। उस वक़्त उनके साथ 6 लड़कियां थी। यह श्रावणी की मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम है कि आज यह संगठन 800 से ज़्यादा लड़कियों को सिक्योरिटी गार्ड की ट्रेनिंग दे चुका हैं। ट्रेनिंग के बाद इन महिलाओं को नौकरी भी दी जाती हैं। स्कूल, कॉलेज, सोसाइटी में यह महिलाये बतौर सिक्योरिटी गार्ड नौकरी करती हैं। यह महिलाए दिन में गार्ड की नौकरी करती है और रात के लिए इन्होंने कुछ लड़कों को ट्रेनिंग दी हुई हैं।

Sharvani pawar

क्लाइंट महिलाओ को सिक्योरिटी गार्ड रखने को तैयार नही थे

श्रावणी बताती हैं कि ट्रेनिंग देने के बाद महिलाओ को नौकरी दिलाने में बहुत परेशानी आयी। कोई भी क्लाइंट महिलाओ को रखने के लिए तैयार नही था। तब श्रावणी उन्हें समझाती की एक महीने रख के देखिए अगर परेशानी हुई तो फिर किसी लड़के को भेज देंगे। पहले तो लडकिया ही तैयार नही थी सिक्योरिटी गार्ड बनने के लिए। पर आज जिस यूनिफॉर्म को पहनने से महिलाओ को दिक्कत थी वही यूनिफार्म पहन कर वह महिलाएं गर्व से भर जाती हैं।

श्रावणी के परिवार को उनके काम पर आपत्ति थी

श्रावणी बताती हैं कि जब उन्होंने यह स्टार्टअप शुरू किया तब उनके परिवार को इस काम के बारे में पता भी नही था। जब उनकी एक साथी ने उनका साथ छोड़ा तब परिवार को पता चला। माता-पिता ने श्रावणी को साफ मना कर दिया था इस काम के लिए पर श्रावणी कहा हार मानने वाली थी। उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और हूबली आकर रहने लगी। कुछ महीने बाद उनके भाई उनके पास आए और उन्हें वापस घर चलने को कहा। श्रावणी ने अपने काम के कारण शादी ना करने का फैसला लिया था पर सच्चा हमसफ़र मिलने पर उन्होंने शादी कर ली। आज श्रावणी दो बच्चों की माँ हैं।

Sharvani pawar  helping women to become security guard

हाऊसकीपिंग की भी ट्रेनिंग दे रही हैं

श्रावणी अपने संगठन के माध्यम से अब महिलाओ को हाउस कीपिंग सर्विस की भी ट्रेनिंग दे रही हैं। महिलाओ को ट्रेन कर के वह इन सबको जॉब भी दिलाती हैं।

TED Talk में अपनी बातो से सबका दिल जीत लिया

श्रावणी को पुणे के एक टेड टॉक में अपनी बात कहने के लिए इनवाइट किया गया था। श्रावणी उस समय प्रेग्नेंट थी । टेड टॉक के दिन के दो दिन बाद श्रावणी की डिलीवरी डेट थी। सब ने मना किया इसके बावजूद श्रावणी ने टेड टॉक में भाग लिया और उनकी डिलीवरी भी निश्चित डेट पर ही हुई।

Sharvani pawar

श्रावणी पवार( Sharvani Pawar) ने महिलाओ को सीमा के बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनना सिखाया हैं। समाज की परवाह ना करके इन्होंने महिलाओ को अपनी परवाह करना सिखाया हैं। अगर आप श्रावणी पवार से सम्पर्क करना चाहते है तो [email protected]×7.com पर ईमेल कर सकते है या 9591985611 पर कॉल कर सकते हैं।

मृणालिनी सिंह
मृणालिनी बिहार के छपरा की रहने वाली हैं। अपने पढाई के साथ-साथ मृणालिनी समाजिक मुद्दों से सरोकार रखती हैं और उनके बारे में अनेकों माध्यम से अपने विचार रखने की कोशिश करती हैं। अपने लेखनी के माध्यम से यह युवा लेखिका, समाजिक परिवेश में सकारात्मक भाव लाने की कोशिश करती हैं।

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